आतंकवाद के साथी पाकिस्तान को फिर लगी फटकार, स्विटजरलैंड में पाक सेना को बताया गया आतंकी संरक्षक

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  • फिर से माथा पीटकर रोक रहे हैं पाक के नापाक पीएम इमरान

New Delhi. पाकिस्तान अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है, हर बार उसे बेइज्जती सहनी पड़ती है…. तिरस्कार झेलना पड़ता है लेकिन वह आतंकवाद को खत्म करने की बात को स्वीकारने को राजी नहीं है।  संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 43वें सत्र के दौरान जिनेवा में ब्रोकन चेयर स्मारक के पास लिखा गया कि, ‘पाकिस्तान आर्मी एपिकेंटर ऑफ इंटरनेशनल टेररिज्म’ यानी पाकिस्तानी सेना अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद का केंद्र है।

देश की बड़ी शक्तियों में शामिल अमेरिका भी आतंकवाद पर पाकिस्तान को कड़ी फटकार लगा चुका है, इसके अलावा चीन को छोड़ दें तो लगभग एक दर्जन देशों ने पाकिस्तान के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देने के मामले में गुस्से का इजहार कर चुके हैं।

अंतरराष्‍ट्रीच मंचों से भारत ने कई बार साफ-साफ कह दिया है कि पाकिस्‍तान से वार्ता तभी संभव है, जब वह आतंकियों की मदद करना बंद करे। लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान कहते हैं कि उनका मुल्क खुद आतंकवाद से जूझ रहा है। लेकिन यह सभी जानते हैं कि पाकिस्‍तान की कथनी और करनी में काफी अंतर है।

विदेश में पाकिस्‍तान की फजीहत का यह कोई पहला मौका नहीं है। पाकिस्तान को कई बार अंतरराष्‍ट्रीय सम्‍मेलनों के दौरान कड़ा विरोध देखने को मिल चुका है। वहीं, 9/11 के बाद से वैश्विक स्‍तर पर साबित हो गया कि पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद का केंद्र है।

अफगानिस्तान की सीमाओं से लगा उत्तरी वजीरिस्तान का इलाका अल-कायदा और तालिबान के साथ-साथ अन्य आतंकवादी नेटवर्क समूहों से जुड़े हैं, जो स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय आतंकवादियों का एक केंद्र है। पाकिस्‍तान इन आतंकी समूहों के खिलाफ कड़े कदम उठाने में कोई दिलचस्‍पी लेता भी दिखाई नहीं देता है। जब अंतरराष्‍ट्रीय दबाव कुछ ज्‍यादा होता है, तो आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई करने का दिखावा जरूर किया जाता है। जैसा कि पिछले दिनों हाफिज सईद को गिरफ्तार कर किया था। हालांकि, हाफिज के वकील ने ही यह साफ कर दिया था कि पुलिस ने ऐसी धाराएं लगाई हैं, जिनसे बचना बेहद आसान है।

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