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…अपनी हरकतों से बाज नहीं आएगा पाकिस्तान!

सेना प्रमुख जनरल उपेन्द्र द्विवेदी की ओर से आपरेशन सिन्दूर के बारे में दिए गए इस बयान कि यदि पाकिस्तान की तरफ से फिर आतंकी हमला हुआ तो भूगोल बदल देंगे के जवाब में पाकिस्तान के इंटर सर्विस पब्लिक रिलेशन्स (आईंएसपीआर) ने रविवार को कहा कि ‘‘यदि ऐसे हालात बने तो दोनों तरफ नुकसान होगा।’’

दरअसल पाकिस्तान की तरफ से जवाब आना था और आया भी, किन्तु जनरल द्विवेदी के उस बयान का जवाब नहीं आया जो उन्होंने भूगोल बदलने के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों का उल्लेख किया। मतलब यह कि पाकिस्तान भारत को छेड़ेगा तो भूगोल बदल जाएगा। छेड़ेगा का मतलब यह कि यदि वह भारत के किसी भी क्षेत्र में आतंकी हमला करके निर्दोष नागरिकों का खून बहाएगा तो भारतीय सेना इसे पाक सेना द्वारा घोषित युद्ध माना जाएगा और इसके बाद भारत की तरफ से जो जवाब दिया जाएगा, उसमें पाकिस्तान की भौगोलिक स्थिति छिन्न-भिन्न ,हो जाएगी। पाकिस्तान की सेना की तरफ से जो जवाब आया वह इस बात का नहीं आया कि पाकिस्तान की तरफ से आतंकी गतिविधियां नहीं होंगी, बल्कि उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि यदि भारत पाकिस्तान के आतंकी घटना के बाद उस पर हमला किया तो वह इस बात को अच्छी तरह समझ ले कि नुकसान उसका (भारत) का भी होगा। आईएसपीआर का बयान सेना का होता है और भारत के प्रति रक्षा एवं विदेश नीति का निर्धारण सेना प्रतिष्ठान ही करता है। इसका मतलब यह कि भारत की सेना प्रतिष्ठान और सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि भारत के अंदर आतंक फैलाना उनकी हजार घाव देने की घोषित नीति से जुड़ा है जो राष्ट्रीय सुरक्षा नीति का अहम हिस्सा है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अभी दो दिन पहले ही पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए आगाह किया था कि सरक्रीक में किसी तरह का उसका दु:साहस उसके लिए महंगा पड़ेगा। वायुसेना प्रमुख एयर मार्शल एपी सिंह ने भी पाकिस्तान को आगाह किया है कि वह किसी भी तरह की खुराफात करेगा तो उसको ऐसा जवाब मिलेगा जिसकी उसने कल्पना भी नहीं की होगी।

असल में बात यह है कि पाकिस्तान 1965, 1971, 1999 और 2025 के संघर्ष में हमेशा पहल की है और संयोग से हर युद्ध में शांति प्रस्ताव लेकर पहले दूसरे देश के पास जाता है फिर भारत नहीं मानता है तो सैन्य प्रतिष्ठान से गिड़गिड़ाता है और जब युद्ध विराम की शर्तों पर बात होती है तो बड़ी आसानी से भारत को आश्वासन भी दे देता है किन्तु ऐतिहासिक घटनाओं का आंकलन करें तो वह हमेशा समझौतों की शर्तों को ठेंगा दिखाता है। पाकिस्तान की सरकारें चूंकि वहां की जनता के बीच चुनी जाती हैं, इसलिए हकीकत वो जानती हैं लेकिन सेना को लगता है कि जब तक भारत से दुश्मनी का माहौल बना रहेगा, तभी तक उसे बड़ा बजट मिलेगा अन्यथा सरकार उनकी सुविधाओं में कटौती कर देगी। यही कारण है पाकिस्तान में सरकार और पत्रकार या बुद्धिजीवी जो राग अलापते हैं, उसे अव्यावहारिक साबित करने के लिए सेना अपने पैनल पर काम कर रहे आतंकी सरगनाओं को सव््िराय करके भारत के साथ नया पंगा शुरू करा देती है। परिणाम यह होता है कि संबंधों को सामान्य बनाने की परिस्थितियां बन ही नहीं पातीं। 2014 के पहले भारत सरकार पाकिस्तान से बातचीत करने का माहौल बनाती थी, पाकिस्तान के नेता भी निश्चित तिथि पर वार्ता की तैयारी करते थे, किन्तु वार्ता तिथि के ठीक दो दिन पहले पाक सेना भारत के किसी भी क्षेत्र में हमला कर देती थी। भारत सरकार नाराज होती थी तो पाकिस्तान सरकार जवाब देती थी कि हमलावर ‘नान स्टेट एक्टर’ थे। मतलब यह कि हमला सरकार की किसी एजेंसी ने नहीं करवाया है, यह हमला करने वाले ऐसे गिरोह हैं, जिनका नियंत्रण पाक सरकार का नहीं है। पाक सरकार यह अच्छी तरह जानती थी कि जो गिरोह भारत में हमले करते हैं उनको पूरा खर्च पाक सेना देती है और सेना को धन सरकार के बजट से ही आवंटित होता है। यह सही है कि पाक सरकार यह धूर्ततापूर्ण व्यवहार सेना की गुंडागर्दी की वजह से विवशता के कारण ही करती थी किन्तु भारत सरकार सब कुछ जानने के बावजूद पाकिस्तान के साथ कठोरता से प्रतिक्रिया देने में संकोच करती थी। लेकिन 2014 के बाद भारत ने अपनी पूर्ववर्ती सरकार की पाकिस्तान के प्रतिनिधियों में पूरी तरह बदलाव कर लिया। अब सरकार मानती है कि नान स्टेट एक्टर जैसे तत्व कुछ नहीं होते बल्कि वे भी पाकिस्तान सेना के चौथे यानि जेहादी अंग होते हैं। इसलिए किसी भी आतंकी हमले को मौजूदा सरकार पाकिस्तान की सेना द्वारा भारत पर किया गया हमला मानती है। भारतीय सैन्य प्रतिष्ठान पाकिस्तान को बार-बार यही बताने की कोशिश कर रही है कि अब भारत सरकार और सेना किसी झांसे में आने वाली नहीं है, मतलब कि आतंकी हमले का जवाब निर्णायक होगा। अच्छा होता पाक सेना जवाब देती कि अब उसकी धरती से भारत के खिलाफ कोई हमला नहीं होगा किन्तु वह भला ऐसा आश्वासन क्यों देती उन्होंने एक औपचारिक जवाब दिया कि ठीक है यदि आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान पर जवाबी हमला किया तो पाकिस्तान उसका जवाब देगा फिर नुकसान दोनों का होगा। यह तो घिसापिटा उसका हमेशा की तरह का ही जवाब है। हकीकत तो यही है कि उनका जवाब इससे ज्यादा कुछ हो भी नहीं सकता। कारण कि पाकिस्तान के जन्म से ही दो राष्ट्रवाद की ऐसी गठरी उनके गले में बांध दी गई है जिसमें नफरत और विनाश की बारूद भरी है। इसलिए वे बीच-बीच में भारत को निशाना बनाते रहते हैं, क्योंकि वे भारत के खिलाफ उन बारूदों का इस्तेमाल नहीं करेंगे तो नफरती बारूद से वे खुद ही जलकर राख हो जाएंगे।

editor

पत्रकारिता में बेदाग 11 वर्षों का सफर करने वाले युवा पत्रकार त्रिनाथ मिश्र ई-रेडियो इंडिया के एडिटर हैं। उन्होंने समाज व शासन-प्रशासन के बीच मधुर संबंध स्थापित करने व मजबूती के साथ आवाज बुलंद करने के लिये ई-रेडियो इंडिया का गठन किया है।

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