Sitaram Singh Shikshan Sansthan ने नशा मुक्ति अभियान से किया जागरूक
Sitaram Singh Shikshan Sansthan त्रिकौलिया (शिवनगर) में शनिवार को एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें छात्र-छात्राओं ने नशे से दूर रहने और समाज को नशामुक्त बनाने का संकल्प लिया। Sitaram Singh Shikshan Sansthan द्वारा संचालित यह पहल सरकार की नशा मुक्ति योजना को जन-जन तक पहुंचाने का एक प्रभावी माध्यम बनी।
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं संस्थान के प्रबंधक प्रदेश उपाध्यक्ष नरसिंह बहादुर सिंह ने कहा कि नशा मानव जीवन का सबसे बड़ा सामाजिक दुष्परिणाम है, जो परिवार और समाज दोनों को अंदर से खोखला कर देता है। इस अवसर पर बच्चों ने जिम्मेदार नागरिक बनकर समाज को जागरूक करने का वचन लिया।
कार्यक्रम की शुरुआत Sitaram Singh Shikshan Sansthan के प्रबंधक नरसिंह बहादुर सिंह द्वारा दीप प्रज्ज्वलन और शपथ ग्रहण के साथ हुई। उन्होंने छात्रों से कहा कि नशा एक ऐसा घातक जाल है जिसमें फंसकर युवा पीढ़ी अपना भविष्य नष्ट कर रही है। उन्होंने धूम्रपान को जीवन के लिए घातक बताते हुए नशा मुक्ति का संकल्प दिलाया।
बच्चों ने हाथ उठाकर दोहराया कि वे अपने जीवन में कभी भी सिगरेट, शराब, तंबाकू, ड्रग्स या किसी भी प्रकार का नशा नहीं करेंगे और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करेंगे। Sitaram Singh Shikshan Sansthan में आयोजित इस जागरूकता अभियान ने छात्रों के भीतर आत्मबल और सामाजिक चेतना का संचार किया।
Sitaram Singh Shikshan Sansthan ने न केवल एक शैक्षणिक संस्थान के रूप में, बल्कि सामाजिक परिवर्तन के केंद्र के रूप में अपनी पहचान बनाई है। बच्चों ने नशे के दुष्प्रभावों पर पोस्टर, स्लोगन और भाषण प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि नशा व्यक्ति की सोचने-समझने की क्षमता को खत्म कर देता है और उसे सामाजिक अपराधों की ओर धकेलता है।
संस्थान के प्रबंधक ने कहा कि नशे की शुरुआत अक्सर जिज्ञासा या दोस्तों के दबाव से होती है, लेकिन धीरे-धीरे यह लत में बदल जाती है। उन्होंने डिजिटल नशे पर भी चिंता जताते हुए कहा कि मोबाइल और इंटरनेट का अधिक इस्तेमाल भी युवाओं को मानसिक रूप से निर्भर बना रहा है। ऐसे में Sitaram Singh Shikshan Sansthan ने छात्रों को डिजिटल डिटॉक्स अपनाने की भी सलाह दी।
कार्यक्रम में बताया गया कि नशा चाहे शराब का हो, सिगरेट का, तंबाकू, ड्रग्स या डिजिटल अडीक्शन—यह सभी एक ही श्रेणी में आते हैं। यह व्यक्ति के शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक और भावनात्मक संतुलन को नष्ट कर देता है। आंकड़ों के अनुसार, नशे की लत से सबसे अधिक प्रभावित युवा वर्ग होता है, जो राष्ट्र का भविष्य है। यदि यह पीढ़ी सुरक्षित नहीं होगी, तो देश की प्रगति रुक जाएगी।
Sitaram Singh Shikshan Sansthan के इस प्रयास ने यह संदेश दिया कि शिक्षा केवल पुस्तक ज्ञान तक सीमित नहीं बल्कि जीवन को सही दिशा देने का माध्यम है।
Sitaram Singh Shikshan Sansthan के विद्यार्थियों ने संकल्प लिया कि वे गांव-गांव जाकर, मोहल्लों में, घर-परिवारों में नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाएंगे। उन्होंने अपने पोस्टरों में लिखा – “नशा छोड़ो, जीवन जोड़ो”, “नशा करता नाश”, और “स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ समाज की नींव होती है”। संस्थान की इस पहल से यह स्पष्ट हुआ कि यदि विद्यार्थी जागरूक हो जाएं तो समाज परिवर्तन की दिशा स्वतः बन जाती है।
प्रबंधक नरसिंह बहादुर सिंह ने कहा कि सरकार अकेले इस अभियान को सफल नहीं बना सकती। जब तक समाज के हर नागरिक, हर संस्था और हर परिवार की भागीदारी नहीं होगी, तब तक नशा मुक्ति सिर्फ एक अभियान बनकर रह जाएगा।
Sitaram Singh Shikshan Sansthan ने इस जिम्मेदारी को स्वीकार करते हुए यह सिद्ध कर दिया कि शिक्षा का मूल उद्देश्य चरित्र निर्माण और समाज निर्माण ही है। इस अभियान में शिक्षकों ने भी छात्रों को बताया कि नशे की लत लगने के बाद उसका उपचार कठिन होता है, इसलिए इससे बचाव ही सबसे बड़ा उपाय है।
अंत में, पूरे कार्यक्रम का मुख्य संदेश यह था कि भारत को विश्व गुरु बनाने के लिए सबसे पहले उसे नशा मुक्त बनाना होगा। Sitaram Singh Shikshan Sansthan के इस अभियान ने समाज में एक नई उम्मीद जगाई है। बच्चों ने सामूहिक रूप से ‘नशामुक्त भारत’ का संकल्प दोहराया और इस अभियान को गांव के हर घर तक पहुंचाने का निश्चय किया।
Sitaram Singh Shikshan Sansthan की यह जागरूकता पहल न केवल संस्थान तक सीमित है, बल्कि यह पूरे समाज के लिए मार्गदर्शक सिद्ध हो सकती है। इस प्रकार के आयोजन युवाओं को सही दिशा प्रदान करते हैं और उन्हें सकारात्मक व राष्ट्रनिर्माण की सोच से जोड़ते हैं।
यदि देश का युवा सशक्त होगा, तभी देश का भविष्य उज्ज्वल होगा—और यह संकल्प आज Sitaram Singh Shikshan Sansthan के बच्चों ने मजबूती से लिया है।
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