किसान बिल का विरोध, एंबुलेंस को छोड़ बाकी वाहनों के लिये ठप रहा मार्ग

किसान बिल का विरोध, एंबुलेंस को छोड़ बाकी वाहनों के लिये ठप रहा मार्ग

मवाना, मेरठ। मवाना खुर्द छोटा मवाना पुलिस चौकी तिराहे पर अखिल भारतीय किसान सभा के पद अधिकारियों ने कृषि संबंधी बिल वापस कराए जाने को किया चक्काजाम अखिल भारतीय किसान सभा के जिला अध्यक्ष संग्राम पोसवाल के नेतृत्व में भारी संख्या में किसानों ने लगाया जाम अध्यादेश वापस कराए जाने के संबंध में एसडीएम मवाना को सौंपा ज्ञापन।

भारतीय किसान सभा के पदाधिकारियों ने ज्ञापन में कहा के भाजपा ने वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान देश के किसानों से वादा किया था कि उनकी सरकार बनने पर किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप लागत का डेढ़ गुना दाम दिया जाएगा लेकिन स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें तो दूर रही इस अवधि में मूल बढ़ोतरी भी नहीं की गई।

किसानों को मंडियों में दलालों के हाथों लूटने को छोड़ दिया किसानों को सरकार ने किसानों को किए वादे के अनुरूप स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू कराने हेतु किसानों को सुप्रीम कोर्ट में जाना पड़ा जहां सरकार ने वर्ष 2015 में कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कहा था कि सरकार कृषि लागत में 50% मूल्य जोड़कर किसानों को नहीं दे सकती क्योंकि किसानों को लागत मूल्य लाभांश देने से बाजार गड़बड़ा जाएगा।

इससे साफ नजर आता है कि सरकार की कथनी और करनी में अंतर है केंद्र सरकार द्वारा वर्तमान में कृषि से संबंधित विधेयक लाए गए हैं जिसमें सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य एनएक्सटी खरीद और भंडार निर्माण और इसके आधार पर खड़ी हुई देश की टिकाऊ जन वितरण प्रणाली खाद्य सुरक्षा को ध्वस्त करना चाहती है और इसकी जगह पर सरकार कृषि अर्थव्यवस्था और ठीक उसी प्रकार से शहरी मेहनतकश जनता और उपभोक्ताओं की लूट की व्यवस्था को मजबूत करना चाहती है।

यह सच्चाई है कि ग्रामीण मेहनतकश किसानों और उसी तरह से उत्पादकों और शहरी उपभोक्ताओं में गहराई तक चली गई है यह तीन अध्यादेश जमाखोरी कालाबाजारी और मुनाफाखोरी को फिर से स्थापित करने के लिए लाए गए हैं जो किसानों मजदूरों को राहत देने की बजाय लंबे संघर्ष द्वारा प्राप्त अधिकारों को छीनने कि नियत से लाए गए है डॉक्टर स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने के बजाय किसानों की फसलों को लूटने के लिए बड़े-बड़े व्यापारियों को खुली एवं कानूनी छूट दी जा रही है आशंका इस बात की है कि मोदी सरकार शांता कुमार समिति की सिफारिशों को अमल में लाने की कोशिश कर रही है जिसका प्रभाव सार्वजनिक खरीद में कमी सार्वजनिक वितरण प्रणाली एनएससी सिद्धांत तथा खाद्य सुरक्षा बल पर असर पड़ेगा।

अनुबंध की आजादी से संबंधित इसके साथ लाया गया अध्यादेश खरीदार को उत्पाद के एवज में एनएचसी से कम का भुगतान न करने के लिए बाध्य नहीं है जिससे संदेह हो रहा है कि न्यूनतम समर्थन मूल्य को सरकार हटाने का षड्यंत्र कर रही है।

अखिल भारतीय किसान सभा जिला अध्यक्ष ने अनुरोध किया कि केंद्र द्वारा लाए गए तीनों अध्यादेश को किसानों को भुगतान के हितों की रक्षा हेतु वापस कराने के लिए केंद्र सरकार को बाध्य करें और किसानों व मजदूरों के हित के लिए अध्यादेश वापस लिया जाय वहीं चक्का जाम के दौरान किसानों ने इंसानियत का परिचय देते हुवे बीमार मरीज़ों व एम्बुलेंस आने जाने खुली छूट दी वही अखिल भारतीय किसान सभा के पदाधिकारियों ने अपन मांग पत्रे में निम्न मांग यह रखी नंबर 1 केंद्र सरकार द्वारा लाए गए।

किसान विरोधी तीनों अध्यादेश को तुरंत वापस कराया जाए नंबर दो स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू कराया जाए नंबर तीन किसानों को प्रति माह ₹10000 दिलाया जाए नंबर 4 किसानों की फसलों की खरीद को सुनिश्चित किया जाएगा खरीद की गारंटी की जाए कार्यक्रम के दौरान राजपाल शर्मा सूरज शर्मा बिल्लू रामपुर जितेंद्र पाल कालूराम रामवीर सिंह इंद्रपाल सिंह संग्राम सिंह जगदीश महा सिंह कुलदीप जायसवाल आदि मौजूद रहे।




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