मेरठ। दिगंबर जैन समाज के महापर्व दस लक्षण पर्व का शुभारंभ गुरुवार को आनंदपुरी स्थित दिगंबर जैन मंदिर में धूमधाम के साथ हुआ। प्रथम दिन उत्तम क्षमा पर्व के अवसर पर धार्मिक अनुष्ठानों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।
मंदिर प्रांगण में आकर्षक समवशरण मंडला सजाया गया, जिसमें आठ भूमि और 12 सभाओं का भव्य चित्रण किया गया। आठ मंगल द्रव्य एवं आठ प्रातिहार्यों की विधिवत स्थापना की गई। इस दौरान श्री महावीर भगवान की मूर्ति को सोधर्म इंद्र के रूप में उमेश जैन सर्राफ ने स्थापित किया, जबकि मंगल कलश की स्थापना डोली जैन द्वारा की गई। ध्वज आरोहण उमेश जैन एवं ममता जैन ने संयुक्त रूप से किया। तत्पश्चात भगवान श्री शांतिनाथ को पांडुक शिला पर विराजमान कर शांति धारा संपन्न हुई।
इसके बाद अर्हम चक्र महामंडल विधान की शुरुआत हुई। प्रथम दिन दो पूजाएं सम्पन्न कर मंडले पर 16 श्रीफल अर्पित किए गए। सायंकालीन आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और भक्ति भाव से शामिल हुए।
प्रवचन में विद्वान नंदन शास्त्री ने उत्तम क्षमा पर्व की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रत्येक जीव को सभी के साथ मैत्रीभाव रखना चाहिए। किसी भी दुर्जन पर क्रोध न करके शांत रहना ही सच्ची क्षमा है। उन्होंने कहा कि यह पर्व दूसरों को सुधारने के लिए नहीं, बल्कि स्वयं के परिणाम अच्छे बनाने के लिए मनाया जाता है। यदि सामने वाला आपको अपशब्द कहे और आप शांत बने रहें, तो वही आपकी वास्तविक क्षमा होगी।
धार्मिक अनुष्ठानों के बाद पुण्य प्रभावना महिला प्रगति मंच की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। बच्चों और महिलाओं ने भक्ति नृत्य व गीतों के माध्यम से धार्मिक वातावरण को और भी भव्य बना दिया।
कार्यक्रम की सफलता में सुनील जैन प्रवक्ता, अरुण जैन, सत्येंद्र जैन, चैतन्य जैन और विनय जैन का विशेष सहयोग रहा। श्रद्धालुओं ने एक स्वर से इस पर्व को आत्मशुद्धि और समाज में सद्भाव फैलाने का महत्वपूर्ण अवसर बताया।
