Pandit Rama Shankar Mishra की द्वितीय पुण्यतिथि पर उमड़ा श्रद्धा और सेवा का सैलाब
Pandit Rama Shankar Mishra की द्वितीय पुण्यतिथि कादीपुर क्षेत्र में अद्भुत श्रद्धा, भव्यता और सेवा के साथ मनाई गई। शिक्षा जगत के इस महान पुरोधा, अनेक संस्थाओं के संस्थापक तथा संघ के प्रचारक रहे स्वर्गीय पंडित रमाशंकर मिश्र को क्षेत्रवासियों ने न केवल याद किया, बल्कि उनकी शिक्षाओं को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प भी लिया। समारोह का आयोजन पंडित राम चरित्र मिश्र ग्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशन, पढ़ेला के सार्थक इंस्टिट्यूट परिसर में किया गया, जहां सादगी, संस्कार और समाज सेवा की अनूठी मिसाल देखने को मिली। उनकी स्मृति में जुटे सैकड़ों लोगों ने स्पष्ट किया कि Pandit Rama Shankar Mishra का जीवन शिक्षा, अनुशासन और समाज उत्थान का प्रकाशस्तंभ था, जिसे आने वाली पीढ़ियाँ हमेशा स्मरण रखेंगी।
समारोह की शुरुआत शांति पाठ के साथ हुई, जिसके बाद वक्ताओं ने Pandit Rama Shankar Mishra के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला। संस्थान के प्रबंध निदेशक एवं सुपुत्र डॉ. श्रवण कुमार मिश्र ने कार्यक्रम की बागडोर संभालते हुए कहा कि उनके पिता न केवल एक दूरदर्शी शिक्षाविद् थे, बल्कि संघर्ष, स्वाभिमान और समाज को दिशा देने वाले व्यक्तित्व के धनी थे। वे शिक्षा को केवल रोजगार का साधन नहीं, बल्कि समाज निर्माण का आधार मानते थे।
वक्ताओं ने कहा कि Pandit Rama Shankar Mishra ने अपने जीवन में सदैव मूल्यों, अनुशासन और सेवा को प्राथमिकता दी। वे शिक्षा के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता और आत्मनिर्भरता का वातावरण तैयार करना चाहते थे। इसी सोच के साथ उन्होंने कई शैक्षिक संस्थानों की स्थापना की, जहां हजारों विद्यार्थी आज भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
इस पुण्यतिथि कार्यक्रम में जनता के साथ-साथ प्रशासनिक व राजनीतिक जगत की बड़ी हस्तियों की उपस्थिति ने इसे और गरिमामयी बना दिया। कादीपुर, पढ़ेला और आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों लोग श्रद्धांजलि देने पहुँचे। मंच पर बदलापुर विधायक रमेश चंद्र मिश्र, भाजपा जिला उपाध्यक्ष आनंद प्रकाश द्विवेदी, महामंत्री घनश्याम चौहान, कादीपुर नगर पंचायत अध्यक्ष आनंद जयसवाल, पूर्व जिलाध्यक्ष ऋषिकेश ओझा, पूर्व मुख्यमंत्री के सुपुत्र प्रमोद मिश्र, पंडित मदन मोहन मिश्र, पूर्व प्रमुख वीरेंद्र सिंह, पूर्व प्रमुख राजमणि वर्मा, जिला पंचायत सदस्य राधे कांत यादव, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. भरत भूषण सहित अनेक सम्मानित लोग मौजूद रहे।
सभी जनप्रतिनिधियों ने Pandit Rama Shankar Mishra की सादगी, दूरदर्शिता और शिक्षा के प्रति समर्पण को गौरवपूर्ण ढंग से याद किया। उन्होंने कहा कि एक प्रेरक शिक्षक के रूप में उनकी सोच में सदैव समाज हित सर्वोपरि रहा। वे मानते थे कि शिक्षा केवल भवनों और पुस्तकों तक सीमित नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली शक्ति है।
सेवा ही सर्वोत्तम कर्म है—इस सिद्धांत पर चलते हुए पुण्यतिथि पर मानवता की मिसाल पेश की गई। परिसर में 500 से अधिक गरीबों, असहायों एवं जरूरतमंदों को कम्बल वितरित किए गए। भीषण ठंड को देखते हुए यह वितरण अभियान अत्यंत सराहनीय रहा, जिसका उद्देश्य दिवंगत शिक्षाविद् के मानवतावादी विचारों को समाज में जीवित रखना था।
Pandit Rama Shankar Mishra सदैव कहते थे कि शिक्षा और सेवा—दोनों ही समाज को उन्नत बनाती हैं। उसी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए उनके अनुयायियों और संस्थान ने इस वर्ष कम्बल वितरण की परंपरा को और व्यापक रूप दिया। लोगों ने इस मानवीय पहल की प्रशंसा करते हुए कहा कि यही सच्ची श्रद्धांजलि है।
सार्थक इंस्टिट्यूट में फार्मेसी विभाग के छात्र-छात्राओं को व्यावसायिक दायित्वों, नैतिक आचरण और सेवाभाव की शपथ दिलाई गई। उन्होंने समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझने का संकल्प लिया। यह शपथ समारोह इस बात का प्रतीक था कि Pandit Rama Shankar Mishra की शिक्षा-नीति आज भी संस्थान में जीवित है—जहां शिक्षा के साथ संस्कार भी समान रूप से महत्व रखते हैं।
वक्ताओं ने छात्रों को प्रेरित किया कि वे चिकित्सा एवं फार्मेसी क्षेत्र में मानव सेवा को सर्वोच्च स्थान दें और अपने पेशे को ईमानदारी, निष्ठा एवं वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ निभाएं।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. श्रवण कुमार मिश्र ने सभी अतिथियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि संस्थान निरंतर यह प्रयास करता रहेगा कि Pandit Rama Shankar Mishra की शिक्षाओं को अधिक प्रभावी ढंग से विद्यार्थियों और समाज तक पहुँचाया जाए। उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले वर्षों में ग्राम्य क्षेत्रों की शैक्षिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई नए कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान उपस्थित लोगों की भावनाओं ने स्पष्ट कर दिया कि Pandit Rama Shankar Mishra केवल एक नाम नहीं, बल्कि एक आंदोलन थे—शिक्षा, सेवा और संस्कारों का आंदोलन। उनका जीवन इस बात का प्रमाण है कि दृढ़ इच्छाशक्ति और निस्वार्थ समर्पण से समाज में बड़ा परिवर्तन लाया जा सकता है।
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