Hathkargha Divas Meerut बुनकरों की कला और परंपरा का अद्भुत संगम
Hathkargha Divas Meerut: बुनकर सेवा केंद्र, मेरठ परिसर में 11वें राष्ट्रीय Hathkargha Divas Meerut के उपलक्ष्य में आयोजित “हैंडलूम एक्सपो एवं हथकरघा वस्त्र भाषा महोत्सव” का समापन 22 अगस्त 2025 को बड़े धूमधाम से हुआ। यह आयोजन 18 से 22 अगस्त तक चला, जिसमें मेरठ और आसपास के जिलों के बुनकरों ने अपने पारंपरिक एवं आधुनिक हथकरघा उत्पादों का शानदार प्रदर्शन किया।
समापन समारोह की मुख्य अतिथि मुख्य विकास अधिकारी सुश्री नुपुर गोयल रहीं। उनके साथ मंच पर श्री तपन शर्मा (उपनिदेशक, बुनकर सेवा केंद्र, मेरठ), डॉ. अल्का तिवारी (समन्वयक, ललित कला भवन, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ) और श्री सुरेन्द्र सिंह (सहायक निदेशक, बुनकर सेवा केंद्र) विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सभी अतिथियों का स्वागत पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र भेंट कर किया गया।
सुश्री गोयल ने कहा, “Hathkargha Divas Meerut बुनकरों के लिए केवल एक आयोजन नहीं बल्कि उनकी मेहनत और प्रतिभा को सम्मान देने का अवसर है। यह दिवस हमें याद दिलाता है कि हथकरघा न केवल परंपरा है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की रीढ़ भी है।”
एक्सपो के दौरान छात्रों में विशेष उत्साह देखने को मिला। के.एल. इंटरनेशनल स्कूल द्वारा डूडल मेकिंग, क्विज़ और ब्लॉक प्रिंटिंग जैसी प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। विजेताओं को मुख्य अतिथि द्वारा प्रमाणपत्र प्रदान किए गए। इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य युवाओं को भारतीय हथकरघा परंपरा से जोड़ना और उनमें सृजनात्मकता का विकास करना था।
छात्र-छात्राओं ने पारंपरिक डिजाइनों को अपने आधुनिक विचारों से जोड़कर प्रस्तुत किया, जिसे देखकर दर्शकों ने सराहना की। इससे स्पष्ट हुआ कि नई पीढ़ी भी Hathkargha Divas Meerut के महत्व को समझ रही है और हथकरघा कला को अपनाने के लिए प्रेरित हो रही है।
पांच दिवसीय एक्सपो में खादी, रेशम, सूती, ऊनी, डोकरा और ब्लॉक प्रिंटेड वस्त्रों की शानदार प्रदर्शनी हुई। इन स्टॉलों पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे और खरीदारी की। विशेष रूप से महिलाओं द्वारा बनाए गए दुपट्टे, साड़ियां, बेडशीट और कुशन कवर लोगों को बेहद पसंद आए।
बुनकरों ने अपने उत्पादों की बिक्री के साथ-साथ लोगों को उनके निर्माण की पूरी प्रक्रिया भी समझाई। इस अवसर पर कई ग्राहकों ने कहा कि हथकरघा उत्पाद सिर्फ वस्त्र नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति का जीवंत प्रतीक हैं।
समापन अवसर पर विभिन्न बुनकर क्लस्टरों को उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुति और योगदान के लिए स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि ने कहा कि Hathkargha Divas Meerut बुनकरों के गौरव और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है। उन्होंने इसे ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को मजबूत करने वाला कदम बताया।
उपनिदेशक तपन शर्मा ने बताया कि बुनकर सेवा केंद्र, मेरठ लगातार ऐसे आयोजनों के माध्यम से बुनकरों को बाज़ार उपलब्ध कराने और तकनीकी प्रशिक्षण देने का काम करता है। डॉ. अल्का तिवारी ने हथकरघा को कला और परंपरा का अद्भुत संगम बताते हुए छात्रों से आग्रह किया कि वे स्थानीय उत्पादों को प्राथमिकता दें।
सहायक निदेशक सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि इस तरह के मेले बुनकरों को आत्मनिर्भर बनाने और उनके उत्पादों को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में अहम भूमिका निभाते हैं।
इस मेले में शामिल बुनकरों ने इसे अपने जीवन का सुनहरा अवसर बताया। एक बुनकर ने कहा, “पहले हमें बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था, लेकिन अब Hathkargha Divas Meerut जैसे आयोजनों से स्थानीय स्तर पर ही ग्राहकों तक पहुंच संभव हो रही है।”
महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्याओं ने बताया कि ऐसे एक्सपो से उन्हें आर्थिक आत्मनिर्भरता मिली है। उन्होंने कहा कि इस बार की बिक्री ने उनके आत्मविश्वास को और बढ़ाया है।
हथकरघा केवल कपड़े बनाने की तकनीक नहीं बल्कि भारतीय संस्कृति की आत्मा है। Hathkargha Divas Meerut इस बात का प्रमाण है कि जब बुनकरों को मंच मिलता है तो उनकी कला संरक्षित होती है और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचती है। आर्थिक दृष्टि से भी यह आयोजन बुनकरों की आय बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में सहायक है।
पांच दिवसीय भव्य आयोजन ने मेरठ को नई पहचान दी। इसने साबित किया कि पारंपरिक कला आज भी समाज में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। समापन समारोह ने यह संदेश दिया कि हथकरघा उद्योग अतीत की धरोहर होने के साथ-साथ वर्तमान और भविष्य की भी आवश्यकता है।
Hathkargha Divas Meerut निश्चित रूप से बुनकरों को प्रोत्साहन देने, उनकी कला को राष्ट्रीय मंच तक ले जाने और भारतीय परंपरा को जीवंत बनाए रखने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित हुआ है।
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