प्रदेश सरकार ने लाॅकडाउन अवधि में 14.6 करोड़ों लोगों को अब तक पांच चरणों में 36.40 लाख मिलट्रिक टन खाद्यान्न का किया वितरण

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  • फाईज़ अली सैफी, ई-रेडियो इंडिया

गाज़ियाबाद। कोरोना वायरस के फैलने से पूरा देश लॉकडाउन हो गया। यह महामारी ऐसे समय फैली कि आम व्यक्ति इसके लिए तैयार नहीं था। लोगों का जीवन सामान्य गति से चल रहा था। हमारे देश में बड़ी संख्या में लोग विभिन्न उद्यम करके दैनिक आमदनी से अपनी जीविका चलाते हैं। कोविड-19 के कारण आमजन सुरक्षित रहे और यह वायरस अन्य लोगों में फैलने ना पाए इसी को दृष्टिगत रखते माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश को संबोधित करते हुए कहा था कि हमें जान भी चाहिए और जहान भी चाहिए। माननीय प्रधानमंत्री की बात को ध्यान में रखते हुए पूरे देश के सभी लोगों ने लॉकडाउन का पूरा पालन किया। सभी तरह की मशीनरी बंद हो गई। प्रधानमंत्री को यह जानकारी थी कि देश में बड़ी संख्या दैनिक आमदनी पर निर्भर है। इसलिए उन्होंने पूरे देश के गरीबों दैनिक मजदूरों आदि के लिए आत्मनिर्भर भारत योजना एवं प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत देश की जनता में खाद्यान्न वितरित करने की व्यवस्था की।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लाॅकडाउन के तहत गरीबों, श्रमिकों, आमजन को सार्वजनिक खाद्यान्न वितरण प्रणाली को सुदृढ़ करते हुए प्रदेश के सभी जरूरतमंद लोगों को खाद्यान्न उपलब्ध करा रहे हैं। मुख्यमंत्री का ध्येय है कि पूरे प्रदेश में कोई व्यक्ति भूखा ना रहे, सभी जरूरतमंदों को खाद्यान्न वितरित किया जाए। जिन परिवारों के राशन कार्ड है या जिनके पास नहीं है, ऐसें सभी पात्रों को खाद्यान्न वितरित किया गया। प्रदेश में अन्य प्रदेशों के वापस आए श्रमिकोंध्कामगारों को भी खाद्यान्न वितरित किया जा रहा है। प्रधानमंत्री घोषणा के क्रम में प्रदेश में आत्मनिर्भर भारत योजनान्तर्गत ऐसें प्रत्येक प्रवासीध्अवरूध्द प्रवासी को जो राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के अंतर्गत आच्छादित नहीं है, उन्हें 3 किलोग्राम गेहूं 2 किलोग्राम चावल प्रति यूनिट की दर से तथा प्रति परिवार 1 किलो ग्राम चना निशुल्क वितरित किया जा रहा है। सरकार की इस योजना से लाखों श्रमिकों कामगारों को लाभ मिला है। उन्हें निशुल्क खाद्यान्न वितरित करते हुए खाद्य सुरक्षा प्रदान की जा रही है।

प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत निशुल्क 5 किलोग्राम चावल प्रति यूनिट व निशुल्क 1 किलो ग्राम चना प्रति कार्ड के हिसाब से वितरित करने की व्यवस्था की है। प्रदेश सरकार ने प्रदेश में अब तक 14.6 करोड़ लोगों को 5 चरणों में वितरण में 36.40 लाख मेट्रिक टन खाद्यान्न का वितरण किया है। 20 जून 2020 से छठे चरण का खाद्यान्न वितरित होगा।

प्रदेश के मुख्यमंत्री के निशुल्क नेतृत्व का ही परिणाम है कि प्रदेश के किसी कोने से ऐसी कोई समस्या नहीं आई कि किसी गरीब, असहाय, श्रमिक को खाद्यान्न ना मिला हो। लॉकडाउन के समय सभी जरूरतमंदों को खाद्यान्न दिया गया और दिया जा रहा है। यदि किसी व्यक्तिध्परिवार के पास राशन कार्ड नहीं है फिर भी उसे राशन दिया गया। खाद्य एवं रसद विभाग द्वारा 1 मई से लागू किए गए राष्ट्रीय राशन पोर्टेबिलिटी के तहत 8.64 लाख अन्तःजनपदीय एवं 63,503 से अधिक अंतर्जनपदीय लाभार्थियों ने राज्यस्तरीय पोर्टेबिलिटी का लाभ उठाया है। हरियाणा गुजरात कर्नाटक महाराष्ट्र राजस्थान तेलंगाना मध्य प्रदेश आदि राज्यों के श्रमिकोंध्कामगारों को भी खाद्यान्न वितरित किया गया। प्रदेश सरकार द्वारा दिव्यांगजनों, निशक्तजनों तथा हॉटस्पॉट एरिया जहां पूर्ण लॉकडाउन है, उन क्षेत्रों के परिवारों को राशन की होम डिलीवरी की जा रही है। हर क्षेत्र, हर वर्ग के लोगों को राशन दिया जा रहा है।

लाॅकडाउन के दौरान बहुत से ऐसे परिवार श्रमिक गरीब और नि:सहाय लोग थे, प्रदेश सरकार ने प्रदेश के सभी जनपदों में कम्युनिटी किचन की व्यवस्था की जिसके माध्यम से गांव में खाना बनाकर परिवारों, श्रमिकों को बना बनाया भोजन आपूर्ति किया गया। प्रदेश में कम्युनिटी किचन के माध्यम से 6.50 करोड़ से अधिक भोजन पैकेट लोगों के मध्य से वितरित किया गया। प्रदेश सरकार को अदनान महामारी के प्रसार को रोकने के लिए प्रदेश के समस्त जनपदों में अन्य प्रदेशों से आने वाले श्रमिकोंध्कामगारों को प्रवास के लिए विभिन्न क्वारंटाइन सेंटर एवं ट्रांजिट कैंप बनाए गए, जहां वहां निवासी है। ऐसें लोगों को विशेष सतर्कता बरतते हुए अनुमन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति उसी सेंटर में की जा रही है ताकि लाभार्थियों के सुगमतापूर्वक इस योजना का लाभ प्राप्त हो जाए और उन्हें उचित दर की दुकानों पर ना जाना पड़े।

कोविड-19 के कारण हुए लॉकडाउन के दौरान प्रदेश सरकार की सुदृढ़ सुव्यवस्थित वितरण प्रणाली के कारण ही प्रदेश के गांवों कस्बों और नगरों में हर जरूरतमंद को खाद्यान्न लगातार मिल रहा है। उत्तर प्रदेश के श्रमिक कामगार जो देश के अन्य प्रदेशों से आए हैं, उन्हें प्रदेश सरकार सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा और खाद्य सुरक्षा मुहैया करा रही हैं।

प्रदेश के मुख्यमंत्री के निर्देश के क्रम में जिनके पास राशन कार्ड नहीं है अथवा राशन कार्ड मिलने में देरी हो रही है, ऐसे लोगों को ग्राम प्रधान पंचायत निधि से 1,000 रुपए दे रहे हैं। इसके लिए पंचायती राज विभाग द्वारा बजट जारी कर दिया गया हैं। मुख्यमंत्री ने नए राशन कार्ड बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

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