योग से रोगप्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने पर आर्य गोष्ठी सम्पन्न

  • योग वास्‍तव में मस्तिष्‍क तथा भावनाओं का विज्ञान है -डॉ रमेश कुमार (लालबहादुर शास्त्री संस्कृत विश्वविद्यालय)
  • योग भारतीय संस्कृति की धरोहर है – राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य

गाज़ियाबाद। केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में “तनाव को दूर करने में योग की उपयोगिता” विषय पर ऑनलाईन गूगल मीट पर गोष्टी का आयोजन किया गया।यह कोरोना काल परिषद का 97वां वेबिनार था।परिषद ने हाथरस की बेटी की बलात्कार व हत्या की घटना की केन्द्र सरकार से न्यायिक जांच करवाने की मांग की गई। डॉ रमेश कुमार योगाचार्य, (असिस्टेंट प्रोफेसर, योग विभाग, लाल बहादुर शास्त्री संस्कृत विश्वविद्यालय) ने कहा कि योग वास्‍तव में मस्तिष्‍क तथा भावनाओं का विज्ञान है और इसलिए तनाव के लक्षणों को दूर करने के लिए यह एक वरदान है।

किसी भी व्‍यक्ति की मानसिक स्थिति और भावनाएं उसकी शारीरिक मुद्रा में प्रतिबिंबित होती हैं।यदि शारीरिक मुद्रा में कोई संशोधन होता है, तो यह व्‍यक्ति के भावनात्‍मक स्थिति में बदलाव ला सकता है। यहीं पर योग की शारीरिक मुद्रा (आसन) तनाव ग्रस्‍त व्‍यक्ति की सहायता कर सकती है।यह प्रभाव क्षणिक हो सकता है परंतु जब एक निश्चित समय तक इसका निरंतर अभ्‍यास किया जाता है,तो यह व्‍यक्ति में परिवर्तन ला सकता है और तनाव से मुक्ति दिला सकता है।इसलिए अपने जीवन को योगमय बनाना चाहिए।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि आधुनिक युग में योग सारे संसार में जिस तीव्र गति से फैल रहा है वह प्रशंसनीय व स्वागत योग्य है।योग का ज्ञान भारतीय संस्कृति की धरोहर है। आज डाॅक्टर और वैज्ञानिक भी योग के माध्यम से स्वस्थ रहने का परामर्श दे रहे हैं। यही कारण है कि भारत ही नहीं,अपितु विश्व भर के लोग यह अनुभव कर रहे हैं कि स्वस्थ जीवन और निरोग रहने के लिए योग सर्वोत्तम माध्यम है। उन्होंने सी बी आई कोर्ट के अयोध्या मामले में 32 आरोपियों को बरी करने के निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त की।

अध्यक्षता करते हुए आचार्य भानुप्रताप वेदालंकार (प्रान्तीय अध्यक्ष,मध्यप्रदेश) ने कहा कि स्वस्थ जीवन शैली, तनाव से मुक्ति एवं शारीरिक व मानसिक दृढ़ता का प्रदाता योग है। हजारों वर्षों से भारत वर्ष की जीवन शैली का अंग रहा योग स्वास्थ्य एवं मानसिक शांति में अत्यंत लाभदायक है। उत्तर प्रदेश के प्रान्तीय महामंत्री प्रवीण आर्य ने कहा कि तनाव ग्रस्‍त व्‍यक्ति आंतरिक भय से पीडित होता है, योग आसन आंतरिक भय जैसे किसी वस्‍तु,व्‍यक्ति के खोने का डर,असफलता का भय और शक्तिहीन होने के डर से हमें मुक्ति दिलाते हैं।उन्होंने आगे कहा कि ई- ब्लॉक, नेहरू नगर स्थित जानकी वाटिका में व ऑनलाइन प्रतिदिन नि:शुल्क योग कक्षा में प्रातः 5-45 से 7-15 बजे तक भाग लेकर स्वास्थ्य लाभ कर सकते हैं।

योगाचार्य सौरभ गुप्ता ने कहा कि योग शरीर को चुस्त,स्वस्थ व लचीला रखने का सबसे आसान माध्यम है। शारीरिक,मानसिक व आध्यात्मिक संस्कृति के रूप में योग का ज्ञान हमे ऋषि मुनियों से मिलता रहा है। आर्य नेत्री सुषमा बुद्धिराजा, प्रतिभा सपरा,विमला आहूजा, संध्या पांडेय, देवेन्द्र गुप्ता, रविन्द्र गुप्ता, ईश्वर आर्या, वीना वोहरा आदि ने गीतों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। मुख्य रूप से आचार्य महेन्द्र भाई, आनंदप्रकाश आर्य, प्रकाशवीर शास्त्री, यज्ञवीर चौहान, सुरेन्द्र शास्त्री, करुणा चांदना, देवेन्द्र भगत, कैप्टन अशोक गुलाटी, नरेंद्र आर्य सुमन, दर्शना मेहता आदि उपस्थित थे।




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