इसके अलावा दूध, घी, तेल, पनीर, अचार, मुरब्बा और भोजन सामग्रियों में तिल, कुश या तुलसीपत्र डाल देने से ये ग्रहण काल में दूषित नहीं होते. सूखे खाद्य पदार्थों में तिल या कुश डालने की जरूरत नहीं है।
ग्रहणकाल में सूर्य की उपासना करने को बहुत अच्छा माना गया है. ग्रहणकाल में भगवान सूर्य की उपासना, आदित्य हृदय स्तोत्र, सूर्याष्टक स्तोत्र आदि सूर्य स्तोत्रों का पाठ व गुरु मंत्र का जाप करना चाहिए. ग्रहण के बाद स्नान-दान का भी महत्त्व है. ग्रहण जहां जितने समय तक दिखाई देता है, उसकी मान्यता वहां उतने काल तक ही होती है।
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