Kushmanda Mata Ki Aarti || kushmanda mata ka bhog || navratri ka chautha din || 4th day of navratri

Kushmanda Mata Ki Aarti: नवरात्रि के चौथे दिन करें मां कुष्मांडा का ध्यान

  • संवाददाता || ई-रेडियो इंडिया

Kushmanda Mata Ki Aarti: नवरात्रि के चौथे दिन मां कुष्मांडा की पूजा अर्चना की जाती है। नवरात्रि के चौथे दिन साधक अनाहत चक्र में प्रवेश करते हैं। इस दौरान भक्तों को किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, किस मंत्र का उच्चारण करना चाहिए और उनकी उपासना कैसे करें इस बारे में यहां बताएंगे-

सबसे पहले जानते हैं क्या अर्थ है कुष्मांडा का

संस्कृत भाषा में कुष्मांडा को कुम्हड़ कहते हैं। कु का अर्थ है कुछ और ऊष्मा का अर्थ है ताप से है, अंडा का अर्थ यहां है सृष्टि या ब्रह्मांड। मान्यता है कि जिस वक्त धरती पर अंधेरा ही अंधेरा था उस वक्त मां कुष्मांडा ने अपनी ऊष्मा से ब्रह्मांड की रचना कर दी। इसी वजह से इन्हें मां कुष्मांडा के नाम से जाना जाता है।

कहते हैं कि मां कुष्मांडा की पूजा करने वाले व्यक्ति में एक अविस्मरणीय और अलौकिक ऊष्मा देखने को मिलती है जिसके बल पर मनुष्य के मन में कुछ भी करने की इच्छा शक्ति जाग्रत हो जाती है।

इन्हें आदिशक्ति के नाम से भी जाना जाता है कहते हैं कि इनका निवास सूर्यमंडल के सबसे गहरे स्थल यानी भीतरी तल पर होता है। इनकी आठ भुजाएं हैं जिसके कारण इन्हें अष्टभुजा देवी के नाम से जाना जाता है। इनके आठ भुजाओं में कमल पुष्प, अमृत कलश, चक्र, गदा, कमंडल, धनुष, बाण व आठवें हाथ में जपमाला होती है। मां कुष्मांडा सिंह पर सवार होती हैं।

कैसे करें मां कुष्मांडा की पूजा?

मां कुष्मांडा की पूजा के दौरान मन व शरीर को शुद्ध कर, मां को याद करते हुए लाल पुष्प अर्पित करें और मिष्ठान का भोग लगाएं। मां कुष्मांडा की आरती करने के पश्चात इस मंत्र का जाप करें-

‘सुरासंपूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥’

या

‘या देवी सर्वभू‍तेषु मां कूष्माण्डा रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।’

या

‘ऊं ऐं ह्रीं क्लीं कुष्मांडायै नम:।।’

पूजा के दौरान इन बातों का ख्याल रखें तो मां होंगे प्रसन्न

  • स्वच्छता का विशेष ख्याल रखें। लाल पुष्प और लाल रंग के वस्तुओं को चढ़ाएं।
  • इस दिन किसी ऐसी विवाहित महिला से आशीष ले जिसका ललाट चौड़ा हो, इस प्रकार के महिला का पूजन करने के पश्चात उन्हें दही और हलवा खिलाएं।
  • इस दिन किसी भी तरह के याचक को अपने घर से वापस न लौटने दें।
  • क्षमता अनुसार कन्याओं को दान करें। जरूरतमंदों को क्षमता अनुसार दान करें।
  • किसी भी तरह की स्थिति आ जाए अपने मुंह से अपशब्दों या नकारात्मक शक्तियों का इस्तेमाल बिल्कुल ना करें।

देवी कुष्मांडा की पूजा विधि

  • किस दिन सुविधानुसार स्वच्छ वस्त्रों को धारण कर मां को याद करते हुए हरी इलायची सौंफ और कुंम्हड़ा अर्पित करें।
  • मां कुष्मांडा को समर्पित मंत्र “ॐ कुष्मांडा देव्यै नमः” का 108 बार जाप करें। सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें तो और भी अच्छा रहेगा।
  • मां कुष्मांडा की पूजन के दौरान मालपुआ चढ़ाएं और उसके बाद उस प्रसाद को ब्राम्हण, निर्धन या कन्याओं में वितरित करें।
  • मां की पूजा के आखिरी दौर में उनके आरती (Kushmanda Mata Ki Aarti) करना ना भूलें और शुद्ध मन से मां का जयकारा भी लगायें।
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कुष्मांडा माता की आरती || Kushmanda Mata Ki Aarti

कुष्मांडा जय जग सुखदानी| मुझ पर दया करो महारानी||

पिंगला ज्वालामुखी निराली| शाकम्बरी माँ भोली भाली||

लाखो नाम निराले तेरे| भगत कई मतवाले तेरे||

भीमा पर्वत पर है डेरा| स्वीकारो प्रणाम ये मेरा||

संब की सुनती हो जगदम्बे| सुख पौचाती हो माँ अम्बे||

तेरे दर्शन का मै प्यासा| पूर्ण कर दो मेरी आशा||

माँ के मन मै ममता भारी| क्यों ना सुनेगी अर्ज हमारी||

तेरे दर पर किया है डेरा| दूर करो माँ संकट मेरा||

मेरे कारज पुरे कर दो| मेरे तुम भंडारे भर दो||

तेरा दास तुझे ही ध्याये| ‘भक्त’ तेरे दर शीश झुकाए||




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