Swami Vivekanand Shikshan Sansthan में प्रेरणादायी कार्यक्रम

Swami Vivekanand Shikshan Sansthan में प्रेरणादायी कार्यक्रम
Deepak Prami E Radio India Reporter Sultampur

Swami Vivekanand Shikshan Sansthan करौंदी कला स्थित परिसर में स्वामी विवेकानंद जयंती के अवसर पर एक भव्य, गरिमामय और प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय सहभागिता देखने को मिली। यह आयोजन केवल एक औपचारिक समारोह नहीं था, बल्कि युवाओं के भीतर आत्मबल, अनुशासन, राष्ट्रप्रेम और चरित्र निर्माण जैसे मूल्यों को जागृत करने का सशक्त माध्यम बना। पूरे परिसर में ऊर्जा, उत्साह और सकारात्मक विचारों का वातावरण व्याप्त रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी विवेकानंद के चित्र पर पुष्पांजलि और दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में जब युवा अनेक दिशाओं में भटक रहा है, तब स्वामी विवेकानंद के विचार मार्गदर्शक प्रकाशस्तंभ की तरह हैं। उनके विचार न केवल आत्मविश्वास जगाते हैं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी का भी बोध कराते हैं।

मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व विधायक देवमणि द्विवेदी ने अपने संबोधन में कहा कि Swami Vivekananda युगदृष्टा थे। उन्होंने भारत की आत्मा को पहचाना और युवाओं को यह विश्वास दिलाया कि उनमें अपार शक्ति निहित है। उन्होंने कहा कि यदि युवा विवेकानंद के आदर्शों को अपने जीवन में उतार लें, तो न केवल उनका व्यक्तिगत विकास होगा बल्कि राष्ट्र भी नई ऊंचाइयों को छुएगा।

Swami Vivekanand Shikshan Sansthan में राष्ट्रनिर्माण और आत्मबल के विचारों से गूंजा परिसर

कार्यक्रम में वक्ताओं ने स्वामी विवेकानंद के जीवन दर्शन पर विस्तार से प्रकाश डाला। कहा गया कि उन्होंने शिक्षा को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे चरित्र निर्माण और आत्मविकास से जोड़ा। विद्यार्थियों को बताया गया कि सच्ची शिक्षा वही है जो व्यक्ति को निर्भीक, आत्मनिर्भर और समाज के प्रति संवेदनशील बनाए।

मुख्य अतिथि ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने युवाओं से आह्वान किया था कि वे स्वयं पर विश्वास करें, क्योंकि आत्मविश्वास ही सफलता की पहली सीढ़ी है। उनके विचार आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने उस समय थे। विद्यार्थियों ने पूरे मनोयोग से वक्ताओं की बातों को सुना और तालियों के माध्यम से उत्साह प्रकट किया।

कार्यक्रम में यह भी कहा गया कि राष्ट्रनिर्माण केवल सरकार या संस्थाओं की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक नागरिक, विशेषकर युवाओं की भूमिका इसमें महत्वपूर्ण है। विवेकानंद का संदेश था कि पहले स्वयं को मजबूत बनाओ, फिर समाज और राष्ट्र को सशक्त करो।

Swami Vivekanand Shikshan Sansthan में युवाओं को विवेकानंद के आदर्शों से जोड़ने का प्रयास

समारोह में उपस्थित अन्य वक्ताओं में प्रमुख सर्वेश मिश्र, भाजपा मंडल अध्यक्ष विक्की वर्मा, प्रदीप सिंह राना और धीरेंद्र सिंह सोमवंशी शामिल रहे। सभी ने अपने संबोधन में विद्यार्थियों को अनुशासन, परिश्रम और सेवा भाव को जीवन का आधार बनाने की प्रेरणा दी।

वक्ताओं ने कहा कि स्वामी विवेकानंद का जीवन स्वयं में एक खुली किताब है, जिससे युवा बहुत कुछ सीख सकते हैं। उन्होंने संन्यास और सेवा के माध्यम से यह संदेश दिया कि सच्ची शक्ति ज्ञान और करुणा में निहित होती है। विद्यार्थियों से आह्वान किया गया कि वे केवल परीक्षा और अंकों तक सीमित न रहें, बल्कि अच्छे नागरिक बनने का प्रयास करें।

संस्थान के शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों को बताया कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य केवल जानकारी देना नहीं, बल्कि संस्कारों का बीजारोपण करना है। विद्यार्थियों में यह भावना विकसित की जाए कि वे समाज के लिए उपयोगी बनें और अपने कर्तव्यों को ईमानदारी से निभाएं।

Swami Vivekanand Shikshan Sansthan में निबंध प्रतियोगिता और सम्मान समारोह बना आकर्षण

कार्यक्रम के दौरान आयोजित निबंध प्रतियोगिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही। छात्र-छात्राओं ने स्वामी विवेकानंद के विचारों, राष्ट्रप्रेम और युवा शक्ति की भूमिका पर अपने विचार प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किए। प्रतियोगिता में विद्यार्थियों का उत्साह और तैयारी देखकर शिक्षकों और अतिथियों ने उनकी सराहना की।

निबंध प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राएं दामिनी, नेहा, अंशिका यादव, अर्तिका वर्मा, आस्था शाही, आर्या यादव, अंशिका यादव और आकृति तिवारी को मुख्य अतिथि द्वारा पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। पुरस्कार प्राप्त करते समय छात्राओं के चेहरे पर आत्मविश्वास और गर्व स्पष्ट झलक रहा था।

संस्था के प्रबंधक एवं वरिष्ठ पत्रकार अम्बरीश मिश्र ने मुख्य अतिथि को स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा और एक प्रेरणास्पद पुस्तक भेंट कर सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे कार्यक्रम विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं और उन्हें सकारात्मक सोच की ओर प्रेरित करते हैं।

संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक सोच का संदेश

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रबंधक अम्बरीश मिश्र ने सभी अतिथियों, शिक्षकों और विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद जयंती जैसे आयोजनों से विद्यार्थियों में संस्कार, अनुशासन और आत्मविश्वास का विकास होता है। यह आयोजन विद्यार्थियों को यह समझाने में सफल रहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल रोजगार प्राप्त करना नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक बनना भी है।

प्रधानाचार्य शिवकुमार ने कहा कि संस्था भविष्य में भी ऐसे प्रेरणादायी कार्यक्रमों का आयोजन करती रहेगी, ताकि विद्यार्थियों को महान व्यक्तित्वों के विचारों से जोड़ा जा सके। उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया और कहा कि शिक्षक ही छात्रों को सही दिशा दे सकते हैं।

गरिमामयी उपस्थिति और समापन

कार्यक्रम में आलोक कुमार बब्लू, अंतिम मिश्र, दीपेश सिंह, सुधाकर, धीरज सिंह, शिव प्रताप सिंह, अभिषेक तिवारी, बुधिराम गुप्ता, रंजू सिंह, शिमला यादव, श्रद्धा गुप्ता, श्वेता तिवारी, खुशी मिश्रा, ईशा मिश्रा सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे। सभी ने कार्यक्रम की भूरि-भूरि प्रशंसा की।

समारोह राष्ट्रभक्ति, प्रेरणा और उत्साह के वातावरण में संपन्न हुआ। विद्यार्थियों के चेहरों पर आत्मविश्वास और नई ऊर्जा साफ दिखाई दे रही थी। स्वामी विवेकानंद के विचारों ने एक बार फिर यह सिद्ध कर दिया कि यदि युवा सही दिशा में प्रेरित हों, तो वे राष्ट्र का भविष्य संवार सकते हैं।