नवजात बच्चों की मृत्यु दर अधिक होने का कारण कम वजन भी

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जयपुर। नवजात शिशुओं की मौतों पर कोटा से शुरू हुआ बवाल अब पूरे देश में फैल गया है। राजस्थान में काेटा के अलावा अजमेर सहित कई स्थानों पर शिशुओं की मौत चिंता का कारण बनी हुई है। इस मुद्दे पर भाजपा और सत्तारूढ़ कांग्रेस के बीच बयानबाजी जोरों पर है। नवजात शिशुओं की अकाल मृत्यु से सब हतप्रभ है।

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देश में नवजात शिशुओं की मृत्यु दर का अनुपात 1000 बच्चों पर 30 माना गया है राजस्थान उन राज्यों में शुमार है जहां यह अनुपात राष्ट्रीय अनुपात से कुछ ज्यादा है। पिछले 5 साल में राज्य में नवजात बच्चों की मृत्यु दर प्रतिवर्ष कम हो रही है लेकिन उसे प्रति हजार नवजात बच्चों पर 30 का अनुपात लाने में अभी समय लगेगा।

कोटा के जेके लोन अस्पताल में दिसंबर माह में 100 से ज्यादा बच्चों की मौत का कारण सर्दी, इंफेक्शन के साथ उनका जन्म के समय वजन अपेक्षाकृत कम होना रहा है। राजस्थान में महिला एवं बाल विकास विभाग पोषाहार कार्यक्रम चला रहा है इसके अंतर्गत गर्भवती महिलाओं को उनके बच्चे को जन्म देने तक 930ग्राम पोस्टिक पोषाहार प्रति गुरुवार दिया जा रहा है बच्चे को जन्म देने के उपरांत बीच अगले 6 माह तक भी उसे 930 ग्राम पोस्टिक पोषाहार प्रत्येक गुरुवार को दात्री योजना के तहत दिया जाता है ।

जन्म उपरांत नवजात शिशु को प्रत्येक गुरुवार को आंगनवाड़ी केंद्र द्वारा 750 ग्राम पोस्टिक पोषाहार वितरित होता है वही 11 वर्ष से 14वर्ष की बालिकाओं को जो स्कूल नहीं जाती है उन्हें 930 ग्राम पोस्टिक पोषाहार दिया जाता है। लेकिन माना जा रहा है कि यह पोषाहार उपयुक्त हाथों में नहीं पहुंच पा रहा है।

कोटा में नवजात बच्चों की मौत के बाद चिकित्सा विभाग ने सक्रियता दिखाई है तथा गहन चिकित्सा ईकाइयों में उपकरण बढ़ाने के साथ दवाईयों का पुख्ता इंतजाम किया गया है। हालांकि चिकित्सकों का यह मानना है कि बच्चों को बहुत ही नाजुक हालात में अस्पताल लाया जाता है जिन्हें संभालना काफी मुश्किल होता है। चिकित्सा मंत्री डॉ़ रघु शर्मा का मानना है कि अस्पताल के भवनों की हालत अच्छी नहीं होने से भी सर्दी में बच्चों को संभालना मुश्किल होता है।

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