Worship Maa Katyayani and wish for success and fame
नवरात्र के छठे दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की पूजा की गई। देवी का यह स्वरूप बड़ा ही कल्याणकारी और दिव्य है। देवी दुर्गा के इस स्वरूप का अवतार कात्यायन ऋषि की पुत्री के रूप में हुआ था।ऐसा कहा जाता है कि जो जातक मां के इस अवतार की पूजा सच्ची श्रद्धा के साथ करते हैं, उन्हें जीवन में कभी परेशान नहीं होती है। साथ ही घर में बरकत का वास रहता है। सुबह से ही शहर के नौ देवी मंदिर, मनोकामना मंदिर, श्री हरमिलाप दुर्गा मंदिर, शिव पार्वती मंदिर, चौरासी घंटा मंदिर, माहौर वैश्य नवदुर्गा मंदिर समेत अन्य मंदिरों में पूजा पाठ की गई। इस दिन सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करना भी बेहद शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे दुर्गा सप्तशती का पूर्ण फल भी प्राप्त होता है।
नवरात्र की सप्तमी तिथि के दिन मां कालरात्रि की पूजा का विधान है। देवी काली मां दुर्गा के नौ स्वरूपों में से एक हैं। ऐसा माना जाता है कि मां कालरात्रि की पूजा करने से जीवन की सभी नकारात्मकता समाप्त होती है। इसके साथ ही गुप्त शत्रुओं का नाश होता है, साथ ही कष्टों को दूर करती है।
सातवें दिन साधक देवी कालरात्रि की पूजा करते हैं, जो मां दुर्गा की उग्र अभिव्यक्ति हैं। देवी काली राक्षसों, बुरी आत्माओं और नकारात्मक ऊर्जाओं का नाश करने के लिए जानी जाती है। साथ ही वे भक्तों के जीवन का अंधकार दूर करती हैं। देवी कालरात्रि का रंग अंधेरी रात के समान गहरा है। खुले बाल, गले की मुंड माला उनके स्वरूप को और भी उग्र बनाता है। देवी अपने भक्तों की सुरक्षा करती हैं
और उन्हें आशीर्वाद प्रदान करती हैं।
मां के चारों हाथों में से दो में शस्त्र रहते है। एक हाथ में अभय मुद्रा में व एक वर मुद्रा में रहता है। एक हाथ चंद्रहास खड्ग धारण करता है। अन्य हाथ में काटेदार कटार रहती है। ऊपरी तन लाल रक्तिम वस्त्र से और नीचे आधा भाग बाघ के चमड़े से ढंका रहता है। स्मरण करने वाले को शुभ वर प्रदान करती है।मां कालरात्रि का शनिदेव से भी संबंध है।
मां कालरात्रि का रंग काला है और शनिदेव का रंग भी काला है। शनिदेव को ज्योतिष शास्त्र में न्याय का देवता माना गया है। मां कालरात्रि भी गलत कार्यों को करने वालों को दंडित करती हैं। मां कालरात्रि की पूजा करने से शनि की ढैया, साडेसाती, कुंडली में शनि दोष से मुक्ति मिलती है। साथ ही मां कालरात्रि के पूजन से शनि देव भी प्रसन्न होते हैं।
सबसे पहले प्रात:स्नान के बाद व्रत और मां कालरात्रि के पूजन का संकल्प लें। उसके बाद मां कालरात्रि को जल, फूल, अक्षत, धूप, दीप, गंध, फल, कुमकुम, सिंदूर आदि अर्पित करते हुए पूजन करें। कलश पूजन करने के बाद दीपक जलाए। मां को लाल पुष्प बहुत प्रिय है इसलिए पूजन में गुड़हल अर्पित करने से माता अति प्रसन्न हो जाती है। इसके बाद मां काली का ध्यान व मंत्र का उच्चारण करें, उसके बाद मां को गुड़ का भोग लगाएं। फिर दुर्गा चालीसा, मां कालरात्रि की कथा आदि का पाठ करें। फिर पूजा का समापन मां कालरात्रि की आरती से करें।पूजा के बाद क्षमा प्रार्थना करें और जो भी मनोकामना हो, उसे मातारानी से कह दें।
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