Sunbeam Eye Hospital Sultanpur: समोधपुर में नि:शुल्क नेत्र शिविर का सफल आयोजन
Sunbeam Eye Hospital Sultanpur ने एक बार फिर अपनी सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए ग्राम पंचायत समोधपुर में नि:शुल्क नेत्र शिविर का आयोजन किया, जिसमें 12 मरीजों में मोतियाबिंद की पुष्टि हुई और उन्हें अस्पताल की एम्बुलेंस से सुल्तानपुर रवाना किया गया। सुइथाकला/शाहगंज क्षेत्र के समोधपुर न्याय पंचायत भवन में आयोजित इस शिविर में हर वर्ष की तरह इस बार भी सैकड़ों ग्रामीणों ने अपनी आंखों की जांच कराई। Sunbeam Eye Hospital Sultanpur के विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. विनोद चौहान (MBBS, नेत्र सर्जन) के नेतृत्व में पूरी टीम ने न केवल जांच की, बल्कि चयनित मरीजों का नि:शुल्क ऑपरेशन, दवा, भोजन और आने-जाने का पूरा खर्च वहन करने का वादा किया। अस्पताल स्टाफ जितेंद्र कुमार दीक्षित ने बताया कि सभी 12 मरीजों का ऑपरेशन पूरी तरह मुफ्त होगा और उन्हें कोई शुल्क नहीं देना पड़ेगा। यह शिविर ग्रामीण क्षेत्रों में नेत्र स्वास्थ्य जागरूकता और उपचार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।
Sunbeam Eye Hospital Sultanpur द्वारा हर वर्ष समोधपुर न्याय पंचायत भवन में आयोजित होने वाला यह नेत्र शिविर अब क्षेत्र की एक मजबूत परंपरा बन चुका है। अस्पताल की यह पहल दूर-दराज के गांवों में रहने वाले उन लोगों तक पहुंच बनाने का माध्यम है, जो आर्थिक तंगी या जागरूकता की कमी के कारण नेत्र उपचार से वंचित रह जाते हैं। इस बार शिविर सुबह 9 बजे से शुरू हुआ और दोपहर 3 बजे तक चला, जिसमें आसपास के गांवों जैसे सुइथाकला, शाहगंज, कादीपुर और अन्य क्षेत्रों से 150 से अधिक लोग पहुंचे। Sunbeam Eye Hospital Sultanpur की टीम में डॉ. विनोद चौहान के अलावा पैरामेडिकल स्टाफ, ऑप्टोमेट्रिस्ट और काउंसलर शामिल थे, जिन्होंने हर मरीज की आंखों की विस्तृत जांच की।
शिविर में आंखों की रोशनी की जांच, रिफ्रैक्शन टेस्ट, मोतियाबिंद स्क्रीनिंग और अन्य सामान्य नेत्र रोगों की पहचान की गई। अस्पताल के स्टाफ जितेंद्र कुमार दीक्षित ने बताया कि जांच में पाए गए 12 मरीजों में से सभी में परिपक्व मोतियाबिंद (mature cataract) पाया गया, जिसके कारण उनकी दृष्टि काफी कम हो चुकी थी।
इन मरीजों में 60 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों की संख्या सबसे अधिक थी, लेकिन दो मरीज 50 वर्ष से कम आयु के भी थे। Sunbeam Eye Hospital Sultanpur की यह विशेषता है कि वह न केवल जांच करता है, बल्कि चयनित मरीजों को अस्पताल तक लाने, ऑपरेशन करने, पोस्ट-ऑपरेटिव केयर और वापस घर छोड़ने की पूरी जिम्मेदारी लेता है। एम्बुलेंस में मरीजों को ले जाते समय उनके परिजनों को भी साथ जाने की सुविधा दी गई, ताकि वे अस्पताल में रुक सकें।
शिविर स्थल पर अस्पताल द्वारा मुफ्त चाय, बिस्किट और पानी की व्यवस्था की गई थी। ग्रामीणों ने बताया कि शहर जाना उनके लिए मुश्किल होता है, लेकिन Sunbeam Eye Hospital Sultanpur का यह शिविर उनके दरवाजे पर ही सेवाएं लेकर आता है।
एक मरीज रामलखन (65 वर्ष) ने कहा, “मेरी आंखों से धुंधला दिखता था, अब अस्पताल फ्री में ऑपरेशन करेगा, यह भगवान का काम है।” इसी तरह, एक महिला मरीज सुशीला देवी (58 वर्ष) ने बताया कि उन्हें पहले मोतियाबिंद के बारे में पता ही नहीं था, लेकिन शिविर में जांच के बाद अब उम्मीद जगी है। Sunbeam Eye Hospital Sultanpur की इस पहल से न केवल नेत्र रोगों का समय पर उपचार हो रहा है, बल्कि अंधता की रोकथाम भी हो रही है।
Sunbeam Eye Hospital Sultanpur के मुख्य नेत्र सर्जन डॉ. विनोद चौहान की अगुवाई में होने वाले ये ऑपरेशन विश्वस्तरीय तकनीक से लैस हैं। अस्पताल में फेकोइमल्सीफिकेशन (Phacoemulsification) तकनीक से मोतियाबिंद ऑपरेशन किया जाता है, जिसमें छोटा चीरा लगाकर लेंस को तोड़ा जाता है और नया फोल्डेबल लेंस डाला जाता है।
यह तकनीक न केवल सुरक्षित है, बल्कि मरीज को उसी दिन या अगले दिन डिस्चार्ज भी कर दिया जाता है। डॉ. चौहान ने बताया कि समोधपुर से आए 12 मरीजों का ऑपरेशन अगले दो दिनों में पूरा कर लिया जाएगा। हर मरीज को अलग-अलग समय दिया जाएगा ताकि पोस्ट-ऑपरेटिव देखभाल में कोई कमी न रहे।
Sunbeam Eye Hospital Sultanpur में ऑपरेशन थियेटर पूरी तरह स्टरलाइज्ड और आधुनिक उपकरणों से सुसज्जित है। मरीजों को ऑपरेशन से पहले पूरी जांच, ब्लड प्रेशर, शुगर टेस्ट और ईसीजी किया जाता है। ऑपरेशन के बाद मरीजों को नि:शुल्क दवाएं, चश्मा और 15 दिन तक फॉलो-अप के लिए बुलाया जाता है।
अस्पताल की एम्बुलेंस फिर से मरीजों को घर छोड़ने आएगी। डॉ. चौहान ने बताया कि पिछले वर्ष भी समोधपुर शिविर से 15 मरीजों का सफल ऑपरेशन किया गया था, और इस वर्ष भी यही लक्ष्य है। Sunbeam Eye Hospital Sultanpur की यह टीम साल भर में 50 से अधिक नि:शुल्क शिविर आयोजित करती है, जिसमें अब तक 5000 से अधिक मोतियाबिंद ऑपरेशन हो चुके हैं।
ऑपरेशन पूरी तरह नि:शुल्क होने के बावजूद गुणवत्ता में कोई समझौता नहीं किया जाता। अस्पताल द्वारा आयातित फोल्डेबल लेंस का उपयोग किया जाता है, जो मरीज की आंख में lifelong रहता है। स्टाफ जितेंद्र कुमार दीक्षित ने बताया कि मरीजों के खाने-पीने की व्यवस्था अस्पताल के कैंटीन से की जाती है, जिसमें सुबह नाश्ता, दोपहर भोजन और शाम चाय शामिल है।
परिजनों के लिए भी मुफ्त भोजन की सुविधा है। यह व्यवस्था इसलिए की जाती है ताकि ग्रामीण मरीजों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। Sunbeam Eye Hospital Sultanpur की इस मानवीय पहल की क्षेत्र में काफी सराहना हो रही है।
Sunbeam Eye Hospital Sultanpur का यह नेत्र शिविर न केवल चिकित्सीय सेवा है, बल्कि ग्रामीण स्वास्थ्य जागरूकता का बड़ा माध्यम भी बन गया है। शिविर में लोगों को मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी बीमारियों के बारे में जानकारी दी गई। ब्रोशर और पोस्टर के माध्यम से स्वच्छता, पौष्टिक आहार और नियमित जांच का महत्व बताया गया। बच्चों के लिए आंखों की देखभाल संबंधी काउंसलिंग सेशन भी आयोजित किया गया।
शिविर के दौरान ग्राम प्रधान और स्थानीय नेताओं ने अस्पताल प्रबंधन की प्रशंसा की। समोधपुर के प्रधान राम प्रसाद यादव ने कहा, “Sunbeam Eye Hospital Sultanpur जैसी संस्थाएं ही समाज का असली विकास करती हैं।” अस्पताल की योजना अगले महीने शाहगंज और कादीपुर में भी शिविर लगाने की है। डॉ. विनोद चौहान ने बताया कि वर्ष 2026 में 100 शिविरों का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें 2000 मोतियाबिंद ऑपरेशन नि:शुल्क किए जाएंगे।
Sunbeam Eye Hospital Sultanpur ने न केवल उपचार दिया, बल्कि उम्मीद भी जताई। 12 मरीज जो अंधेरे में जी रहे थे, अब जल्द ही रोशनी की दुनिया में वापस आएंगे। यह शिविर साबित करता है कि सही इरादे और समर्पण से ग्रामीण भारत को स्वस्थ बनाया जा सकता है। अस्पताल की यह यात्रा जारी रहेगी, और समोधपुर जैसे गांवों में रोशनी बिखेरती रहेगी।
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