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  • संसद में विपक्ष का यह हथियार बनेगा ब्रह्मास्त्र

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    NEET विवाद पर संसद में नियमों की जंग
    विपक्ष ने नियम 267 पर अड़ाई जिद
    सरकार नियम 176 के तहत चर्चा को तैयार

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    दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का धरना भले खत्म हो गया हो, लेकिन NEET पेपर लीक का विवाद अब संसद के भीतर सियासी तूफान बन चुका है। अब लड़ाई सिर्फ पेपर लीक की नहीं, बल्कि संसद के नियमों की भी है। एक तरफ सरकार है, जो सीमित समय की चर्चा चाहती है, तो दूसरी तरफ पूरा विपक्ष है, जो संसद का पूरा कामकाज रोककर इस मुद्दे पर बहस कराने की मांग कर रहा है। आखिर नियम 267 में ऐसा क्या है कि विपक्ष इसी पर अड़ा हुआ है? और सरकार इससे बचना क्यों चाहती है? आइए समझते हैं पूरी कहानी।

    राज्यसभा में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल NEET-UG पेपर लीक के मुद्दे पर नियम 267 के तहत चर्चा कराने की मांग कर रहे हैं। वहीं सरकार का कहना है कि नियम 176 के तहत ढाई घंटे की अल्पकालिक चर्चा कराई जा सकती है। लेकिन विपक्ष इस विकल्प को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं है।

    अब सवाल है कि आखिर नियम 267 इतना महत्वपूर्ण क्यों माना जा रहा है? संसदीय प्रक्रिया के जानकारों के अनुसार, नियम 267 के तहत यदि सभापति अनुमति देते हैं तो सदन का निर्धारित सरकारी कामकाज स्थगित कर किसी अत्यंत महत्वपूर्ण और तात्कालिक विषय पर चर्चा कराई जा सकती है। विपक्ष का मानना है कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े NEET पेपर लीक जैसे मुद्दे पर पूरे दिन की विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।

    विपक्ष की रणनीति के पीछे कई राजनीतिक और संसदीय कारण बताए जा रहे हैं। पहला कारण समय है। नियम 176 के तहत चर्चा सीमित अवधि की होती है, जबकि नियम 267 लागू होने पर पूरा फोकस उसी मुद्दे पर रहता है।

    दूसरा कारण जवाबदेही का है। विपक्ष चाहता है कि सरकार इस पूरे मामले पर विस्तृत जवाब दे और संसद के रिकॉर्ड में अपना पक्ष स्पष्ट करे। उसका मानना है कि यह केवल परीक्षा का नहीं, बल्कि देश के करोड़ों युवाओं के भविष्य का प्रश्न है।

    तीसरा कारण राजनीतिक संदेश का है। विपक्ष यह दिखाना चाहता है कि छात्रों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा उसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी कारण वह संसद का पूरा समय इसी विषय को देना चाहता है।

    हालांकि सरकार का तर्क अलग है। सरकार का कहना है कि संसद में ऐसे विषयों पर चर्चा के लिए नियम 176 पहले से मौजूद है और पूरे सदन का कामकाज रोकना आवश्यक नहीं है। सरकार यह भी कह रही है कि पेपर लीक रोकने के लिए कड़े कानून बनाए गए हैं और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

    दरअसल, नियम 267 को लागू करने का अधिकार पूरी तरह राज्यसभा के सभापति के पास होता है। उनकी अनुमति के बिना इस नियम के तहत चर्चा शुरू नहीं हो सकती। पिछले कई वर्षों में विपक्ष की ओर से मणिपुर हिंसा, अदाणी प्रकरण, मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों सहित कई मामलों में नियम 267 के तहत चर्चा की मांग की गई, लेकिन उन्हें अनुमति नहीं मिली।

    इतिहास पर नजर डालें तो नियम 267 का इस्तेमाल बेहद कम हुआ है। पिछले करीब तीन दशकों में इसे गिने-चुने अवसरों पर ही मंजूरी मिली। नोटबंदी, कृषि संकट, महिलाओं की सुरक्षा, विदेशों में जमा काले धन और खाड़ी युद्ध जैसे राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर इस नियम के तहत चर्चा हो चुकी है। यही वजह है कि विपक्ष इसे संसद का सबसे प्रभावी संसदीय हथियार मानता है।

    उधर, लोकसभा में भी विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए नियम 56 यानी स्थगन प्रस्ताव का सहारा लिया है। इस नियम के तहत चर्चा के बाद मतदान की व्यवस्था होती है, जिससे सरकार पर राजनीतिक दबाव और बढ़ जाता है। ऐसे में संसद के दोनों सदनों में रणनीति और नियमों की यह लड़ाई अब और तेज होती दिखाई दे रही है।

    फिलहाल, NEET पेपर लीक का मुद्दा अब केवल छात्रों के आंदोलन तक सीमित नहीं रह गया है। यह संसद के भीतर सरकार और विपक्ष के बीच बड़ी राजनीतिक और संसदीय टकराव का केंद्र बन चुका है। अब सबकी नजर राज्यसभा के सभापति के फैसले, संसद की कार्यवाही और इस पूरे विवाद पर सरकार की अगली रणनीति पर टिकी हुई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा संसद से लेकर देश की राजनीति तक चर्चा का सबसे बड़ा विषय बना रह सकता है।

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    News Desk

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