ब्यूरो रिपोर्ट, ई-रेडियो इंडिया
लगभग एक दशक के अंतराल के बाद शनिवार को भारत की राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में भारत-अरब विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक आयोजित की जा रही है। इस उच्च स्तरीय बैठक में भाग लेने के लिए ओमान और संयुक्त अरब अमीरात सहित कई अरब देशों के विदेश मंत्री और वरिष्ठ प्रतिनिधि दिल्ली पहुंच चुके हैं।
ओमान के विदेश मंत्री बद्र अलबुसैदी और संयुक्त अरब अमीरात के विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री खलीफा शाहीन अल मरार शनिवार को बैठक में शामिल होने के लिए नई दिल्ली पहुंचे। उनके आगमन पर विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से कहा कि यह यात्रा भारत और यूएई के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूती प्रदान करेगी।
विदेश मंत्रालय ने ओमान के विदेश मंत्री के स्वागत के दौरान भी कहा कि उनकी यह यात्रा भारत और ओमान के बीच बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाएगी। बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक सहयोग को आगे बढ़ाने से जुड़े विषयों पर चर्चा होने की संभावना है।
इससे पहले शुक्रवार को लीबिया के विदेश मंत्री एल्ताहर एस एम एलबौर, सोमालिया के विदेश मंत्री अब्दिसलाम अली और कतर के विदेश राज्य मंत्री सुल्तान बिन साद अल मुरैखी भी बैठक में भाग लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे थे। इनके अलावा अरब लीग के अन्य सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के भी बैठक में शामिल होने की उम्मीद है।
इस महत्वपूर्ण बैठक की सह-अध्यक्षता भारत और संयुक्त अरब अमीरात द्वारा की जाएगी। इसमें अरब लीग के सभी 22 सदस्य देशों के विदेश मंत्री या वरिष्ठ प्रतिनिधि और अरब लीग के महासचिव भाग लेंगे। बैठक का उद्देश्य भारत और अरब देशों के बीच सहयोग को नई दिशा देना और आपसी साझेदारी को और गहरा करना है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार भारत-अरब विदेश मंत्रियों की यह बैठक वर्ष 2016 के बाद पहली बार हो रही है। इससे पहले पहली भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक बहरीन में आयोजित की गई थी। मंत्रालय ने अपनी आधिकारिक विज्ञप्ति में कहा है कि दूसरी बैठक से मौजूदा सहयोग को आगे बढ़ाने के साथ-साथ भारत और अरब देशों के बीच रणनीतिक रिश्तों को और मजबूत करने की उम्मीद है।
विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक भारत और अरब राज्यों की लीग के बीच सहयोग का सबसे बड़ा संस्थागत ढांचा है। मार्च 2002 में भारत और अरब लीग के बीच एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर के बाद दोनों पक्षों के बीच नियमित संवाद और सहयोग का औपचारिक ढांचा स्थापित हुआ था, जिसे यह बैठक और अधिक सुदृढ़ करने का प्रयास करेगी।
