Brahmacharini Mata Ki Aarti || Maa Brahmacharini Mantra || Maa Brahmacharini Puja Vidhi

Brahmacharini Mata Ki Aarti || Maa Brahmacharini Mantra || Maa Brahmacharini Puja Vidhi

Brahmacharini Mata Ki Aarti: नवरात्रि का पवित्र पर्व चल रहा है, शारदीय नवरात्रि में 9 दिनों तक मां के अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है। नवरात्रि के प्रथम दिन माता शैलपुत्री की पूजा की जाती है और दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी माता की पूजा की जाती है। आज हम आपको बताने वाले हैं कि मां ब्रह्मचारिणी की पूजा व आरती करते समय हमें किन मंत्रों का उच्चारण करना चाहिए और किन बातों का ख्याल रखना चाहिए।

सबसे पहले आप यह जान लीजिए कि ब्रह्मचारिणी का अर्थ होता है क्या?

साथियों ब्रह्म का अर्थ तपस्या और चारिणी यानी आचरण करने वाली अर्थात तब का आचरण करने वाली। मां ब्रह्मचारिणी मां दुर्गा के दूसरे स्वरूप का प्रतीक हैं बाएं हाथ में कमंडल और दाहिने हाथ में जप करने के लिए माला लिए हुए होती हैं।

क्या है Brahmacharini Mata Ki Aarti करने का लाभ?

भक्तों में जप, तप और सिद्धि को देने वाली मां ब्रह्मचारिणी की उपासना का अनंतपुरा महत्व है। जो भक्त मां ब्रह्मचारिणी की सच्चे मन भाव से पूजा करते हैं वह अपने पति से कभी अधिक नहीं होते और अपने मंजिल तक पहुंचकर ही रहते हैं।

इस दिन ऐसी कन्याओं का पूजन किया जाता है कि जिनका विवाह तय हो गया है लेकिन अभी शादी नहीं हुई है। इन्हें अपने घर बुलाकर पूजन के पश्चात भोजन कराकर वस्त्र, पात्र आदि भेंट किए जाते हैं। नवरात्रि के दूसरे दिन मां के भक्तों का मन ‘स्वाधिष्ठान’ चक्र में शिथिल होता है।

मां ब्रह्मचारिणी ने कैसे की तपस्या?

कहते हैं कि मां ब्रह्मचारिणी ने नारद मुनि की सलाह पर कठोर तपस्या की थी, क्योंकि मां ब्रह्मचारिणी का जन्म राजा हिमालय के घर हुआ था इसलिए कठोर तप के कारण उनका नाम ब्रह्मचारी पड़ गया। उन्होंने कठोर तप कर भगवान शिव को पति के रूप में पाने की इच्छा रखी।

भगवान शिव की आराधना के दौरान उन्होंने 1000 वर्ष तक केवल फल-फूल खाए तथा 100 वर्ष तक शाक खाकर जीवित रहीं। कठोर तप से उनका शरीर क्षीण हो गया।

उनक तप देखकर सभी देवता, ऋषि—मुनि अत्यंत प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि आपके जैसा तक कोई नहीं कर सकता है। भगवान शिव आपको पति स्वरूप में प्राप्त होंगे। आपकी मनोकामना अवश्य पूर्ण होगा।

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नवरात्रि के द्वितीय दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर साधक को अपने मन वचन और शरीर की शुद्धि करने से चाहिए। इसके बाद मां की भक्ति में ध्यान लगा कर फूल, अक्षत, रोली, चंदन आदि अर्पण करें। कहा जाता है कि मां पूजा करने वाले भक्त जीवन में सदा शांत चित्त और प्रसन्न रहते हैं। पूजा के दौरान दूध, दही, घृत, मधु व शर्करा से स्नान कराएं और इसके देवी को पिस्ते से बनी मिठाई का भोग लगाएं। इसके बाद पान, सुपारी, लौंग अर्पित करें। 

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Maa Brahmacharini Mantra || मां ब्रह्मचारिणी के मंत्र

1. ब्रह्मचारयितुम शीलम यस्या सा ब्रह्मचारिणी.

सच्चीदानन्द सुशीला च विश्वरूपा नमोस्तुते..

2. ओम देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥

3.या देवी सर्वभेतेषु मां ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता.

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः..

दधाना कर मद्माभ्याम अक्षमाला कमण्डलू. 

देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा।।

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