Maa Kalratri Aarti | Maa Kalratri Puja Vidhi | Maa Kalratri Mantra

7th Day of Navratri: जानें मां कालरात्रि की आरती, पूजा विधि व मंत्र

  • संवाददाता || ई-रेडियो इंडिया

maa kalratri aarti | maa kalratri puja vidhi | maa kalratri mantra: नवरात्रि के सातवें दिन (7th Day of Navratri) मां कालरात्रि की पूजा की जाती है, मां कालरात्रि की पूजा (Maa Kalratri Puja) करने से भय का विनाश होता है, भक्तों में एक अद्भुत शक्ति का संचार होता है। इसमें हम जानेंगे कि कैसे मां कालरात्रि की, कौन सी चीजें उन्हें चढ़ाएं और उनकी आरती कैसे करें?

सबसे पहले जानते हैं मां कालरात्रि के बारे में

कहते हैं कि मां दुर्गा के सातवें स्वरूप (7th Day of Navratri) में गर्धव यानि गधा की सवारी करने वाली मां कालरात्रि ने रक्तबीज (Raktbij Rakshas) नामक एक दानव को मारने के लिए अपना रूप धारण किया था। कहते हैं कि रक्त अभी जितना खतरनाक था कि अगर उसको मारने के लिए किसी ने उसका रक्त बहा दिया तो उसके रक्त से उसके ही जैसा एक और दाना बन जाता था।

उसके संघार के लिए भगवान शिव ने ही पार्वती माता से अनुरोध किया और उसी के परिणाम स्वरूप मां कालरात्रि अस्तित्व में आईं, उन्होंने रक्तबीज का संहार करने के दौरान उसके संपूर्ण रक्त को अपने मुंह में भर लिया इसके बाद रक्तबीज का गला काट दिया। मां पार्वती का यह भयंकर रूप कालरात्रि के नाम से जाना जाता है।

मां कालरात्रि की नाक से आग की भयंकर लपटें निकलती हैं। मां कालरात्रि का दायां हाथ हमेशा उपर की ओर उठा रहता है, इसका अर्थ मां सभी को आशीर्वाद दे रही हैं। उनके बाएं हाथ में लोहे का कांटेदार अस्त्र है। मां कालरात्रि के निचले दाहिने हाथ की मुद्रा भक्तों के भय को दूर करने वाली है। निचले बाएं हाथ में कटार है।

Maa Kalratri Aarti | Maa Kalratri Puja Vidhi | Maa Kalratri Mantra || 7th day of navratri
Maa Kalratri Aarti | Maa Kalratri Puja Vidhi | Maa Kalratri Mantra || 7th day of navratri

मां कालरात्रि से भक्तों को यह सब मिलता है

  • मां कालरात्रि की पूजा करना (Maa Kalratri Puja) भय से मुक्ति प्रदान करता है।
  • मानसिक तनाव और शत्रु नाश करने में अहम भूमिका निभाता है।
  • मां कालरात्रि की पूजा (Maa Kalratri Puja) करने से आपके कार्यों में किसी तरह की बाधा उत्पन्न होने पर आप स्वयं उसका समाधान त्वरित रूप से ढूंढने में सक्षम हो जाते हैं।

मां कालरात्रि पूजा मंत्र || Maa Kalratri Mantra

एकवेणी जपाकर्णपूरा नग्ना खरास्थिता। लम्बोष्ठी कर्णिकाकर्णी तैलाभ्यक्तशरीरिणी॥वामपादोल्लसल्लोहलताकण्टकभूषणा। वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रिर्भयंकरी॥
या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।
ॐ कालरात्रि देव्ये नम:

मां कालरात्रि की पूजा विधि | Maa Kalratri Puja Vidhi

  • मन, वचन, तन को शुद्ध करें पूजा स्थल पर बैठें और मां का ध्यान लगाएं।
  • मां कालरात्रि की पूजा (Maa Kalratri Puja Vidhi) करने के लिए उनको चढ़ाने वाले पदार्थ जैसे कुमकुम, लाल पुष्प, रोली लगाएं।
  • मां कालरात्रि को नींबू की माला बेहद पसंद है साथ ही उन्हें गुड़ का भोग लगाएं।
  • तेल का दीपक जलाते हुए मन में मां कालरात्रि के पूजा को सकुशल संपन्न करने का संकल्प लें।
  • माता को चढ़ाने के लिए लाल पुष्प ले और साथ ही अक्षत के साथ धूप दीप जलाएं।
  • उपर बताए गए मन्त्रों का जाप करते हुए माता की पूजा करें।
  • संभव हो तो अंत में सप्तशती का पाठ का शुद्धतम रूप में उच्चारण करें।

मां कालरात्रि की आरती || Maa Kalratri Aarti

कालरात्रि जय-जय-महाकाली। काल के मुह से बचाने वाली॥

दुष्ट संघारक नाम तुम्हारा। महाचंडी तेरा अवतार॥

पृथ्वी और आकाश पे सारा। महाकाली है तेरा पसारा॥

खडग खप्पर रखने वाली। दुष्टों का लहू चखने वाली॥

कलकत्ता स्थान तुम्हारा। सब जगह देखूं तेरा नजारा॥

सभी देवता सब नर-नारी। गावें स्तुति सभी तुम्हारी॥

रक्तदंता और अन्नपूर्णा। कृपा करे तो कोई भी दुःख ना॥

ना कोई चिंता रहे बीमारी। ना कोई गम ना संकट भारी॥

उस पर कभी कष्ट ना आवें। महाकाली माँ जिसे बचाबे॥

तू भी भक्त प्रेम से कह। कालरात्रि माँ तेरी जय॥




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