Laparoscopic Surgery in Meerut: सुभारती अस्पताल में है बेहतर इलाज की गुंजाइस
Laparoscopic Surgery in Meerut: छत्रपति शिवाजी सुभारती अस्पताल के चिकित्सा उपाधीक्षक (Medical Deputy Superintendent of Subharti Hospital) डाॅ.कृष्णा मूर्ति ने मीडिया को दिये साक्षात्कार में पित्ताशय की बीमारी एवं इसके उपचार के सम्बन्ध में विभिन्न सवालों के जवाबों द्वारा विस्तृत जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि शरीर में पित्ताशय अहम अंग है लेकिन इसमें पथरी होने, सूजन व मवाद आने के कारण इसको निकालना पड़ता है। उन्होंने बताया कि सुभारती अस्पताल में न्यूनतम दर पर उपलब्ध लैप्रोस्कोपिक ऑपरेशन (Laparoscopic Surgery in Meerut) की सुविधा से क्षेत्र के लोग लाभान्वित हो रहे हैं।
Medical Deputy Superintendent of Subharti Hospital ने बताया कि, वसा के पाचन में पित्ताशय की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह पित्त को संग्रहीत करता है और जब हम खाना खाते हैं तो इसे छोड़ देते हैं। कुछ व्यक्तियों में विशेष रूप से महिलाओं में पित्ताशय में खराबी होने लगती है। एक बार खराबी शुरू होने पर पित्त जमा होने लगता है और पथरी का कारण बनता है। इस बीमारी से ग्रस्त लोगों में भोजन के बाद खट्टी डकार, ऊपरी पेट में दर्द और पेट में भारीपन जैसे अस्पष्ट लक्षण होते हैं। कुछ रोगियों में गंभीर पेट दर्द, उल्टी, बुखार, पीलिया जैसे गंभीर लक्षण भी हो सकते हैं।
उपचार सरल है, और इसमें पित्ताशय को निकालना शामिल है। इसका कोई अन्य उपचार मौजूद नहीं हैं। Medical Deputy Superintendent of Subharti Hospital ने बताया कि पथरी के कारण ऑपरेशन करवाना सबसे बेहतर है और सुभारती अस्पताल में लैप्रोस्कोपिक (Laparoscopic Surgery in Meerut) और ओपन तकनीक दोनों द्वारा ऑपरेशन किया जाता है। उक्त दोनो तकनीक से सुभारती अस्पताल में प्रति वर्ष 1,000 से अधिक लेप्रोस्कोपिक ऑपरेशन हो रहे है। ओपन सर्जरी केवल सबसे जटिल मामलों में की जाती है अन्यथा लैप्रोस्कोपिक ऑपरेशन सरल विकल्प है।
Medical Deputy Superintendent of Subharti Hospital के अनुसार जिस भी रोगी को सर्जरी की आवश्यकता होती है तो रोगी का मनोबल बढ़ाते हुए प्रक्रिया को विस्तार से समझाया जाता है। भर्ती होने के दिन विभिन्न परीक्षण किए जाते हैं और ऑपरेशन एवं एनेस्थीसिया के लिए सुरक्षा स्थापित की जाती है। अगले दिन मरीज का ऑपरेशन किया जाता है जिसमें न्यूनतम इनवेसिव सर्जरी करने के लिए 4 छोटे चीरों की आवश्यकता होती है। सर्जरी के बाद रोगी को निगरानी के लिए रिकवरी रूम में स्थानांतरित कर दिया जाता है। पूरी निकवरी के बाद रोगी को कमरे में स्थानांतरित कर दिया जाता है। 1-2 दिनों के बाद रोगी को घर वापस भेज दिया जाता है।
इसके साथ ही ओपीडी में फॉलो-अप के लिए मरीज 7-10 दिनों के बाद आता है। जिसमें टाँके हटा दिए जाते हैं। उन्होंने विशेष कहा कि सुभारती अस्पताल की प्राथमिकता है कि सर्वप्रथम मरीज की सुरक्षा हो एवं रोगी को अस्पताल में व्यावहारिक वातावरण आधुनिक तकनीक व सरल उपचार के साथ दिया जाए। सुभारती अस्पताल द्वारा एनएबीएच प्रवेश स्तर और एनएबीएच नर्सिंग उत्कृष्टता मान्यता प्राप्त होने के नाते अस्पताल सर्वोत्तम मानक और गुणवत्ता प्रथाओं का पालन करने हेतु प्रतिबद्ध है।
यदि ऑपरेशन समय पर नहीं किया जाता है तो पत्थर पित्ताशय से बाहर निकल सकता है जो रुकावट व पीलिया का कारण बन सकता है। इससे अग्न्याशय में सूजन पैदा हो जाती है एवं पित्ताशय की थैली में यह अचानक रुकावट और संक्रमण का कारण बनकर जीवन को खतरें में डाल सकता है। सबसे बुरी बात यह है कि अंततः पित्ताशय का कैंसर हो सकता है। इसलिए इसे निकाला जाना सबसे अच्छा है।
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