मार्कण्डेय महादेव धाम में दिव्य जलधारा तपस्या

Deepak Prami E Radio India Reporter Sultampur

वाराणसी। काशी से लगभग 30 किलोमीटर दूर कैथी स्थित गंगा–गोमती संगम पर अवस्थित मार्कण्डेय महादेव मंदिर इन दिनों आध्यात्मिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है। भगवान शिव को समर्पित यह प्राचीन धाम अकाल मृत्यु से रक्षा और दीर्घायु के लिए प्रसिद्ध है, जिसे महामृत्युंजय मंदिर भी कहा जाता है। यही स्थल ऋषि मार्कण्डेय की तपस्थली माना जाता है और इसका उल्लेख मार्कण्डेय पुराण में मिलता है।

इस पावन धरा पर जयपुर से पधारे महंत प्रदुम्य मुनि जी महाराज ने दिव्य जलधारा तपस्या आरंभ कर श्रद्धालुओं को चौंका दिया है। महंत प्रदुम्य मुनि जी ने बताया कि जलधारा तपस्या से न केवल साधक की आत्मिक शक्ति में वृद्धि होती है, बल्कि समाज और राष्ट्र के कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त होता है। उनके अनुसार यह साधना आत्मसंयम, धैर्य और ईश्वर भक्ति को सुदृढ़ करती है।

मार्कण्डेय महादेव धाम में दिव्य जलधारा तपस्या
मार्कण्डेय महादेव धाम में दिव्य जलधारा तपस्या

जानकारी के अनुसार महंत प्रदुम्य मुनि जी की यह जलधारा तपस्या 25 नवंबर से प्रारंभ होकर 5 जनवरी 2026 तक निरंतर चलेगी। तपस्या को देखने और दर्शन करने के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मार्कण्डेय महादेव धाम पहुंच रहे हैं।

मंदिर में परंपरागत रूप से महामृत्युंजय जाप, रुद्राभिषेक और शिव-पार्वती की विशेष पूजा का आयोजन होता है। मान्यता है कि यहां श्रद्धापूर्वक की गई आराधना से संतान सुख, लंबी आयु और रोगों से मुक्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

श्रद्धालुओं का कहना है कि महंत प्रदुम्य मुनि जी की तपस्या सनातन परंपरा और साधना शक्ति का जीवंत उदाहरण है, जो समाज में आध्यात्मिक चेतना और सकारात्मक ऊर्जा का संचार कर रही है।

मार्कण्डेय महादेव धाम में दिव्य जलधारा तपस्या
कार्यक्रम का पूरा विवरण यहां मौजूद है