बिहार

नीतीश कुमार पर प्रशांत किशोर का बड़ा हमला

क्या बिहार की राजनीति में नेतृत्व परिवर्तन की आहट है? क्या मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने और उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री को लेकर नई सियासी बहस छिड़ गई है? जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर ने इन मुद्दों पर तीखा हमला बोला है।

बिहार की राजनीति में इन दिनों हलचल तेज है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के संभावित रूप से राज्यसभा जाने और उनके बेटे निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री की चर्चाओं के बीच प्रशांत किशोर ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने दावा किया कि नीतीश कुमार अब शारीरिक और मानसिक रूप से मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारियां संभालने की स्थिति में नहीं हैं।

मीडिया से बातचीत में प्रशांत किशोर ने कहा कि उन्होंने पहले ही कहा था कि एनडीए की जीत के बावजूद नीतीश कुमार लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद पर नहीं रहेंगे। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भले ही औपचारिक रूप से इस्तीफा न दिया गया हो, लेकिन व्यवहारिक तौर पर वे अब केवल “कागजी मुख्यमंत्री” रह गए हैं।

पीके ने सवाल उठाते हुए कहा कि जब सरकार के पास 202 विधायकों का भारी बहुमत है, तो फिर मुख्यमंत्री दिल्ली जाकर राज्यसभा क्यों जाना चाहते हैं। उनके मुताबिक यह इस बात का संकेत है कि नीतीश कुमार खुद भी जानते हैं कि वे अब शासन चलाने की स्थिति में नहीं हैं।

नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार के राजनीति में आने की चर्चाओं पर प्रशांत किशोर ने उन्हें शुभकामनाएं दीं, लेकिन साथ ही वंशवाद को लेकर सवाल भी उठाए। उन्होंने कहा कि यह एक और उदाहरण है कि नेता अपने बच्चों के लिए राजनीतिक विरासत सुरक्षित करने की कोशिश करते हैं।

प्रशांत किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार जीवन भर वंशवाद के खिलाफ बोलते रहे, लेकिन अब उनके बेटे के राजनीति में आने की चर्चा हो रही है। उन्होंने बिहार की जनता से भी सवाल किया कि क्या उन्होंने अपने बच्चों के भविष्य के बारे में उतनी ही चिंता की है जितनी नेता अपने राजनीतिक उत्तराधिकार को लेकर करते हैं।

इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर वंशवाद और नेतृत्व को लेकर बहस तेज हो गई है।

Pratima Shukla

प्रतिमा शुक्ला डिजिटल पत्रकार हैं, पत्रकारिता में पीजी के साथ दो वर्षों का अनुभव है। पूर्व में लखनऊ से दैनिक समाचारपत्र में कार्य कर चुकी हैं। अब ई-रेडियो इंडिया में बतौर कंटेंट राइटर कार्य कर रहीं हैं।

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