अन्न सेवा का पांचवां कार्यक्रम सम्पन्न: जरूरतमंदों के चेहरों पर खिला सुकून का मुस्कान
Ann Sewa Program लगातार हो रहा है सफल, मिल रहा है समर्थन, पत्रकारिता के साथ-साथ समाजसेवा का जज्बा रखने वाले युवा पत्रकार त्रिनाथ मिश्र की मुहिम ला रही है रंग
मेरठ। शहर में सेवा और सहयोग की मिसाल पेश करते हुए Ann Sewa Program का पांचवां नियमित कार्यक्रम इस माह के दूसरे रविवार को संपन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराने की भावना के साथ किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि डॉ. सुनील गुप्ता, चेयरमैन, केएमसी ग्रुप; विशिष्ट अतिथि डॉ. हिमानी अग्रवाल, आइवीएफ स्पेशलिस्ट व महिला रोग विशेषज्ञ; तथा द ग्रोइंग पीपल की अध्यक्ष एवं मेरठ नगर निगम की ब्रांड अम्बेसडर अदिति चंद्रा शामिल रहीं।
“भूखे को अन्न देना सबसे बड़ा धर्म” – कार्यक्रम में गूंजा मानवता का संदेश
Ann Sewa Program में पहुंचे मुख्य अतिथि केएमसी ग्रुप के चेयरमैन डॉ. सुनील गुप्ता ने कहा, “भूख सबसे बड़ी समस्या है और इसे मिटाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। अन्न सेवा केवल पेट भरने का माध्यम नहीं, बल्कि यह विश्वास और सहारा देने का काम करती है। आज इस मंच पर आकर मुझे गर्व महसूस हो रहा है कि समाज में ऐसे लोग हैं जो बिना किसी स्वार्थ के सेवा कर रहे हैं।”
विशिष्ट अतिथि डॉ. हिमानी अग्रवाल ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा, “हम जब किसी को भोजन देते हैं, तो केवल अन्न नहीं बल्कि उम्मीद भी देते हैं। यह पहल औरों के लिए भी प्रेरणा का काम करेगी।”
विशिष्ट अदिति चंद्रा ने भावुक लहजे में कहा, “अन्न सेवा का यह मंच समाज में भाईचारे और करुणा का अद्भुत उदाहरण है। मैं चाहती हूं कि ऐसे कार्यक्रम हर शहर और गांव में हों, ताकि कोई भूखा न सोए।”
Ann Sewa Program की एक खासियत यह है कि यह हर माह के दूसरे रविवार को आयोजित होता है। इस निरंतरता ने लोगों के मन में एक विश्वास पैदा किया है कि जरूरत के समय कोई न कोई उनके साथ खड़ा है। ईरेडियो इंडिया के मार्गदर्शक जय प्रकाश मिश्र ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी लोगों का अभिवादन करते हुए कहा, “सेवा का कोई मौसम नहीं होता, यह हर दिन, हर समय की जानी चाहिए। लेकिन जब समाज मिलकर नियमित रूप से आगे बढ़ता है, तो इसका प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।”
कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ पत्रकार एवं ई रेडियो इंडिया के संपादक त्रिनाथ मिश्र ने अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंटकर सम्मानित किया। उन्होंने कहा, “मीडिया केवल खबरें दिखाने के लिए नहीं, बल्कि समाज में बदलाव लाने के लिए भी जिम्मेदार है। यह कार्यक्रम इसी सोच का हिस्सा है।”
वरिष्ठ उप संपादक आदित्य गुप्ता ने कार्यक्रम की रूपरेखा और संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। साथ ही ओम तिवारी, सुंदर गौतम, राजेंद्र प्रताप चौहान, रिटायर्ड बैंक अधिकारी दिनेश शाडिल्य, संध्या मिश्रा, शिक्षा तिवारी, और कृष्णा पांडे का विशेष सहयोग रहा। इन सभी ने मिलकर कार्यक्रम को सफल बनाने में अपना योगदान दिया।
Ann Sewa Program में पहुंचे लाभार्थियों ने भी अपनी भावनाएं खुलकर साझा कीं। रमेश (काल्पनिक नाम) जो पिछले कई महीनों से आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, ने कहा, “जब घर में चूल्हा नहीं जलता, तो यह कार्यक्रम हमारी उम्मीद बनकर आता है। हमें सिर्फ खाना नहीं मिलता, बल्कि यह अहसास भी होता है कि कोई हमारा अपना है।”
एक महिला जो अपने बच्चों के साथ यहां आई थीं, ने नम आंखों से कहा, “आजकल मदद मांगना भी मुश्किल है, लोग सुनते नहीं। लेकिन यहां बिना कुछ कहे हमें मदद मिल जाती है। भगवान ऐसे आयोजकों की उम्र लंबी करे।”
एक युवा लाभार्थी ने कहा, “अन्न सेवा सिर्फ बुजुर्गों और गरीबों के लिए नहीं, बल्कि उन युवाओं के लिए भी सहारा है जो नौकरी की तलाश में हैं और कई बार दो वक्त का खाना जुटा पाना भी मुश्किल हो जाता है।”
Ann Sewa Program के दौरान जहां एक ओर जरूरतमंद अपने हिस्से का अन्न पाकर खुश नजर आए, वहीं दूसरी ओर स्वयंसेवक भी तृप्ति और संतोष से भर गए। स्थल पर बच्चों की चहचहाहट, बुजुर्गों के आशीर्वाद और आयोजकों की मुस्कान ने माहौल को बेहद सकारात्मक बना दिया।
अन्न वितरण के दौरान किसी भी तरह का भेदभाव नहीं किया गया। लाइन में खड़े सभी लोगों को समान रूप से सम्मान और स्नेह के साथ भोजन दिया गया। यह व्यवस्था इतनी व्यवस्थित थी कि कोई भी व्यक्ति असहज महसूस न करे।
इस कार्यक्रम के संचालन में शामिल प्रत्येक सदस्य का योगदान सराहनीय रहा। एक ओर जहां आयोजन समिति ने व्यवस्था की जिम्मेदारी संभाली, वहीं दूसरी ओर स्वयंसेवकों ने वितरण का कार्य बड़े अनुशासन के साथ किया।
वरिष्ठ उप संपादक आदित्य गुप्ता ने बताया, “इस कार्यक्रम की तैयारी एक हफ्ते पहले से शुरू हो जाती है। हम सुनिश्चित करते हैं कि आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को पर्याप्त और पौष्टिक भोजन मिले।”
आज के समय में जहां महंगाई तेजी से बढ़ रही है, वहीं रोजगार और आर्थिक स्थिरता की चुनौतियां भी बनी हुई हैं। ऐसे में समाज का एक बड़ा वर्ग दो वक्त की रोटी जुटाने में असमर्थ है। भूख न केवल शरीर को कमजोर करती है, बल्कि मानसिक और भावनात्मक रूप से भी तोड़ देती है।
अन्न सेवा जैसे कार्यक्रम इस खालीपन को भरने का प्रयास करते हैं। यह केवल भोजन देने का कार्य नहीं है, बल्कि यह जरूरतमंदों को यह भरोसा देने का काम भी है कि वे अकेले नहीं हैं। इस तरह के प्रयास समाज में आपसी सहयोग और भाईचारे की भावना को मजबूत करते हैं।
अन्न सेवा का उद्देश्य केवल एक दिन की भूख मिटाना नहीं, बल्कि लोगों को प्रेरित करना है कि वे भी आगे आएं और अपनी क्षमता के अनुसार सेवा कार्य में योगदान दें। हर घर से अगर एक व्यक्ति भी आगे बढ़े, तो भूख जैसी समस्या का समाधान संभव है।
पांचवें अन्न सेवा कार्यक्रम की सफलता ने यह साबित कर दिया कि यदि इरादा मजबूत हो तो बदलाव लाना मुश्किल नहीं। मेरठ में यह पहल एक प्रेरणास्रोत बन रही है, और उम्मीद है कि आने वाले समय में यह और भी बड़े पैमाने पर आयोजित होगी।
अंततः, यह कार्यक्रम हमें यह सिखाता है कि भूखे को अन्न, प्यासे को पानी और निराश को उम्मीद देना ही सच्ची सेवा है। और जब समाज के लोग मिलकर यह सेवा करते हैं, तो न केवल भूख मिटती है, बल्कि दिलों में अपनत्व का दीप भी जलता है।
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