अजीत जोगी ढाई घंटे में बने थे नेता, राजीव से दोस्ती कर अधिकारी से बन गये सीएम

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नई दिल्ली। छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम अजीत जोगी नहीं रहे लेकिन उनकी यादें और जीवन के रोचक किस्से आज भी लोगों को प्रेरित और रोमांचित कर रहे हैं। देश में कुछ ही ऐसे लोग रहे हैं जिन्हें जनता का अपार स्नेह मिला है उनमें से अजीत जोगी भी हैं। कहते हैं कि जननेता नहीं थे लेकिन सीएम बनने के बाद जनता का प्यार उन्हें लोकप्रिय बना गया।

पहले हुई राजीव से मित्रता फिर बन गये पीएम आवास के चहेता

रेकॉर्ड 14 साल जिलाधिकारी रहे अजीत जोगी गांधी परिवार के बेहद करीबी रहे। बताया जाता है कि अजीत जोगी जब रायपुर के जिला कलेक्टर थे तब राजीव गांधी पायलट हुआ करते थे। राजीव गांधी की फ्लाइट जब कभी रायुपर में लैंड होती तो तत्कालीन जिला कलेक्टर अजीत जोगी खुद उन्हें रिसीव करने एयरपोर्ट जाया करते थे। उस वक्त राजीव भी यंग थे और जोगी भी। इस वजह से दोनों के बीच काफी अच्छी दोस्ती जैसा रिश्ता बन गया था। इस तरह एक जिले के कलेक्टर अजीत जोगी की पहुंच तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के आवास तक हो चुकी थी।

महज ढाई घंटे में बन गये नेता

बतौर इंदौर के कलेक्टर अजीत जोगी ग्रामीण इलाके के दौरे पर गए थे। रात में जब वह घर लौटे तो पत्नी रेणु ने बताया कि प्रधानमंत्री कार्यालय से फोन आया था। पहले तो जोगी को लगा कि भला पीएमओ से किसी कलेक्टर को क्यों कॉल आएगा। लेकिन अगली सुबह तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी के पीए ने उनसे संपर्क किया।

उन्होंने जोगी से कहा कि प्रधानमंत्री चाहते हैं कि आप तत्काल कलेक्टर पद से इस्तीफा दे दें। यह सुनते ही जोगी थोड़े घबरा गए। लेकिन अगले ही वाक्य में पीएम के पीए ने कहा कि प्रधानमंत्री चाहते हैं आप मध्य प्रदेश से राज्यसभा के लिए नॉमिनेशन करें।

उनसे कहा कि रात 12 बजे तक दिग्विजय सिंह उन्हें लेने इंदौर पहुंचेंगे। सुबह 11 बजे तक इस्तीफे की सारी औपचारिकता पूरी कर ली जाएगी। कलेक्टर पद से इस्तीफा देने और कांग्रेस की सदस्यता लेने में करीब ढाई घंटे का वक्त लगा। इस तरह अजीत जोगी कलेक्टर से राजनेता बने।

जोगी के हारने की बात कही तो रिश्ता से कर दिया मना

यूं तो अजीत जोगी जनाधार वाले नेता नहीं माने जाते रहे, लेकिन कुछ समाज के बीच उनकी अच्छी पकड़ रही। इसकी बानगी 2004 के लोकसभा चुनाव के दौरान अखबारों में प्रकाशित एक रिपोर्ट से होती है।
अजीत जोगी थे तो आदिवासी समाज से थे, लेकिन अनूसुचित श्रेणी में आने वाला सतनामी समाज भी उन्हें अपना नेता मानता था। उस दौर के अखबारों में एक खबर छपी थी कि अजीत जोगी पर बहस के चलते लड़का-लड़की की सगाई टूट गई थी।

दरअसल, बात यह थी कि छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव हारने के बाद अजीत जोगी महासमुंद लोकसभा सीट से चुनाव मैदान में थे। इस सीट पर उनके विपरीत बीजेपी के वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल थे।

दोनों परिवारों के बीच सगाई की रस्म चल रही थी। भोजन का दौर चल रहा था। इसी दौरान लड़की पक्ष के लोगों ने नॉर्मल बातचीत में लड़के वालों से पूछ लिया कि इस बार के चुनाव में महासमुंद लोकसभा सीट से किसका पलड़ा भारी है। लड़के वालों ने कहा कि अजीत जोगी महासमुंद से चुनाव हार रहे हैं। यह बात लड़की वालों को नागवार गुजरी।

देखते ही देखते बात इतनी बढ़ गई कि लड़की वालों ने कहा कि जो परिवार अजीत जोगी का विरोधी है वे उनके साथ रिश्ता नहीं करेंगे। गांव वालों के बीच-बचाव से दोनों परिवारों का झगड़ा तो टल गया, लेकिन सगाई टूट गई। हालांकि अजीत जोगी यह चुनाव जीत गए थे।

दिलचस्प बात यह है कि इस लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान अजीत जोगी की कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी, जिसमें उनके शरीर के कमर के नीचे का हिस्सा काम करना बंद कर दिया था। दुर्घटना की वजह से अजीत जोगी प्रचार नहीं कर सके लेकिन फिर भी वह जीते थे।

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