राज्यपाल के भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) को पत्र लिखकर राज्य विधान परिषद की नौ रिक्त सीटों के लिए जल्द से जल्द चुनाव कराने का अनुरोध करने के एक दिन बाद यह राजनीतिक मुलाकात हुई है। इससे पहले चुनावों को कोविड-19 के संकट के कारण स्थगित कर दिया गया था।
मुख्यमंत्री इस समय विधानमंडल के किसी भी सदन के सदस्य नहीं है। इसलिए ठाकरे को शपथ ग्रहण करने के छह महीने के भीतर किसी भी सदन के लिए चुना जाना संवैधानिक मापदंड है। ठाकरे ने 28 नवंबर, 2019 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी और छह महीने की अवधि 28 मई को समाप्त हो रही है।
इसलिए राज्य मंत्रिमंडल ने ठाकरे को गर्वनर कोटा से नामांकित करने के लिए दो बार राज्यपाल को सिफारिशें भेजी हैं। ठाकरे के करीबी और शिवसेना के तेजतर्रार नेता संजय राउत ने हाल ही में राज्यपाल पर तीखी हमला बोलते हुए कहा, “राजभवन राजनीतिक साजिश का केंद्र नहीं बनना चाहिए।
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