राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के संस्थापक शरद पवार की पार्टी ने कांग्रेस को झटका दिया है। गिरफ्तारी और 30 दिन की हिरासत पर मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और प्रधानमंत्री को पद से हटाने के लिए लाए गए संविधान संशोधन विधेयक पर विचार के लिए बनी संयुक्त संसदीय समिति यानी जेपीसी में पवार की पार्टी शामिल होगी।
गौरतलब है कि बहुत इंतजार के बाद कांग्रेस ने सोमवार को ऐलान किया कि वह जेपीसी में शामिल नहीं होगी। उसने ममता बनर्जी, अखिलेश यादव, अरविंद केजरीवाल और लेफ्ट पार्टियों के दबाव में यह फैसला किया। इन पार्टियों ने पहले ही जेपीसी के बहिष्कार का ऐलान कर दिया था। कांग्रेस पहले चाहती थी कि विपक्ष जेपीसी में शामिल हो लेकिन अंत में वह दूसरी पार्टियों के साथ गई।
कांग्रेस जब जेपीसी में शामिल होने के पक्ष में थी तो शरद पवार ने उसका साथ दिया था। पवार का कहना था कि जेपीसी में शामिल होकर विपक्ष अपनी बात रख सकता है और कुछ चीजों को बदलवा सकता है। जब कांग्रेस ने पवार की बात मानने की बजाय दूसरी पार्टियों के फैसले का समर्थन किया तो पवार अलग हो गए।
बताया जा रहा है कि वे कांग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियों के फैसले के साथ नहीं जा रहे हैं। उनकी पार्टी जेपीसी में शामिल होगी। इससे ऐसा लग रहा है कि सरकार अब कांग्रेस और दूसरी बड़ी विपक्षी पार्टियों के बगैर भी जेपीसी का गठन करा देगी। ध्यान रहे पवार की बेटी सुप्रिया सुले ऑपरेशन सिंदूर के बाद विदेश भेजे गए डेलिगेशन का हिस्सा थीं और उन्होंने सरकार का खूब बचाव किया था।
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