ISCCM annual CME Meerut: आधुनिक चिकित्सा तकनीकों पर मंथन, विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव
ISCCM annual CME Meerut रविवार, 7 सितम्बर 2025 को होटल हार्मोनी इन, मेरठ में आयोजित किया गया। इंडियन सोसाइटी ऑफ क्रिटिकल केयर मेडिसिन (ISCCM) की मेरठ शाखा द्वारा आयोजित इस वार्षिक कार्यक्रम ने चिकित्सा जगत में नई ऊर्जा और नई दृष्टि प्रदान की। सीएमई (Continuing Medical Education) का मुख्य उद्देश्य चिकित्सकों को नवीनतम शोध, तकनीकों और उपचार पद्धतियों से अवगत कराना और मरीजों की देखभाल को और अधिक प्रभावी बनाना रहा।
आयोजन समिति की कमान डॉ. संदीप जैन (आयोजन अध्यक्ष) और डॉ. वी.एन. त्यागी (आयोजन सचिव) ने संभाली। वैज्ञानिक सत्रों का संचालन डॉ. अमित अग्रवाल (वैज्ञानिक अध्यक्ष) एवं डॉ. अपार अग्रवाल (वैज्ञानिक सचिव) ने किया। पूरे दिन चले कार्यक्रम में देश के नामी चिकित्सकों ने विशेषज्ञ व्याख्यान दिए और मेरठ व पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सैकड़ों डॉक्टरों ने इसमें भाग लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत हृदय रोगों से जुड़े विषय “मिनिमली इनवेसिव सीएबीजी और ईसीएमओ” पर चर्चा से हुई। मैक्स पटपड़गंज, दिल्ली के वरिष्ठ हृदय शल्य चिकित्सक डॉ. वैभव मिश्रा ने बताया कि मिनिमली इनवेसिव तकनीक हृदय शल्य चिकित्सा में क्रांतिकारी बदलाव ला रही है। इस तकनीक से न केवल मरीज को कम दर्द और कम समय में रिकवरी मिलती है, बल्कि संक्रमण के खतरे भी काफी कम हो जाते हैं। उन्होंने गंभीर मामलों में ईसीएमओ (Extracorporeal Membrane Oxygenation) के महत्व को रेखांकित किया और इसे जीवनरक्षक तकनीक बताया।
इसके बाद “क्रिटिकल केयर सेटअप में रेडियोथैरेपी” विषय पर मैक्स पटपड़गंज, दिल्ली के वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. मनोज त्याल ने जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कैंसर रोगियों की गहन चिकित्सा इकाइयों में रेडियोथैरेपी देना चिकित्सकों के लिए चुनौतीपूर्ण कार्य है। ऐसे मरीजों की देखभाल में मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम अप्रोच जरूरी है, जिससे उपचार संतुलित और सुरक्षित तरीके से किया जा सके।
तीसरा व्याख्यान “ब्रेन ट्यूमर प्रबंधन के क्रिटिकल केयर पहलू” पर केंद्रित रहा। मैक्स पटपड़गंज, दिल्ली के न्यूरो एवं स्पाइनल सर्जरी विभाग के प्रिंसिपल डायरेक्टर डॉ. अमिताभ गोयल ने बताया कि ब्रेन ट्यूमर के मरीजों की सर्जरी के बाद गहन चिकित्सा में मॉनिटरिंग सबसे अहम है। उन्होंने न्यूरोलॉजिकल आईसीयू के महत्व और समय पर हस्तक्षेप की भूमिका पर विशेष जोर दिया।
शाम के सत्र में “स्ट्रोक एंड इट्स मिस्ट्रीज़” विषय पर मैक्स वैश्याली, दिल्ली के प्रिंसिपल डायरेक्टर न्यूरोसाइंसेस डॉ. संजय सक्सेना ने प्रस्तुति दी। उन्होंने कहा कि स्ट्रोक दुनिया में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण है, लेकिन जागरूकता और समय पर इलाज से लाखों जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।
अंतिम सत्र में मैक्स वैश्याली, दिल्ली के वरिष्ठ पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. शरद जोशी ने “न्यूमोनिया : जब यह परेशान करता है” विषय पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बच्चों, बुजुर्गों और इम्यूनिटी कमजोर होने वाले मरीजों में न्यूमोनिया के खतरों की चर्चा की और उसकी रोकथाम के व्यावहारिक उपाय बताए।
सीएमई के सभी सत्रों की अध्यक्षता मेरठ के वरिष्ठ चिकित्सकों ने की, जिनमें डॉ. अमित शर्मा, डॉ. अंकुर अग्रवाल, डॉ. जगदीश जयनेंद्र, डॉ. तनय गुप्ता, डॉ. ममतेश गुप्ता, डॉ. संकतेश गर्ग, डॉ. अरुण, डॉ. स्नेहलता, डॉ. बी.एन. सत्पती, डॉ. रोहित कम्बोज, डॉ. अमित बिंदल, डॉ. अभिनव बंसल, डॉ. अभय अहलावत, डॉ. विनोद अरोड़ा, डॉ. आभा गुप्ता, डॉ. रोहित गर्ग, डॉ. अपूर्वा तोमर, डॉ. सौरभ सिंगल, डॉ. वीरोत्तम तोमर और डॉ. आयुष जैन शामिल रहे।
सभी चेयरपर्सन ने विषय विशेषज्ञों के व्याख्यानों को न केवल ध्यानपूर्वक सुना बल्कि कई महत्वपूर्ण प्रश्न भी पूछे। इस संवादात्मक माहौल ने कार्यक्रम को और भी ज्ञानवर्धक बना दिया।
कार्यक्रम ने न केवल चिकित्सकों को नई तकनीकों की जानकारी दी बल्कि मेडिकल छात्रों और युवा डॉक्टरों के लिए भी यह प्रेरणादायक रहा। विशेषज्ञों ने बताया कि कैसे निरंतर शिक्षा (Continuing Medical Education) डॉक्टरों के लिए उतनी ही जरूरी है जितनी दवा मरीज के लिए।
चिकित्सकों ने माना कि ISCCM annual CME Meerut जैसे आयोजन से न केवल उनका ज्ञान बढ़ता है बल्कि मरीजों को बेहतर उपचार भी उपलब्ध कराया जा सकता है। यह आयोजन चिकित्सा विज्ञान और समाज दोनों के लिए फायदेमंद है।
समापन सत्र में आयोजन समिति ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में मैक्स पटपड़गंज और मैक्स वैश्याली अस्पताल, दिल्ली का विशेष सहयोग रहा।
ISCCM annual CME Meerut ने यह साबित किया कि चिकित्सा जगत में निरंतर शिक्षा और संवाद से ही प्रगति संभव है। आधुनिक तकनीकों और विशेषज्ञों की गहन जानकारी से चिकित्सक न केवल खुद को अपडेट कर पाए बल्कि मरीजों को भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ देने की दिशा में कदम बढ़ा सके। यह वार्षिक सीएमई चिकित्सा क्षेत्र में नई सोच और नई दिशा देने वाला साबित हुआ।
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