आज मकर संक्रांति पर संगम में डुबकी लगाएंगे करीब 80 लाख श्रद्धालु, कड़ाके की सर्दी पर आस्था भारी

प्रयागराज. गंगा, यमुना व अदृश्य सरस्वती के संगम की नगरी प्रयागराज में माघ मेला-2020 मनाया जा रहा है। यहां स्नान, दान, तप-जप के लिए तमाम श्रद्धालु व संत कल्पवास कर रहे हैं। बुधवार को मकर संक्रांति पर्व पर संगम में मोक्ष की डुबकी लगाने के लिए लाखों श्रद्धालु प्रयागराज पहुंचे हैं। उत्साह ऐसा किकड़ाके की सर्दी भी आस्था के पग को रोक नहीं पा रही है। मेला प्रशासन ने सुरक्षा के चाक चौबंद व्यवस्था की है। प्रशासन ने बुधवार को यहां करीब 80 लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान लगाया है।

Image result for makar sankranti

नागवासुकि से अरैल के बीच संगम के 16 घाटों पर श्रद्धालुओं के स्नान की व्यवस्था की गई है। महिलाओं के लिए 700 चेंजिंग रूम बना गए हैं। वर्ष 2018 के मेले में 5 सेक्टर थे, जबकि इस बार 6 सेक्टर में मेला बसाया जा रहा है। माघ मेले के दौरान रेलवे ने मकर संक्रांति पर्व पर 225 मेला स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया है।माघ मेला पहली बार 2500 बीघा क्षेत्रफल में बसाया गया है। पिछले साल इसका दायरा 2000 बीघा था। यहां करीब पांच लाख तंबुओं व तिरपाल का अस्थायीशहर बयाया गया है। माघ मेले की शुरुआत पौष पूर्णिमा से हुई है। मकर संक्रांति पर्व पर मुख्य स्नान होगा। इसके लिए सोमवार से ही श्रद्धालु संगम पहुंचे लगे थे। बुधवार को मकर संक्रांति पूर्व पूरे देश में मनाया जाएगा। लेकिन मंगलवार से ही लोगों ने स्नान-दान शुरू कर दिया है।
मकर संक्रांति की यह पौराणिक मान्यताएं
भारतीय विद्या भवन के प्राचार्य डॉ. त्रिवेणी प्रसाद त्रिपाठी के मुताबिक मकर संक्रांति के साथ कई पौराणिक कथाएं जुड़ी हैं। माना जाता है कि इस दिन सूर्य भगवान अपने पुत्र शनि से मिलने स्वयं उनके घर जाते हैं। शनिदेव मकर राशि के स्वामी हैं। इसलिए इस दिन को मकर सक्रांति के नाम से जाना जाता है। ये भी कहा जाता है कि इसी दिन भगवान विष्णु ने असुरों का अंत कर युद्ध समाप्ति की घोषणा की थी व सभी असुरों का सिर मंदार पर्वत में दबा दिया था। उसी दिन से मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाता है।
यह भी माना जाता है मकर संक्रांति के दिन ही गंगा जी भागीरथ के पीछे- पीछे कपिल मुनि के आश्रम से होकर सागर में उनसे जा मिली थी। अन्य मान्यता है कि गंगा को धरती पर लाने वाले भागीरथ ने अपने पूर्वजों के लिए इस दिन तर्पण किया था,जिसे स्वीकार कर गंगा समुद्र में जाकर मिल गई थी। ये भी मान्यता है कि सर शय्यापर लेटे हुए भीष्म पितामह ने अपना शरीर त्यागने के लिए मकर संक्रांति के दिन का ही चयन किया था। एक अन्य मान्यता के अनुसार मकर संक्रांति के दिन ही यशोदा ने कृष्ण जन्म के लिए व्रत किया था, जिसके बाद मकर संक्रांति के व्रत का प्रचलन हुआ।
संक्रांति पर दान का विशेष महत्व
संक्रांति पर दान करने का विशेष महत्व है। धर्म शास्त्रों के अनुसार इस दिन किए गए दान का अक्षय पुण्य प्राप्त होता है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को कंबल, गर्म वस्त्र, घी, दाल-चावल की खिचड़ी आदि का दान करें। गरीबों को भोजन कराएं तो और भी ज्यादा शुभ रहता है।
प्रमुख स्नान-

Advertisement
तारीख प्रमुख स्नान श्रद्धालुओं की संख्या का अनुमान
15 जनवरी मकर संक्रांति 80 लाख
24 जनवरी मौनी अमावस्या 25 लाख
30 जनवरी बसंत पंचमी 75 लाख
09 फरवरी माघी पूर्णिमा 75 लाख
21 फरवरी महाशिवरात्रि 15 लाख

Send Your News to +919458002343 email to [email protected] for news publication to eradioindia.com