उत्तर प्रदेश

भूमिगत जल का दोहन से हो रहा विनाश

  • लखनऊ

देश में आज जल संकट है। यूपी के 74 ब्लाकों में तत्काल भूजल प्रबंधन की आवश्यकता है। वर्ष 2004 से लगातार इन विकासखंडों की स्थिति गंभीर बनी हुई है। यहां भूजल दोहन व रीचार्ज के लिए विज्ञान आधारित नियम तय करने की जरूरत है। ये बातें उत्तर प्रदेश भूजल विभाग के पूर्व वरिष्ठ जियो-हाइड्रोलाजिस्ट आरएस सिन्हा ने अपनी पुस्तक स्टेट आफ ग्राउंड वाटर इन उत्तर प्रदेश के विमोचन के दौरा

न कहीं। वह भूजल सप्ताह के अवसर पर वाटरएड इंडिया, विज्ञान फाउंडेशन ग्राउंड वाटर एक्शन ग्रुप की ओर से शुक्रवार को आयोजित वेबिनार में बोल रहे थे। भूजल विभाग के पूर्व निदेशक अशोक कुमार ने कहा कि खेती के लिए गैर वैज्ञानिक तरीके से भूमिगत जल का दोहन विनाश की तरफ ले जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के 40 से 45 जिले आर्सेनिक से प्रभावित हैं। कुछ स्थानों पर नाइट्रेट, फ्लोराइड व मानव जनित प्रदूषण बहुत अधिक है। सेंट्रल ग्राउंड वाटर बोर्ड के कार्यवाहक क्षेत्रीय निदेशक पीके त्रिपाठी ने बताया कि वर्ष 2020 से ही रिसार्ट मैपिंग का असेसमेंट आनलाइन किया जा रहा है, जो कि प्रत्येक दो वर्ष में दोहराया जाएगा।

बीआर चौरसिया ने बताया कि पानी की समस्या वर्ष 2000 के बाद प्रारंभ हुई। वर्ष 2008 में क्लाइमेट चेंज के कारण पूरी दुनिया को बुरे परिणामों का सामना करना पड़ा। आस्टिया के इंटरनेशनल एटामिक एनर्जी एजेंसी के सेवानिवृत्त प्रोफेशनल स्टाफ व सलाहकार डा. भीष्म कुमार ने कहा कि यदि एडवांस तकनीकी का प्रयोग करके सही आंकड़ों को इकट्ठा करें तो क्षेत्र विशेष के लिए सही नीति बन सकेगी। वाटरएड इंडिया के क्षेत्रीय प्रबंधक फारुख रहमान खान ने भी विचार व्यक्त किए।

जल प्रकृति की अनमोल धरोहर, न करें बर्बाद: डा. महेंद्र सिंह: जलशक्ति मंत्री डा. महेंद्र सिंह ने शुक्रवार को भूजल सप्ताह का शुभारंभ किया। अपने सरकारी आवास पांच-ए माल एवेन्यू से वर्चुअल माध्यम से इसकी शुरुआत की। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जल प्रकृति की अनमोल धरोहर है, इसे बर्बाद न करें।

भावी पीढ़ी को शुद्ध पेयजल मिले इसके लिए हमें पानी की हर एक बूंद को बचाना होगा। उन्होंने भूजल के अंधाधुंध दोहन पर चिंता जताई। डा. सिंह ने कहा कि बेहतर भूजल प्रबंधन के लिए सभी विभागों को एक साथ मिलकर काम करना होगा। सरकारी व अद्र्ध सरकारी कार्यालयों व शिक्षण संस्थानों में रूफटाफ रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्रणाली को अनिवार्य रूप से अपनाना होगा।

Neha Singh

नेहा सिंह इंटर्न डिजिटल पत्रकार हैं। अनुभव की सीढ़ियां चढ़ने का प्रयत्न जारी है। ई-रेडियो इंडिया में वेबसाइट अपडेशन का काम कर रही हैं। कभी-कभी एंकरिंग में भी हाथ आजमाने से नहीं चूकतीं।

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