आईआईअी बाबा क्यों बनें हैं अलादीन का चिराग?
दोस्तों नमस्कार…. IIT बाबा देश के टीवी चैनलों के लिये एक अलादीन का चिराग बन गये हें… उनसे ये चैनल के मालिक व पत्रकार न जाने किस टीआरपी की उम्मीद करते हैं…इस देश में लाखों बाबा हैं… करोड़ों भक्त हैं… मगर विद्वेश की भावना से कोई किसी को पीटने पर उतारू नहीं हो जाता… अब ये न्यूज चैनल वाले वरिष्ठ पत्रकारों के नीतिगत फैसलों से यह ज्ञात हुआ है कि आने वाले समय में इनके स्टूडियो में जाना खतरे से खाली नहीं है…
हाल ही में न्यूज नेशन के स्टूडियो में पहुंचे IIT बाबा को दर्जनों पंडा व पुजारी नुमा लोगों ने घेर लिया… और अभद्र भाषा के साथ उनकी औकात दिखाने लगे…. मगर थोड़ी देर तक चले इस ड्रामा के बाद यह स्पष्ट हो गया कि असल में न्यूज चैनल व स्टूडियों में अचानक प्रकट हुये पंडा–पुजारियों की ही औकात जनता के सामने आ गई…
कोई IIT बाबा को पाकिस्तान एजेंट होने की बात कह रहा है तो काई उन्हें सनातन विरोधी बात रहा है…
हमें इन तमाम सवालों के जवाब खोजने चाहिये… जो व्यक्ति अपने जीवन को अध्यात्म के लिये समर्पित कर अपनी अच्छी जिंदगी को छोड़कर जमीनी स्तर पर आकर लोगों को जागृत कर रहा है उसका विरोध ऐसे लोग क्यों कर रहे हैं जो अपनी खराब जिंदगी को अध्यात्मिकता को अध्यात्मिकता के सहारे अच्छा बना रहे हैं…टीआरपी के नाम पर टीवी चैनल्स अपनी इज्जत की परवाह किये बगैर लगातार साजिशों के सहारे आगे बढ़ने की जद्दोजहद कर रहे हैं।
जितने भी सन्यासी हैं सब यही कहते हैं कि सनातन में समर्पित हो जायें… और जब एक युवा समर्पित भाव से सेवा को तत्पर है तो आप विरोध करने पर क्यों उतर आये? सिर्फ इसलिये कि वह आपके बने–बनाये खांचे ये अलग होकर आपसे सवाल पूछ लेता है और आपके पास लंबा अनुभव होने के बाद भी जवाब के नाम पर वहीं रटी–रटाई गीता–वेद व पुराण की कुछ चीजें होती हैं… आपके पास अपना अनुभव तो कुछ है नहीं और दूसरा जो कुछ अपने अनुभव से बता रहा है उसे सुनने की सहनशक्ति भी आपमें नहीं है…
सनातन में ज्ञानमार्ग और भक्तिमार्ग का बड़ा जिक्र होता है… भक्ति मार्ग में ज्ञान की अवधारणा का कोई महत्व नहीं होता जबकि ज्ञानमार्ग में किताबी अक्षरों का रटना, वेद, शास्त्र पुराण आदि अनेक चीजों का अध्ययन कर लेना शामिल है…अक्सर लोग कुछ श्लोक पढ़ेंगे और पूछेंगे कि अमुक उद्धरण कहां से आया बताओ… प्रभु इस सवाल का भक्ति मार्ग वाले साधकों से क्या लेना देना…
सांसारिक ज्ञान की बात करें तो IIT बाबा की मार्कशीट देखनी अति आवश्यक है… उनके किसी भी मार्कशीट में 90 फीसद से कम अंक नहीं अये हैं। और इनपर सवाल कौन उठा रहा है जो हाईस्कूल में सेकंड और इंटर में थर्ड डिवीजन अंक लाकर अपने सांसारिक जीवन में फ्लाप साबित होकर बाबा बन गये हैं…
अक्सर एक सवाल उठता है कि IIT बाबा यानी अभय सिंह नसेड़ी है और उसका मानसिक संतुलन ठीक नहीं है… यदि इस आधार को मानें तो … देश के नागा सन्यासी और भोले के तथाकथित भक्तों में यह परम्परा बहुत पहले से चली आ रही है… नागा सन्यासी… अघोरी और न जाने किने महाकाली जी के भक्तों में यह प्रचलन है… वो इस विरोध का हिस्सा क्यों नहीं हैं?
एक सवाल यह है कि पाकस्तान का मैच जीमने की भविष्यवाणी गलत हो गई… तो भाई देश में लाखों ज्योतिष भविष्यवाणी करते हैं… लेकिन 99 फीसदी गलत होता हैं फिर भी आपको भविष्यवक्ताओं पर भरोसा क्यों बना रहता है।
बहरहाल न्यूज नेशन के इस दुश्चरित्र और कुचक्र का शिकार देश का एक युवा… शिक्षित व अध्यात्मिक व्यक्ति हो गया.. इससे दु:खद और कुछ भी नहीं हो सकता… पूरे ड्रामेबाजी के दौरान जो संत के वेश में थे वो तो उग्र हो गये और जिसे असंत व अज्ञानी बता रहे थे वो व्यक्ति यानी अभय सिंह बिल्कुल शांत रहे… तो सवाल आपके लिये छोड़कर विदा लेता हूं कि आखिर असली संत कौन?
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शुक्रिया नमस्कार…
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