कुल्हड़ में चाय पीने से होते हैं कई फायदे, स्वाद के साथ शरीर को रखता है स्वस्थ

नई दिल्ली। कई लोगों की दिन की शुरुआत चाय के बिना नहीं होती है। सुबह-सुबह चाय पीने का अपना ही एक मजा है। ज्यादातर लोग ग्लास या फिर कप में चाय पीना पंसद करते हैं, लेकिन पहले लोग इसे मिट्टी के कप यानी कुल्हड़ में पीना पसंद करते थे। क्योंकि यह न सिर्फ आपके चाय की स्वाद को बढ़ा देता है, बल्कि मिट्टी की सौंधी-सौंधी खुशबु से आपका मन बार-बार चाय पीने का करेगा। उत्तर भारत में आज भी कई लोग कुल्हड़ में चाय पीना पसंद करते हैं। कुछ लोग चाय कुल्हड़ में इसलिए पीना पसंद करते हैं क्योंकि यह सेहत के लिए काफी फायदेमंद हैं।

 जिसे जानने के बाद आप रोजाना कुल्हड़ में चाय पीना पसंद करेंगी। वहीं कोविड-19 के दौर में ज्यादातर लोग चाय पीने के लिए डिस्पोजल कप का इस्तेमाल कर रहे हैं। जो कि सही नहीं है, इससे वायरस के संपर्क में भी आने का खतरा रहता है। ऐसे में अगर आप चाहे तो डिस्पोजल, स्टील या कांच के ग्लास में चाय पीने के बजाय कुल्हड़ में पी सकती हैं। कई ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में आज भी चीय पीने के लिए कुल्हड़ का उपयोग किया जाता है। क्योंकि इसके एक नहीं बल्कि कई फायदे हैं।

प्लास्टिक से बने डिस्पोजल या फिर कांच के ग्लास में चाय पीना स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक है और यह पर्यावरण के लिए भी सही नहीं है। मिट्टी से बने कुल्हड़ इको फ्रेंडली होते हैं जो फेंकने के बाद मिट्टी में परिवर्तित हो जाते हैं। माना जाता है कि कुल्हड़ में चाय पीने से पाचनवतंत्र बिगड़ता नहीं है और इससे आपके शरीर की हड्डियां मजबूत होती हैं। इसके अलावा मिट्टी के बर्चतनों में क्षरीय स्वभाव होता है जिसकी वजह से शरीर के एसिडिक स्वभाव में कमी आती है।

 क्योंकि इसमें अधिक मात्रा में कैल्शियम होता है और यह शरीर की एसिडिक को कम करने में मदद करता है। हालांकि कुल्हड़ में चाय पीने से मिट्टी की सौंधी खुशबू आती है जिसकी वजह से इसका स्वाद काफी अच्छा लगता है। डिस्पोजल कप या फिर प्लास्टिक कप में चाय पीने से बचें। यह सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है। ज्यादातर डिस्पोजल पॉली-स्टीरीन से बने होते हैं। गरम-गरम चाय डालने से कुछ तत्व चाय के साथ पेट में भी चले जाते हैं। इससे कई गंभीर बीमारी होने की संभावना होती है। इसके अलावा पेट से जुड़ी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। पेट खराब होने के साथ -साथ इसका असर पांचन तंत्र पर भी पड़ सकता है। इसमें पाया जाने वाले एसिड चाय के साथ पेट में चले जाते हैं और ये आंतों में जमा हो जाते हैं जो पाचन तंत्र को प्रभावित करते हैं।




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