लाइफस्टाइल

महिला जगत: बढऩे लगी है विवाह की उम्र

हर समय इधर-उधर की गासिप में ही जीवन बर्बाद करने वाली पूनम का पहला शगल था मोहल्ले की अविवाहिताओं या कुंवारियों की काउंटिंग करना। अपने जैसी ही अपनी परमप्रिय सखी पायल के साथ बैठकर वह यही सब डिस्कस करती। अरे पायल तुम्हें पता है मिसेज माथुर अपनी लड़की के लिए क्यों हाथ पर हाथ धरे बैठी हैं? ऑफिस में उसका चक्कर एक शादीशुदा मर्द के साथ चल रहा है। मां-बेटी उसका तलाक करवाने में जुटी हुई हैं।

दरअसल बात सही भी थी। मिसेज माथुर की लड़की जब तीस पार कर गई, तब जाकर मां-बाप को बेटी के ब्याह की चिंता होने लगी। अभी तक तो वे उसकी मोटी तनख्वाह लेकर खुश थे और इसी खुशी में अपना कर्तव्य भी भुला बैठे थे। समय पर विवाह न होने पर उनकी बेटी स्वाति एक विवाहित पुरुष से दिल लगा बैठी।

अर्चना शुरू से मेधावी छात्रा रही थी। उसे पढऩे की इतनी लगन थी कि उसने डबल फिर ट्रिपल एम.ए. विभिन्न विषयों को लेकर किया। साथ में फ्रैंच, जर्मन लैंग्वेज भी सीखती रही। मां-बाप जब भी शादी का जिक्र करते वह कहती मुझे अपने से ज्यादा क्वालिफाइड लड़का चाहिए। मां-बाप ने सोच लिया, न नौ मन तेल होगा न राधा नाचेगी। इतना क्वालिफाइड लड़का वे नहीं ढूंढ़ पाए। वर्षा को कैरियर बनाने की धुन थी। एम.बी.ए. करके वह स्टेट्स चली गई, जहां उसके लिए असीमित अवसर थे। पढ़ी-लिखी लड़की को मां-बाप आखिर ब्याह के लिए फोर्स तो कर नहीं सकते थे। पांच भाई-बहनों में वंदना सबसे बड़ी थी।

वह इंजीनियरिंग के अंतिम वर्ष में थी, जब उसके पापा हार्ट फेल से गुजर गए। मामूली नौकरी होने के कारण उन्हें पी.एफ., ग्रेच्युटी आदि का ज्यादा पैसा नहीं मिला। कुछ वो पहले ही लोन ले चुके थे। कुल मिलाकर उनकी आर्थिक हालत बहुत खस्ता थी। मां ज्यादा पढ़ी-लिखी नहीं थी। भाई-बहनों की जिम्मेदारी अब वंदना के कंधों पर थी। ऐसे में वह विवाह के बारे में सोच भी कैसे सकती थी। उसकी पढ़ाई काम आई और एक-एक कर उसने सब भाई-बहनों को अच्छी तरह सेटल कर दिया। लेकिन अब उसका सोचना था विवाह की उम्र निकल गई है। अब इस उम्र में विवाह किया तो लोग क्या कहेंगे।

सबकी सोच वंदना जैसी नहीं होती। आज ऐसी महिलाओं की कमी नहीं, जिनके लिए शादी की कोई उम्र नहीं होती यानी कि जवानी में कदम रखने के बाद ‘एनी टाइम। बच्चा पैदा करने की उम्र निकल जाए तब भी ? शालिनी ने अपनी मॉडल सखी प्रिया से उपर्युक्त विषय पर बहस करते हुए पूछा- एंड व्हाई नॉट। भई, बच्चा गोद भी तो लिया जा सकता है। प्रेगनेंसी के झंझट से बचेंगे और कैरियर भी बना लेंगे तब तक।

अब तो विदेशों में भी लोग बच्चे खूब गोद लेने लगे हैं। प्रिया ने तर्क दिया। शालिनी कनविंस नहीं हो पाई थी उसका कहना था बड़ी उम्र होते-होते आइडियाज सेट हो जाते हैं। एक तरह से व्यक्ति असहिष्णु होने लगता है ऐसे में पति-पत्नी का एक-दूसरे के साथ तालमेल बिठा पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। प्रिया का इस पर जवाब था बड़ी उम्र में विवाह के फायदे ही फायदे हैं। पति-पत्नी का बौद्धिक स्तर एक-सा होता है, इससे उनमें सहभागिता ज्यादा रहती है। अपने व्यक्तिगत मामले वे स्वयं निपटाने में समक्ष रहते हैं, उन्हें किसी और की सहायता की जरूरत नहीं पड़ती। बहरहाल, तर्क का क्या हर बात का पक्ष-विपक्ष निकल आता है।

लेकिन जो शाश्वत सत्य है उसे नहीं झुठलाया जा सकता। यूं अपनी सुविधा देखते हुए गलत को सही ठहरा लिया जाए। मेडिकली देखा जाए तो लड़कियां अठारह बरस और लड़के इक्कीस बरस के होने पर विवाह योग्य हो जाते हैं। दो-चार साल में बच्चे होने पर वे उनके कार्यकाल में ही सेटल हो जाते हैं। बड़ी उम्र में बच्चा पैदा करना रिस्की होता है। किंतु घर में माता-पिता के बीच सामंजस्य न होना, उनके बीच हर समय का टेंशन, लड़ाई-झगड़ा, तलाक हो जाना या फिर बहुओं पर ससुरालियों का अत्याचार, सेक्स को लेकर कुंठाएं कुछ ऐसे कारण हैं जो युवक-युवतियों को विवाह टालते रहने या न करने पर बाध्य कर सकते हैं।

लेकिन क्या ऐसे लाखों दंपति नहीं जो वैवाहिक जीवन सुखपूर्वक जी रहे हैं? स्वस्थ नॉर्मल रहने के लिए विवाह ही एकमात्र रास्ता है, इसमें दो राय नहीं होनी चाहिए। ये तो सदियों से आजमायी हुई रीत है और विवाह भी समय पर उचित रहता है, न बाल विवाह न अधेड़ावस्था के विवाह। जब यौवन अपने चरम पर होता है तभी विवाह का भरपूर आनंद उठाया जा सकता हैं।

Neha Singh

नेहा सिंह इंटर्न डिजिटल पत्रकार हैं। अनुभव की सीढ़ियां चढ़ने का प्रयत्न जारी है। ई-रेडियो इंडिया में वेबसाइट अपडेशन का काम कर रही हैं। कभी-कभी एंकरिंग में भी हाथ आजमाने से नहीं चूकतीं।

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