पहलगाम हमले पर कविता
कायर बुझदिल पाकिस्तानी,
हरकत करते हो बचकानी।
मासूमों का रक्त बहाकर,
पियोगे सिन्धू का पानी।
मारा सबको धर्म पूछकर,
कर डाली तूने मनमानी।
आंखे भारत की रक्त तत्प् हैँ,
जीले थोड़ा सा ही वक्त है।
जब कहर हिन्द का बरसेगा,
तब पाक जान को तरसेगा।
तेरा तो अब सूर्य अस्त है,
न देखेगा तू भोर सुहानी।
-शिवाजी ‘वत्स’
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