हिंदू सनातन धर्म की पुस्तकों का सबसे बड़ा पब्लिकेशन गीता प्रेस अब बंद हाेने वाला है… आर्थिक कमी के चलते इसचचके प्रकाशन पर बुरा असर पड़ रहा है। इन खबरों को शायद आपने भी सुनी होगी लेकिन इसके पीछे की असली सच्चाई क्या है।
गीता प्रेस के उत्पाद प्रबंधक लालमणि तिवारी ने बताया कि वर्तमान में गीता प्रेस का काम सुचारु रुप से चल रहा है। 15 भाषाओं में लगभग 1800 पुस्तकें गीता प्रेस से लगातार प्रकाशित की जा रही हैं। पुस्तकों की उपलब्धता एवं गुणवत्ता बढ़ाने के लिए विदेशों से छपाई एवं बाइंडिंग की मशीन मंगाई गई है।
उन्होंने कहा कि इस अफवाह वाले मैसेज को गीता प्रेस का कोई भी शुभचिंतक आगे फारवर्ड न करें। जिससे गीता प्रेस को बदनाम करने वालों की कोशिशें नाकाम हो जाए।
वेतन को लेकर हुए असंतोष के चलते कर्मचारियों ने 2015 में काम बंद कर दिया। विवाद आगे न बढ़े, इसके लिए प्रबंधन ने प्रेस बंद कर दिया था। हालांकि दस दिनों में कर्मचारियों एवं प्रबंधन समझौता हो जाने के बाद प्रेस का काम शुरू हो गया। उसी दौरान मेरठ, दिल्ली, कोलकाता में कुछ लोगों ने गीता प्रेस के बंद होने का संदेश सोशल मीडिया पर प्रसारित कर चंदा मांगना शुरू कर दिया।
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