बोर्ड परीक्षा, जीवन कौशल, AI और टाइम मैनेजमेंट पर प्रधानमंत्री ने दिए अहम मंत्र; 6.76 करोड़ से अधिक लोग जुड़े कार्यक्रम से
कार्यक्रम की मुख्य बातें
- ☕ सिक्किम की छात्रा ने पीएम मोदी को भेंट की ‘चाय’, पीएम ने मुस्कुराते हुए कहा – “चाय वाले को चाय”
- 🤖 AI को बताया छात्रों की “सुपरपावर”, कहा – “AI मेहनत की जगह नहीं लेता, क्षमता बढ़ाता है”
- 📚 ‘श्योर सजेशन’ और 10 साल के प्रश्न बैंक पर निर्भरता को बताया “बीमारी”
- 🎯 परीक्षा को बताया जीवन की यात्रा का एक पड़ाव, अंतिम लक्ष्य नहीं
- ⏳ 75वें जन्मदिन का किस्सा सुनाया – “25 साल अभी बाकी हैं”
- 📊 6.76 करोड़ से अधिक लोगों की भागीदारी, जिनमें 4.19 करोड़ छात्र शामिल
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘परीक्षा पे चर्चा’ के 9वें संस्करण में देशभर के छात्रों से संवाद करते हुए परीक्षा, जीवन कौशल और भविष्य की तैयारी जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की। 7, लोक कल्याण मार्ग स्थित अपने आवास पर आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपनी रचनात्मक प्रस्तुतियों से प्रधानमंत्री का स्वागत किया।
कार्यक्रम के दौरान सिक्किम की एक छात्रा ने प्रधानमंत्री को ‘चाय’ भेंट की। इस पर मुस्कुराते हुए पीएम मोदी ने कहा, “चाय वाले को चाय।” यह पल कार्यक्रम का आकर्षण बन गया।
छात्रों ने दिए खास उपहार
देश के विभिन्न राज्यों से आए छात्रों ने प्रधानमंत्री को अनोखे उपहार दिए। किसी ने स्केच बनाया, तो किसी ने हैंडमेड बुके भेंट किया। त्रिपुरा के एक छात्र ने त्रिपुरा सुंदरी की तस्वीर दी, जबकि असम के छात्र ने पारंपरिक गमछा भेंट किया। उत्तराखंड से आए छात्र ने बसंत पंचमी से जुड़ी धार्मिक टोकरी प्रदान की। कार्यक्रम में गीत, कविता और बांसुरी वादन जैसी प्रस्तुतियां भी हुईं।
AI है नई पीढ़ी की “सुपरपावर”
प्रधानमंत्री ने छात्रों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के सही उपयोग पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि AI उनकी पीढ़ी की “सुपरपावर” है, लेकिन यह मेहनत का विकल्प नहीं है।
उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि AI का उपयोग जीवनी का सार निकालने या रुचि के अनुसार किताबों की सूची तैयार करने में किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने चेताया कि AI पर पूरी तरह निर्भर रहना सही नहीं है; इसका उपयोग सोच और समझ को विकसित करने के लिए होना चाहिए।
‘सजेशन बुक’ मानसिकता पर टिप्पणी
एक छात्रा द्वारा पिछले वर्षों के प्रश्नों के आधार पर तैयारी को लेकर पूछे गए सवाल पर प्रधानमंत्री ने कहा कि परीक्षा का प्रश्नपत्र सिलेबस के बाहर नहीं आता। उन्होंने केवल ‘श्योर सजेशन’ और 10 साल के प्रश्न बैंक पर निर्भरता को गलत बताया और कहा कि अच्छे शिक्षक हमेशा पूरा सिलेबस पढ़ाते हैं।
परीक्षा नहीं, जीवन है लक्ष्य
प्रधानमंत्री ने कहा कि परीक्षा जीवन का अंतिम लक्ष्य नहीं है, बल्कि जीवन निर्माण का एक माध्यम है। उन्होंने छात्रों को समझाया कि केवल अंक प्राप्त करना ही सफलता नहीं है, बल्कि संपूर्ण व्यक्तित्व विकास अधिक महत्वपूर्ण है।
75वें जन्मदिन का किस्सा
कार्यक्रम के दौरान पीएम मोदी ने अपने 75वें जन्मदिन का एक प्रसंग साझा किया। उन्होंने कहा कि किसी नेता ने उन्हें 75 वर्ष पूरे होने पर बधाई दी तो उन्होंने जवाब दिया, “25 साल अभी बाकी हैं।” उन्होंने छात्रों को संदेश दिया कि बीते समय की गिनती करने के बजाय भविष्य की संभावनाओं पर ध्यान देना चाहिए।
टाइम मैनेजमेंट और कर्तव्य पर जोर
प्रधानमंत्री ने छात्रों को समय प्रबंधन, आत्मविश्वास और कर्तव्य पालन का महत्व समझाया। उन्होंने स्वच्छता और स्वस्थ जीवनशैली को भी राष्ट्र निर्माण से जोड़ा और कहा कि विकसित भारत के लिए हर नागरिक को अपने कर्तव्यों का पालन करना होगा।
कार्यक्रम का प्रसारण दूरदर्शन, यूट्यूब और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किया गया। इस वर्ष 6.76 करोड़ से अधिक लोग इससे जुड़े, जिनमें 4.19 करोड़ छात्र शामिल रहे।
‘परीक्षा पे चर्चा’ के माध्यम से प्रधानमंत्री ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि परीक्षा तनाव का कारण नहीं, बल्कि सीखने और आगे बढ़ने का अवसर है।
