निर्वाचन आयोग के क्षेत्रीय अधिकारियों ने रविवार को बताया कि बिहार में मतदान सूची के जारी गहन पुनरीक्षण अभियान यानि एसआईंआर के तहत घर-घर जाकर जांच की और इस दौरान बड़ी संख्या में नेपाल, बांग्लादेश और म्यांमार के लोग मिले हैं। अधिकारियों ने यह भी बताया कि उनके पास आधार कार्ड, पैन कार्ड और राशन कार्ड भी मिला है। किन्तु दुर्भाग्य से उन्होंने अपने सारे दस्तावेज फर्जी तरीके से असली बनवाए हुए हैं। इस तरह चुनाव आयोग के अधिकारियों ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।
सवाल यह है कि क्या ये विदेशी नागरिक आज मात्र बिहार में ही बसे हैं अथवा पूरे देश में? सीधा जवाब है कि हर राज्य में अवैध घुसपैठ हुईं है और इन घुसपैठियों को आधार कार्ड, चुनाव आयोग का वोटर आईं कार्ड, पैन कार्ड, मोटर वाहन कार्ड सब कुछ असली बनवाने वाले भी मिल गए इसलिए फर्जी लोगों के पास असली दस्तावेज उपलब्ध हो सके। दु:खद बात तो यह है कि जहां पर ये घुसपैठिए रहते हैं, वहां के लोगों को इस बात की जानकारी होती है किन्तु वह भी मौन धारण करना ही उचित समझते हैं।
दरअसल आज जो घुसपैठिए पकड़े जा रहे हैं, उनके पास वैध दस्तावेज एक-दो दिन में नहीं बने हैं। इसके लिए उन्हें तमाम अधिकारियों को रिश्वत देनी पड़ी है और तमाम तरह से संबंधित अधिकारियों को सहमत करने के लिए तरकीब अपनानी पड़ती है। लेकिन यह भी सही है कि वुछ पार्टियां हैं जो इस तरह के गारंटेड मतदाताओं को उपकृत करके सदा के लिए उन्हें अपना मतदाता बनाना चाहती हैं। इसलिए सुव्यवस्थित तरीके से इस तरह के फर्जीवाड़े को संरक्षण का जुगाड़ किया जाता है।
कहने का तात्पर्य यह है कि जिस तरह बिहार में ही एसआईंआर की जरूरत महसूस की गईं है, ठीक उसी तरह पूरे देश में इसे तत्काल लागू करना चाहिए ताकि अवैध रूप से छिपे इन विदेशी मूल के घुसपैठियों को आसानी से पहचाना जा सके।
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