CMO Bijnor का आदेश हुआ बेदम, PHC Najibabad में अराजकता

CMO Bijnor का आदेश हुआ बेदम, PHC Najibabad में अराजकता

  • बिजनौर || ई-रेडियो इंडिया

CMO Bijnor का आदेश हुआ बेदम, PHC Najibabad में अराजकता: प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र में संविदा कर्मी महिला स्टाफ नर्स द्वारा सरकारी आवास को तीन दिन के भीतर खाली कराए जाने के CMO Bijnor के आदेश हवाई साबित हो रहे है। एक माह बीत जाने के बाद भी अधिकारी आवास तो खाली नहीं करा पाये हां इतना जरूर हुआ कि आवास खाली कराने की मांग को लेकर मोर्चा खोलने वाली एएनएम का तबादला कर दिया गया। इससे पता चलता है कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सरकार के दिशा निर्देशों का कितना पालन कर रहें है। जबकि प्रदेश की योगी सरकार अधिकारियों को आये दिन दिशा निर्देश देकर पीड़ितों को न्याय दिलाने तथा शिकायतो को गंभीरता से लेने की हिदायत दे रही है।     

  • आवास खाली करने को लेकर हवा में गुब्बारा बनकर उड़ते सीएमओ के आदेश
  • आवाज तो खाली नहीं हुआ, इंसाफ मांगने वालों का ही ट्रांसफर हो गया

उल्लेखनीय है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र नजीबाबाद (PHC Najibabad) में सरकारी आवास पर संविदाकर्मी महिला स्टाफ नर्स पूर्णिमा के द्वारा चार साल से कब्जा कर रखा था जबकि उक्त आवास का किराया एएनएम के वेतन से कट रहा था। उक्त मामले को लेकर एएनएम ने पहले एसडीएम को ज्ञापन देकर आवास खाली कराए जाने की मांग की थी। बाद में  एएनएम ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए सरकार के टीकाकरण समेत विभिन्न कार्यक्रमों का बहिष्कार कर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर धरना शुरू कर दिया था।एएनएम द्वारा सरकार के कार्यक्रम का बहिष्कार किये जाने की सूचना से स्वास्थ्य विभाग में हड़कम्प मच गया था।

CMO Bijnor ने धरना स्थल पर पहुंचकर एएनएम से वार्ता करते हुए उनकी समस्याओं का समाधान कराने तथा संविदाकर्मी द्वारा सरकारी आवास को तीन दिन के भीतर कब्जामुक्त कराए जाने तथा पीडब्लूडी मानक के हिसाब से कब्जाधारी महिला स्टाफ नर्स से किराया वसूल करने की बात कही थी। इस दौरान मौजूद आशा और एएनएम ने नर्स स्टाफ पूर्णिमा पर डिलीवरी के नाम पर रूपये लेने तथा गर्भवती महिलाओं को अपने प्राईवेट स्थान पर ले जाकर डिलीवरी करने का भी आरोप लगाया था।

CMO Bijnor विजय यादव ने दिये थे आवास खाली कराने के आदेश

उसके बाद CMO Bijnor विजय यादव ने जनपद के सभी चिकित्सा प्रभारियों को अवैध रूप से कब्जा किये गये सरकारी आवासों को खाली कराए जाने के लिखित आदेश दिये थे। लेकिन एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी स्थानीय अधिकारी संविदाकर्मी से सरकारी आवास खाली नहीं करा पाये है। इतना जरूर हुआ के अपने उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने वाली एएनएम पुष्पा वर्मा का नहटौर व सर्वेश रानी का कोतवाली देहात स्वास्थ्य केन्द्र पर तबादला कर दिया गया। हांलाकि तबादला पत्र में सीएमओं द्वारा डयूटी के प्रति उदासीन रवैय्या अपनाने तथा नोटिस का जवाब ना देकर कर्मचारी आचरण नियमावली 1956 का सीधा उल्लंघन माना गया है।

जबकि दोनो एएनएम का कहना है कि नोटिस प्राप्त होने के बाद ही उन्होने प्राथमिक चिकित्सा (PHC Najibabad) प्रभारी डा. फैज़ हैदर को जवाब रिसीव करा दिया था। लेकिन इसके बाद भी उनका तबादला नोटिस का जवाब ना देने की बात कहते हुए किया गया। एएनएम का कहना है कि वे अपनी डयूटी को पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ करती आ रही है फिर भी डयूटी में उदासीनता बरतने का आरोप लगाकर उनका मानसिक शोषण किया जा रहा है।

जबकि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समय समय पर अधिकारियों की बैठक लेकर उन्हे शिकायतो के प्रति गंभीर रहने तथा महिलाओ की शिकायतों को गंभीरता से लेकर उन्हें न्याय दिलाने की बात कहते नजर आ रहे है। लेकिन अधिकारी मुख्यमंत्री के दिशा निर्देशों को अगूंठा दिखाकर अपना उल्लू सीधा करने में लगे हुए है।

CMO Bijnor बोले, चिकित्सा प्रभारियों के खिलाफ होगी कार्रवाई

CMO Bijnor विजय यादव ने कहा कि जनपद में सभी चिकित्सा प्रभारियों को अवैध कब्जा किये गये आवासों को खाली कराने के निर्देश दिये गये थे। लेकिन नजीबाबाद (PHC Najibabad) में अभी तक संविदाकर्मी महिला स्टाफ नर्स से सरकारी आवास खाली नहीं कराया जाना गंभीर विषय है, इस सम्बंध में जानकारी करेगें। साथ ही निर्देशों का पालन ना कराने वाले चिकित्सा प्रभारियों के खिलाफ कार्रवाई की ही जाएगी और अवैध कब्जाधारियों से पीडब्लूडी मानक के हिसाब से किराया भी वसूला जाएगा।

PHC Najibabad में प्रभारी की गलती महिलाओं पर पड़ी भारी

इंसाफ मांगने वाली दो महिला स्वास्थ्य कर्मचारियों को मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा 2 दिन में काम के प्रति उदासीनता बरतने पर स्पष्टीकरण देने का आदेश जारी किया गया था । महिला स्वास्थ्य कर्मचारी सर्वेश रानी एवं पुष्पा वर्मा का कहना है कि नोटिस के अगले दिन ही प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉक्टर  हैदर को स्पष्टीकरण का जवाब सौंप दिया गया था सूत्रों की माने तो स्पष्टीकरण को मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय में जमा नहीं कराया गया था ।

बताया जा रहा है कि स्पष्टीकरण छुपाने वाले को बख्शीश देते हुए कमजोर कड़ी महिला स्वास्थ्य कर्मचारियों पर गाज गिराते हुए ट्रांसफर कर दिया गया । जिससे साबित होता है कि स्वास्थ्य विभाग में भ्रष्टाचार को उजागर करना कोई मामूली बात नहीं है । अब महिला कर्मचारी इस मामले को लेकर फिर से आंदोलन चलाने की तैयारी कर रही है ।




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