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    मेरठ प्रेस क्लब का सुनहरा ख्वाब
    • राजेश शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार

    मेरठ प्रेस क्लब का पिछले चौदह वर्षों से यहां के लोग इंतजार कर रहे हैं। चूंकि यहां पर पत्रकारिता की एकजुटता प्रदर्शित न होने पाये इस वजह से शासन-प्रशासन व अन्य संबंधित लोग इसको नजरअंदाज कर रहे हैं।

    पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, जो समाज को सच्चाई से रूबरू कराता है और जनहित के मुद्दों को उजागर करता है। एक सशक्त पत्रकारिता के लिए आवश्यक है कि पत्रकारों को उचित सुविधाएं और एकजुटता का वातावरण मिले। इसी उद्देश्य से मेरठ के वरिष्ठ पत्रकार—दिनेश चन्द्रा, रवि शर्मा, मुकेश गोयल, अशोक गोस्वामी सहित कई अन्य पत्रकार साथी मेरठ में प्रेस क्लब की स्थापना के लिए संघर्ष-रत हैं। यह केवल एक भवन का निर्माण नहीं, बल्कि पत्रकारिता के स्वाभिमान और स्वतंत्रता की दिशा में एक बड़ा कदम है।

    मेरठ प्रेस क्लब: एक ज़रूरत, एक अधिकार

    मेरठ प्रेस क्लब केवल पत्रकारों के मिलने-जुलने का स्थान नहीं होता, बल्कि यह एक ऐसा मंच होता है, जहाँ वे अपनी समस्याओं को साझा कर सकते हैं, अपने पेशेवर विकास के लिए सेमिनार और वर्कशॉप आयोजित कर सकते हैं और एकजुट होकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को और अधिक मजबूती से निभा सकते हैं। मेरठ जैसे ऐतिहासिक और तेजी से विकसित हो रहे शहर में एक मेरठ प्रेस क्लब का न होना न केवल पत्रकारों के लिए, बल्कि पूरे मीडिया जगत के लिए एक बड़ी कमी है।

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    मेरठ प्रेस क्लब के लिये संघर्ष की अगुवाई कर रहे दिग्गज पत्रकार

    मेरठ मीडिया जगत के प्रतिष्ठित नामों ने इस मुहिम को आगे बढ़ाया है। दिनेश चन्द्रा, जो अपनी निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं, इस आंदोलन को मजबूती प्रदान कर रहे हैं। रवि शर्मा और मुकेश गोयल, जिन्होंने वर्षों से मीडिया के क्षेत्र में अपनी गहरी पकड़ बनाई है, पत्रकारों की आवश्यकताओं को समझते हुए इसे आगे बढ़ा रहे हैं। अशोक गोस्वामी और विनोद गोस्वामी भी इस पहल में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, ताकि पत्रकारों को एक ऐसा मंच मिल सके, जहाँ वे अपनी कार्यक्षमता को और अधिक प्रभावी बना सकें।

    पत्रकारों की चुनौतियाँ और मेरठ प्रेस क्लब की आवश्यकता

    आज के समय में पत्रकार कई चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। निष्पक्ष रिपोर्टिंग के दौरान उन्हें विभिन्न दबावों का सामना करना पड़ता है। कभी प्रशासनिक बाधाएँ, कभी राजनीतिक हस्तक्षेप, तो कभी आर्थिक अस्थिरता—इन सभी समस्याओं से जूझते हुए भी पत्रकार अपने कर्तव्यों को निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ते। ऐसे में मेरठ प्रेस क्लब की स्थापना से न केवल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित होगी, बल्कि उन्हें अपने अधिकारों के लिए सामूहिक रूप से आवाज उठाने का अवसर भी मिलेगा।

    एकजुटता से आएगा बदलाव बनेगा मेरठ प्रेस क्लब

    मेरठ प्रेस क्लब की स्थापना केवल पत्रकारों के लिए ही नहीं, बल्कि समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम होगा। एक संगठित पत्रकार समुदाय न केवल पत्रकारिता को मजबूत करेगा, बल्कि आम जनता की आवाज को भी अधिक प्रभावी ढंग से सरकार और प्रशासन तक पहुँचाने में सक्षम होगा।

    इस संघर्ष में सभी पत्रकारों की भूमिका महत्वपूर्ण है। यह समय है जब सभी पत्रकार साथी एक साथ खड़े होकर इस मांग को मजबूती से रखें और सरकार व प्रशासन से इसे जल्द से जल्द साकार करने की अपील करें। यह संघर्ष केवल कुछ लोगों का नहीं, बल्कि पूरे मीडिया जगत का है।

    हम सबकी जिम्मेदारी

    मेरठ प्रेस क्लब की स्थापना के लिए चल रहे इस आंदोलन को और अधिक बल देने के लिए सभी पत्रकारों और सामाजिक संगठनों को एकजुट होकर आगे आना होगा। यह केवल एक भवन बनाने की बात नहीं, बल्कि पत्रकारिता की गरिमा और स्वतंत्रता को बनाए रखने की पहल है।

    पत्रकारिता को और अधिक मजबूत बनाने के लिए मेरठ प्रेस क्लब की स्थापना अत्यंत आवश्यक है। यह समय है कि हम सभी इस आंदोलन का हिस्सा बनें और इस प्रयास को सफल बनाकर एक नई शुरुआत करें।

    “संगठन में शक्ति होती है, और जब पत्रकार संगठित होंगे, तो पत्रकारिता का भविष्य और अधिक उज्ज्वल होगा।”

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    editor

    पत्रकारिता में बेदाग 11 वर्षों का सफर करने वाले युवा पत्रकार त्रिनाथ मिश्र ई-रेडियो इंडिया के एडिटर हैं। उन्होंने समाज व शासन-प्रशासन के बीच मधुर संबंध स्थापित करने व मजबूती के साथ आवाज बुलंद करने के लिये ई-रेडियो इंडिया का गठन किया है।
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