साउथ कोरिया में महिलाओं का विशेष अभियान है Topless Rally

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नई दिल्ली। एक समाचार बताने वाला था लेकिन अब सोच रहा हूं कि न बताऊं….. छि छि…. बहुत गंदा टाइप है… साउथ कोरिया की महिलायें भी न क्या-क्या करतीं हैं…. भारत में तो ऐसी महिलाओं को तुरन्त बिना आवाज वाला सर्टिफिकेट देकर…. असामाजिक घोषित कर दिया जाता…. 

चभोकन दादा साउथ कोरिया गये थे… बताये कि वहां पर महिलायें ब्रा पहनने से आजादी चाहतीं हैं और बकायदा कुछ महिलायें तो इसके लिये विरोध प्रदर्शन भी कर रहीं हैं…. तो पूरी बतायेंगे लेकिन आपको एक्स्ट्रा काम बता दें… ई रेडियो इंडिया सोशल मीडिया के कई प्लेटफार्म पर लाखों दर्शकों के लिये मेहनत कर रहा है… लाइक, सब्सक्राइब, शेयर व फालो करें और कमेंट कर हमें अपनी राय भी जरूर बतायें….

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28 मई 2018 में कुछ युवतियों ने मासिक धर्म स्वच्छता दिवस को लोगों का नजरिया बदलने के अभियान के साथ मनाया। पश्चिमी सियोल के येओंगडेंगपो में

 आयोजित कार्यक्रम में कुछ महिलाओं ने पुरुष यात्रावाद के खिलाफ विरोध करने के लिए टॉपलेस रैली भी की। 

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जब नारीवादी समूह फ्लेमिंग फेमिनिस्ट एक्शन ने टॉपलेस एक्टिविस्ट की तस्वीरें फेसबुक पर पोस्ट कीं तो उन्हें फेसबुक ने ब्लॉक कर दिया। फेसबुक ब्लॉक कर दिये जाने से तिलमिलाये नारीवादी समूह ने गंगनम में फेसबुक मुख्यालय कोरिया के सामने एक और टॉपलेस प्रदर्शन कर दिया।

हालाकि फेसबुक ने टापलेस रैली की फोटोज को कन्टेंट गाइडलाइन के तहत बैन रखना जारी रखा। आपको बता दें कि नारीवादी समूह फ्लेमिंग फेमिनिस्ट एक्शन 26 अगस्त को “टॉपलेस डे” मनाता है।

द कोरिया हेराल्ड के साथ एक फोन कॉल में, फेसबुक कोरिया के संचार अधिकारी ने नेटवर्क के सामुदायिक दिशानिर्देशों में दोहरे मानकों को स्वीकार किया। अधिकारी ने कहा, “पारंपरिक रूप से, स्विमिंग पूल जैसी जगहों पर, पुरुष अपनी छाती को नंगे करते हैं, जबकि महिलाएं अपने ऊपरी शरीर को ढकेंगी,” अधिकारी ने फेसबुक को सार्वजनिक स्थान पर पसंद किया। “उस सामान्य अर्थ में, टॉपलेस महिलाओं की तस्वीरें (फ्लेमिंग फेमिनिस्ट एक्शन द्वारा पोस्ट की गई) को सार्वजनिक सेटिंग में और हमारे मानकों के उल्लंघन में अस्वीकार्य माना जा सकता है।”

फ्लेमिंग फेमिनिस्ट एक्शन की सदस्य ली गा-ह्यून ने इस धारणा को विवादित बताया कि महिलाओं के स्तन स्वाभाविक रूप से प्रजनन अंग नहीं होते है इसलिये इसे प्रदर्शित करने में कोई हर्ज नहीं है।

नारीवादी दार्शनिक यूं-किम जी-यंग का कहना है कि क्रूरता के आंदोलन को दक्षिण कोरियाई महिलाओं द्वारा समाज द्वारा उन पर बढ़ती बाधाओं के खिलाफ प्रतिरोध के हिस्से के रूप में समझा जा सकता है। ब्रा महिलाओं के शरीर पर एक वस्त्र है। 

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महिलाओं के लिये ब्रा पहनने की बाध्यता असुविधा प्रदान करती है। इसे पहनना या न पहनना किसी भी महिला की निजी स्तंत्रता है। हालाकि कुछ का कहना है कि महिलाओं के वक्ष पुरुषों को कामुक बनाते हैं इसलिए महिला वक्ष को कवर किया जाना चाहिए।

कुछ का कहना है कि पुरुषों की नजरें महिलाओं के वक्ष को लगातार घूरते हैं इसलिये महिलाओं की सुरक्षा के लिहाज से भी ब्रस पहनना जरूरी है।

बर्लिन की रहने वाली 31 साल की डांसर ली ज़ी-हर्न ब्रा पहनने को महिला क्रूरता का हिस्सा मानतीं हैं। उनका मानना है कि, यह आवश्यकता महिलाओं के साथ अप्राकृतिक है हालाकि उन्हें भी ज्यादातर समय ब्रा पहनकर ही रहना पड़ता है लेकिन वो इस अभियान के समर्थन में हैं। 

27 साल की किम मायो-री ब्रा पहनने की आदत को बेहद ऊबाऊं बताती हैं, उन्होंने कहा कि, उन्हें लंबे समय तक ब्रा पहनने से कंधे में दर्द होता है, इसके लिए उन्हें डॉक्टर को दिखाना पड़ता है। ब्रा पहनने से पाचन सम्बंधी बीमारियां होने का भी खतरा रहता है इसलिये दक्षिण कोरिया की महिलायें टापलेस रैली को प्रमुखता से सपोर्ट कर रहीं हैं। 
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