Social Media Promotion
स्वस्थ, जागरूक और सशक्त लोकतंत्र के निर्माण में मीडिया की भूमिका सदैव अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। समाज को शिक्षित करना, लोगों को जागरूक बनाना और सच्चाई का आईना दिखाना पत्रकारिता का केवल दायित्व ही नहीं, बल्कि उसका सबसे बड़ा धर्म भी है। यही कारण है कि मीडिया को लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहा जाता है। मीडिया का मूल उद्देश्य समाज तक सत्य, प्रमाणिक और विश्वसनीय जानकारी पहुंचाना है, ताकि नागरिक सही और संतुलित जानकारी के आधार पर अपने विचार बना सकें।
मीडिया समाज में सरकार और आम जनता के बीच एक मजबूत सेतु का कार्य करती है। जहां एक ओर पत्रकारिता अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करती है, वहीं दूसरी ओर वह शासन-प्रशासन की नीतियों और निर्णयों को जनता तक पहुंचाने का कार्य भी करती है। इसके साथ ही मीडिया उन समस्याओं और परिस्थितियों को भी उजागर करती है, जिन तक आम व्यक्ति स्वयं नहीं पहुंच सकता। यही कारण है कि मीडिया को अक्सर जनता की “तीसरी आंख” या “दिव्य दृष्टि” भी कहा जाता है।
इतिहास भी इस बात का साक्षी है कि सूचना और सत्य का प्रवाह सदैव समाज तक पहुंचता रहा है। पौराणिक उदाहरणों में महाभारत के युद्ध का उल्लेख किया जाता है, जहां कुरुक्षेत्र के मैदान में हो रही घटनाओं का वर्णन संजय ने अपनी दिव्य दृष्टि के माध्यम से धृतराष्ट्र को सुनाया था। आधुनिक युग में यही भूमिका मीडिया के विभिन्न जनसंचार माध्यम निभा रहे हैं। प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और डिजिटल मीडिया के माध्यम से सूचनाएं तेजी से समाज के हर वर्ग तक पहुंच रही हैं।
समाज के लोगों को यह विश्वास रहता है कि मीडिया के माध्यम से उन्हें सत्य, निष्पक्ष, प्रमाणिक और पारदर्शी जानकारी प्राप्त होगी। किंतु जब तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत किया जाता है, बिना पुष्टि के खबरें प्रसारित की जाती हैं या अधूरी जानकारी के आधार पर समाचार प्रकाशित किए जाते हैं, तब यह न केवल जनता को भ्रमित करता है बल्कि मीडिया की विश्वसनीयता पर भी गंभीर प्रश्न खड़े कर देता है। ऐसी स्थिति में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की प्रतिष्ठा भी प्रभावित होती है।
यही कारण है कि एक जिम्मेदार पत्रकार या संवाददाता किसी भी खबर को प्रकाशित या प्रसारित करने से पहले घटनास्थल पर पहुंचकर तथ्यों की जांच-पड़ताल करता है। प्रत्यक्षदर्शियों से बातचीत, आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि और आवश्यक दस्तावेजों की जांच के बाद ही समाचार को अंतिम रूप दिया जाता है। यदि इसके विपरीत सुनी-सुनाई या अपुष्ट सूचनाओं को ही समाचार के रूप में प्रस्तुत किया जाने लगे, तो पत्रकारिता की निष्पक्षता, पारदर्शिता और प्रमाणिकता पर स्वाभाविक रूप से सवाल उठना तय है।
हाल ही में प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र के निधन की झूठी खबर सोशल मीडिया और कुछ जन माध्यमों में प्रसारित हो गई थी। इस खबर ने न केवल उनके परिवार को आहत किया बल्कि मीडिया की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े कर दिए। इस पर उनकी पत्नी, सांसद और फिल्म अभिनेत्री हेमा मालिनी ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे बेहद गैरजिम्मेदाराना और अक्षम्य बताया। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति उपचाराधीन हो और उसके स्वस्थ होने की उम्मीद हो, तब इस प्रकार की अफवाहें फैलाना न केवल अनुचित है बल्कि परिवार की गरिमा और निजता पर भी आघात है।
इसी प्रकार निष्पक्ष पत्रकारिता को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी एक दैनिक समाचार पत्र की खबरों की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे। उन्होंने अपने समर्थकों से उस समाचार पत्र को न पढ़ने की बात कही थी। यह घटना इस बात का संकेत देती है कि यदि मीडिया अपनी जिम्मेदारी से भटकता है तो उसकी विश्वसनीयता पर जनता और जनप्रतिनिधियों दोनों के स्तर पर प्रश्न उठने लगते हैं।
इसके अतिरिक्त एक दैनिक अखबार में कोडीन युक्त कफ सिरप तस्करी प्रकरण में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच से संबंधित एक खबर प्रकाशित हुई, जिसमें समाजवादी पार्टी के नेता और जौनपुर के शाहगंज विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक शैलेंद्र यादव ‘ललई’ का नाम स्पष्ट किए बिना संकेत दिए गए थे। इससे आहत होकर उन्होंने इसे अपनी सामाजिक और राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने वाला बताया और कानूनी कार्रवाई का सहारा लिया।
उन्होंने प्रेस वार्ता कर खबर का खंडन किया तथा संबंधित अखबार के संपादक और संवाददाता को कानूनी नोटिस भेजा। साथ ही उन्होंने सरकार और जांच एजेंसियों से मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए अपने पिछले दस वर्षों के बैंक खातों की भी जांच कराने की बात कही, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
वर्तमान समय में सूचना प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया के कारण खबरों का प्रसार अत्यंत तेजी से होने लगा है। ऐसे में मीडिया की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। पत्रकारिता के मूल सिद्धांत—प्रमाणिकता, निष्पक्षता और पारदर्शिता—का पालन करना आज पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है। यदि मीडिया इन मूल्यों को बनाए रखती है, तो वह न केवल लोकतंत्र को मजबूत बनाए रखेगी बल्कि जनता का विश्वास भी बनाए रखने में सफल होगी।
अतः आवश्यक है कि मीडिया अपने कर्तव्यों और नैतिक मूल्यों के प्रति सजग रहे। सत्य, प्रमाणिकता और निष्पक्षता के आधार पर ही पत्रकारिता की प्रतिष्ठा और लोकतंत्र की मजबूती सुनिश्चित की जा सकती है। यही वह मार्ग है जिसके माध्यम से मीडिया समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी का सफलतापूर्वक निर्वहन कर सकती है और जनता का विश्वास सदैव बनाए रख सकती है।
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