उत्तर प्रदेश

मिल्कीपुर उपचुनाव: दांव पर लगी भाजपा की प्रतिष्ठा

  • मिल्कीपुर उपचुनाव में विपक्षी एकता का दिख रहा है जोर
  • भारतीय जनता पार्टी की प्रतिष्ठा लगी दांव पर
  • क्या जनता इस बार भाजपा का लगाएगी बेड़ा पार

5 फरवरी को होने जा रहे अयोध्या की मिल्कीपुर विधानसभा के उपचुनाव पर भाजपा और समाजवादी पार्टी (सपा) दोनों की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने खुद इस सीट पर चुनावी कमान संभाल ली है। वे चुनाव की घोषणा के पहले ही मिल्कीपुर विधानसभा इलाके में तीन सभाएं कर चुके हैं।

अयोध्या का भी दौरा आधा दर्जन बार दो माह के बीच किया, जिसमें चुनावी एंगल पर भाषण भी दिया। इसके साथ ही प्रदेश सरकार के सात मंत्री यहां चुनाव प्रचार में लगे हैं। भाजपा के प्रदेश संगठन और जिला संगठन का एक ही लक्ष्य है.. हर हाल में मिल्कीपुर उपचुनाव जीतना।

वास्तव में भाजपा लोकसभा चुनाव में यहां मिली हार का बदला लेकर यह बताना चाहती है कि समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद सपा और इंडिया गठबंधन के झूठे प्रचार व लोगों में भ्रम पैदा करके अयोध्या की फैजाबाद लोकसभा सीट जीते हैं। सपा ने सारे देश में फैजाबाद में जीत का प्रचार कर भाजपा की फजीहत की थी।

ऐसे में भाजपा उन कमियों को नहीं दोहराना चाहती जो लोकसभा के चुनाव में हार के कारण बनी थी। पार्टी के ही सूत्र बताते हैं कि पिछले चुनाव की हार की समीक्षा कर, अब घर-घर संपर्क का कार्यक्रम चल रहा है। भाजपा उम्मीदवार चंद्रभान पासवान खुद भी वोट मांग रहे हैं।

मुलायम सिंह की पुत्रवधू और भाजपा नेता अपर्णा यादव, यादव समुदाय की वोट मांग रही हैं। समाजवादी पार्टी के प्रचार में जुटे पूर्व मंत्री तेज नारायण पांडे पवन व क्षेत्रीय सपा नेता कमलासन पांडे ब्राह्मण वोटों को पक्का करने के लिए संपर्क कार्यक्रम चला रहे हैं। पवन ने बताया कि इस समय सपा की रोजाना 6 चौपाल लगाईं जा रही है।

सांसद अवधेश प्रसाद भी अपने पुत्र के चुनाव प्रचार में जुटे हैं। प्रचार कार्यक्रम में भाजपा शासन की तानाशाही, भ्रष्टाचार और कानून- व्यवस्था की गिरावट को मुद्दा बनाया जा रहा है। सुरक्षित सीट होने के कारण मिल्कीपुर में दलितों की संख्या अधिक है। 70 हजार के करीब ब्राह्मण, 65 हजार यादव व 25 हजार ठाकुर, 20 हजार के करीब मुस्लिम मतदाता हैं। यहां पाशी, कोरी, ब्राह्मण व यादव चुनाव में प्रभावकारी भूमिका निभाते हैं। पिछले चुनावों पर नजर डालें तो भाजपा की जीत के पीछे बसपा के उम्मीदवार के वोट की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

2017 के चुनाव में यहां से भाजपा के बाबा गोरखनाथ ने 86960 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी। इस चुनाव में सपा के अवधेश प्रसाद को 58684 और बसपा के राम गोपाल को 46027 वोट मिले थे। जबकि पिछले चुनाव में सपा के अवधेश प्रसाद ने भाजपा के बाबा गोरखनाथ को हराकर जीत दर्ज की थी।

5 फरवरी को होने जा रहे उपचुनाव में भाजपा से चंद्रभान पासवान और सपा से अजित प्रसाद उम्मीदवार है। बसपा ने अपना उम्मीदवार नहीं खड़ा किया है। चंद्रशेखर आजाद की आजाद समाज पार्टी (आसपा) ने संतोष कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया है जो सपा के अवधेश प्रसाद के करीबी हैं और नाराज होकर आसपा में शामिल हो गए। वे दलितों के वोटों में कितनी सेंध लगाते हैं, इसका भी चुनाव परिणाम पर असर पड़ेगा।

भाजपा ने इस सीट को अपनी प्रतिष्ठा का सवाल बना लिया है। अयोध्या की हार से पार्टी की पूरे देश में कितनी किरकिरी हुईं थी कि श्रीराम के मंदिर के निर्माण के बाद भी भाजपा यहां से हार गईं। अब बदला लेने का मौका है। देखें, मतदाताओं का क्या रुख रहता है।

editor

पत्रकारिता में बेदाग 11 वर्षों का सफर करने वाले युवा पत्रकार त्रिनाथ मिश्र ई-रेडियो इंडिया के एडिटर हैं। उन्होंने समाज व शासन-प्रशासन के बीच मधुर संबंध स्थापित करने व मजबूती के साथ आवाज बुलंद करने के लिये ई-रेडियो इंडिया का गठन किया है।

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