| पत्रकार आदेश जैन ने शहर में पड़ताल कर खूंखार हो रहे कुत्तों के पीछे की वजह ढ़ूंढ निकाली। PIC: eradioindia.com |
मेरठ। शहर से लेकर देहात तक अवारा कुत्तों और बंदरो का आतंक है। रेबीज दुनिया की सबसे खतरनाक बीमारी मे से एक है। किसी को रेबीज हुआ तो परिवार हाथ मलता रह जाता है। लम्बे समय से जिला अस्पताल में चल रही एंटी रेबीज वैक्सीन की किल्लत लेकिन बहुत देर के बाद ही सही प्रदेश मुख्यालय ने मेरठ में 1000 एंटी रैबीज वैक्सीन की खेप भेजी है।
नगर निगम के सभी दावे खोखले साबित हुए। कुत्ते और बंदर कम करने के लिए नसबंदी और पकड़ने को कोई कदम नहीं उठाया जा रहा जिसके चलते कुत्तों और बंदरों की संख्या लगतार बढ़ रही है। जिला अस्पताल में ही रोजाना औसतन 150 वैक्सीन की डिमाड है इसके अतिरिक्त 12 सीएचसी में भी बड़ी संख्या में वेक्सीन की डिमांड है। एक अनुमान के मुताबिक जिले में 12-13 हजार वेक्सीन की आवश्यकता है वहीं वैक्सीन की कमी के चलते मरीज मेडिकल स्टोर और निजी अस्पतालों से वेक्सीन खरीदने को मजबूर हैं।
ई-रेडियो की पड़ताल में पता चला कि शहर में मांस का करोबार ज्यादा होने से कुत्तों में हिंसक प्रवृत्ति बढ़ती है। पर्यावरण में हो रहे बदलाव से भी जीवों में हिंसक प्रवृत्ति बढ़ रही है वहीं प्रजनन के चक्र में कुत्ते ज्यादा अक्रामक होते हैं, कुत्ते 12 माह ही इस प्रक्रिया से गुजरते हैं, हर जगह कुत्ते काटने की घटनायें सब से ज्यादा होती हैं।
कुत्ता, बंदर या अन्य किसी जीव के काटने पर घाव को बहते पानी में दस मिनट तक साबुन से धोयें इसे ज्यादातर वायरस बह जाते हैं। 24 घंटे में पहला डोज लें, डाक्टर की सलाह से पांच डोज लिये जाते है।शासन द्वारा एंटी
रेबिज की 9000 वायल फिक्स कर दी गई जाबकी खपत 12000 की है। कई बार लोग साधारण चोट लगने पर भी वैक्सीन लगवा लेते है, फिलहाल अधार कार्ड देखकर ही वैक्सीन लगाई जा रही है। शासन से अतिरिक्त डोज की मांग की गई है। – डॉ. राजकुमार, सीएमओ मेरठ
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