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Bihar Chunav 2020: रावण के खौफ से माया डरीं, उपेंद्र ने बिहार में पप्पू यादव से की ‘ठगी’

  • संवाददाता || ई-रेडियो इंडिया

Bihar Chunav 2020: बिहार में चुनाव है, सबसे जुझारू और कर्मठी बताने के चक्कर में पप्पू यादव अकेले रह गए हैं। उन्हें गठबंधन में जगह नहीं मिली और जिन से उम्मीद थी उन्होंने बसपा का दामन थाम लिया।

दलित वोट बैंक को की लड़ाई में बिहार विधान सभा चुनाव (Bihar Chunav 2020) में अब दिलचस्प मोड़ देखने को मिल सकता है। पिछले दिनों चर्चा थी कि उपेंद्र कुशवाहा और पप्पू यादव एक साथ मैदान में ताल ठोक सकते हैं लेकिन यह चर्चा कोरी कल्पना ही रह गई क्योंकि उपेंद्र कुशवाहा ने मायावती का दामन थाम लिया।

उधर पप्पू यादव और चंद्रशेखर रावण की पार्टी आपस में गुटर-गू करती रही जिससे बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती नाराज हो गई। इस तरह से उपेंद्र कुशवाहा और पप्पू यादव की जुगलबंदी एक मंच पर ना आ सकी।

दलितों की मसीहा का Bihar Chunav 2020 में कैसा गणित

बसपा प्रमुख मायावती बीते दो दशकों से उत्तर प्रदेश में दलित वोट बैंक की मसीहा बनी हुई है, मायावती के आज आने के बाद से सोशल इंजीनियरिंग में जातिवाद के बीच लगातार कैसे जा रहे हैं।

लेकिन पिछले कुछ दिनों से चंद्रशेखर रावण के दलित आइकन के रूप में सामने आने के बाद बसपा प्रमुख मायावती के पसीने छूट रहे हैं। तिलक, तराजू और तलवार से दूरियां बरकरार रखने वाली मायावती को चंद्रशेखर रावण की राजनीतिक मैदान में ताल ठोकने के बाद एक बार फिर से इन्हीं तीनों की याद आ रही है।

चंद्रशेखर की आहट से ही डर जाती हैं मायावती

मायावती अपने  कार्यकाल के चरम युग में तिलक यानि ब्राह्मण, तराजू या  बनिया और तलवार यानी क्षत्रियों से उच्च कोटि की घृणा करती थीं। लेकिन वक्त ने सब को सबक सिखाया है आज वही मायावती अपनी विरासत चंद्रशेखर आजाद में ट्रांसफर होते देख तिलक तराजू और तलवार के आंगन में हाथ जोड़े खड़ी हैं।

बिहार में रालोसपा और जाप दोनों पार्टियों की अनबन होने के बाद दलित गत राजनीति बड़ी पेंचीदगी से भर गई है। 

Bihar Chunav 2020: रावण के खौफ से माया डरीं, उपेंद्र ने बिहार में पप्पू यादव से की 'ठगी'
Bihar Chunav 2020: दिलचस्प मोड़ पर पहुंचता हुआ दिखाई दे रहा है।

दलिता की आबादी 1.65 करोड़ से अधिक है

वर्ष 2011 की जनसंख्या को आधार मानें तो राज्य में अनुसूचित जाति के वोटरों की संख्या एक करोड़ 65 लाख से अधिक है। हालांकि अब इस संख्या में काफी इजाफा हो चुका है। बिहार में 23 अनुसूचित जातियां हैं। इनकी आबादी तकरीबन 16 प्रतिशत है।

बीते दो-तीन दशक में जातीय राजनीति करने वाले दलों की संख्या भी बिहार में काफी बढ़ी है। जीत-हार के गणित में दलित और महादलित में बंटे इन मतदाताओं की भूमिका Bihar Chunav 2020 में खासी महत्वपूर्ण है।




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