बुद्ध ने कहा मैत्री। यह अकारण नहीं था। बुद्ध ने कहा कि तुम्हारे जीवन में मैत्री होनी चाहिए।
किसी ने बुद्ध को पूछा भी कि आप प्रेम क्यों नहीं कहते? बुद्ध ने कहा मैत्री प्रेम से बहुत गहरी बात है। प्रेम टूट भी सकता है मैत्री कभी टूटती नहीं। और प्रेम बांधता है, मैत्री मुक्त करती है।
प्रेम किसी को बांध सकता है अपने से, पजेस कर सकता है, मालिक बन सकता है, लेकिन मित्रता किसी की मालिक नहीं बनती, किसी को रोकती नहीं, बांधती नहीं, मुक्त करती है।
और प्रेम इसलिए भी बंधन वाला हो जाता है कि प्रेमियों का आग्रह होता है कि हमारे अतिरिक्त और प्रेम किसी से भी नहीं।
लेकिन मित्रता का कोई आग्रह नहीं होता। एक आदमी के हजारों मित्र हो सकते हैं, लाखों मित्र हो सकते हैं, क्योंकि मित्रता बड़ी व्यापक, गहरी अनुभूति है।
जीवन की सबसे गहरी केंद्रीयता से वह उत्पन्न होती है इसलिए मित्रता अंततः परमात्मा की तरफ ले जाने वाला सबसे बड़ा मार्ग बन जाती है।
जो सबका मित्र है, वह आज नहीं कल परमात्मा के निकट पहुंच जाएगा, क्योंकि सबके नाभि—केंद्रों से उसके संबंध स्थापित हो रहे हैं और एक न एक दिन वह विश्व की नाभि—केंद्र से भी संबंधित हो जाने को है।
-साधना पथ, प्रवचन-२, ओशो
शाहगंज। शाहगंज ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय कछरा के विद्यार्थियों को विद्यालय परिवार की ओर से…
वैदेही शक्ति सखी समिति की पहल, बसफोड़वा समाज संग मनाई सौहार्दपूर्ण होली शाहगंज। नगर के…
सहारनपुर:सहारनपुर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए प्रदेश स्तर के टॉप-10 माफिया में शामिल हाजी…
₹4 लाख करोड़ के प्रस्ताव, कई जिलों में बड़ी घटनाएं उत्तर प्रदेश:उत्तर प्रदेश में आज…
सुइथाकला/शाहगंज। क्षेत्र के प्रसिद्ध सांई धाम बसौली में 26वां वार्षिक उत्सव, विशाल भंडारा और भव्य…
अररिया में सीमा चौकियों का उद्घाटन, नेपाल बॉर्डर पर सड़क परियोजनाओं और निगरानी तंत्र को…
This website uses cookies.