ई रेडियो इंडिया
कहते हैं कि मरने वाले को अपने मरने का पता पहले ही चल जाता है… ठीक उसी तरह माफिया अतीक को भी अपने अंजाम का अंदाजा पहले ही लग गया था। उसे अच्छी तरह से पता था कि उसे भी एक दिन उसी पोस्टमार्टम हाउस आना है जहां उस पर अपने विरोधियों को पहुंचाने के आरोप लगते रहते थे। वो जानता था कि उसका अंत सामान्य तो नहीं होगा और वह अक्सर यह बातें अपने लोगों के बीच मजाकिया अंदाज में कहता भी रहता था।
आपको माफिया अतीक अहमद से जुड़ा एक वाकया बताते है जो कि स्वरूपरानी नेहरू अस्पताल परिसर के पास बने पोस्टमार्टम हाउस का है। करीब 21 साल पहले वह अपने किसी परिचित के पोस्टमार्टम के दौरान वहां पहुंचा था। काफिले के साथ पोस्टमार्टम हाउस के गेट पर उतरते ही अतीक ने शवों का चीर-फाड़ करने वाले दो कर्मियों तक अपना संदेश भेजकर उन्हें गेट पर ही बुलाया और उनसे बातचीत के दौरान ही उन्हे 500-500 की नोट निकालकर उनकी मुट्ठी में थमाया। और फिर मजाकिया अंदाज में बोला सुनो मुन्ना… जब हम इहां आउब त हमार खोपड़ी जरा आराम से खोलिहौ। छीनी-हथौड़ी चलावे में थोड़ा रहम करिहौ।
अतीक की बात सुनकर दोनो कर्मी दंग रह गये… ये देख अतीक अहमद हंस पड़ा और उसे देख वहां खड़े सभी लोग हंसने लगे। लेकिन कुदरत का फैसला देखिए कि अतीक के सिर में ही गोलियां मारी गईं और उसका काफी हिस्सा क्षत विक्षत हो गया।
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