Mahagauri Puja Vidhi, Mahagauri Aarti

Mahagauri Puja Vidhi || Mahagauri Aarti

  • संवाददाता || ई-रेडियो इंडिया

Mahagauri Puja Vidhi || Mahagauri Aarti: नवरात्रि का आठवां दिन महागौरी के नाम होता है और उस दिन भक्तों को आराधना करने में बहुत ही सावधानियों की जरूरत होती है क्योंकि मां महागौरी के नाराज होने पर कोई शक्ति ऐसी नहीं है जो आपके बिगड़े काम को बना दे।

अपनी कठिन तपस्या के बल पर गौर वर्ण प्राप्त करने वाली मां गौरी शारीरिक और सांसारिक दुखों का हरण करने वाले हैं और भक्तों को विशेष वरदान देती हैं।

ऐसे करें महागौरी की पूजा || Mahagauri Puja Vidhi

  • तन, मन और वचन को शुद्ध करें पूजा स्थल (Mahagauri Puja Vidhi) पर बैठे।
  • चौकी पर माता की मूर्ति को रखकर गंगाजल से शुद्ध करण करें और मां का ध्यान करें।
  • दीप जलाएं, धूप जलाएं और माता का ध्यान लगाएं।
  • इस दौरान श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका (16 देवी), सप्त घृत मातृका(सात सिंदूर की बिंदी लगाएं) की स्थापना भी करें। 
  • इसके बाद व्रत, पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा माता महागौरी सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें। 
  • इसमें आवाहन, आसन, पाद्य, अध्र्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, – नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि आदि करें। तत्पश्चात प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें।

अगर आपके घर अष्‍टमी पूजी जाती है तो आप पूजा के बाद कन्याओं को भोजन भी करा सकते हैं। ये शुभ फल देने वाला माना गया है।

ध्यान मंत्र

श्वेत वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचि:। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥ 

  • नवरात्रि का आठवां दिन हमारे शरीर का सोमचक्रजागृत करने का दिन है। सोमचक्र उध्र्व ललाट में स्थित होता है। आठवें दिन साधना करते हुए अपना ध्यान इसी चक्रपर लगाना चाहिए।
  • श्री महागौरी की आराधना से सोमचक्र जागृत हो जाता है और इस चक्र से संबंधित सभी शक्तियां श्रद्धालु को प्राप्त हो जाती है।
  • मां महागौरी के प्रसन्न होने पर भक्तों को सभी सुख स्वत: ही प्राप्त हो जाते हैं। साथ ही इनकी भक्ति से हमें मन की शांति भी मिलती है।
  • देवी दुर्गा के नौ रूपों में महागौरी आठवीं शक्ति स्वरूपा हैं। इनके तेज से संपूर्ण विश्व प्रकाश-मान होता है। इनकी शक्ति अमोघ फलदायिनी है।
  • देवी महागौरी की अराधना से भक्तों के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। देवी का भक्त जीवन में पवित्र और अक्षय पुण्यों का अधिकारी बनता है।

8 वर्ष की आयु में माता ने शिवजी को पति रूप में प्राप्त करने के लिए तपस्या की। मात्र 8 वर्ष की आयु में घोर तपस्या करने के कारण इनकी पूजा नवरात्र के 8वें दिन की जाती है। एक कथानुसार, भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए देवी ने कठोर तपस्या की थी जिससे इनका शरीर काला पड़ गया, तब देवी की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव मां के शरीर पर गंगाजल डालते हैं। इस तरह देवी विद्युत के समान अत्यंत कांतिमान गौर वर्ण की हो जाती हैं तथा तभी से इनका नाम गौरी पड़ा।

महागौरी की आरती || Mahagauri Aarti

जय महागौरी जगत की माया । जय उमा भवानी जय महामाया ॥

हरिद्वार कनखल के पासा । महागौरी तेरा वहा निवास ॥

चंदेर्काली और ममता अम्बे। जय शक्ति जय जय मां जगदम्बे ॥

भीमा देवी विमला माता। कोशकी देवी जग विखियाता ॥

हिमाचल के घर गोरी रूप तेरा। महाकाली दुर्गा है स्वरूप तेरा ॥

सती ‘सत’ हवं कुंड मै था जलाया। उसी धुएं ने रूप काली बनाया ॥

बना धर्म सिंह जो सवारी मै आया। तो शंकर ने त्रिशूल अपना दिखाया ॥

तभी मां ने महागौरी नाम पाया। शरण आने वाले का संकट मिटाया ॥

शनिवार को तेरी पूजा जो करता। माँ बिगड़ा हुआ काम उसका सुधरता ॥

‘चमन’ बोलो तो सोच तुम क्या रहे हो। महागौरी माँ तेरी हरदम ही जय हो ॥




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