Report by : Shivani Mangwani
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बच्चों के लिए ज्यादा खतरनाक है कोरोना का नया स्ट्रेन
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ट्रिपल म्यूटेंट वैरिएंट जिसने कोरोना संक्रमण को अचनाक से बढ़ दिया-  

भारत में कोरोना संक्रमण का फैलाव थमने का नाम नहीं ले रहा। दिन प्रतिदिन स्थिति बिगड़ती जा रही है। बढ़ते मरीजों के कारण स्वास्थ्य सुविधाओं का भी बुरा हाल है। पिछले 24 घंटे में ढाई लाख से ज्यादा मामले सामने आए हैं। इसी बीच देश में ट्रिपल म्यूटेंट की भी खबर आ रही है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश के कुछ हिस्सों में ट्रिपल म्यूटेंट वैरिएंट पाया गया है, जिसने कोरोना संक्रमण को अचनाक से बढ़ दिया है।  विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रिपल म्यूटेंट की वजह से कोरोना की दूसरी लहर बढ़ती जा रही है और इसका पीक अभी बाकी है। 

कोरोना महामारी भारत में तेजी से फैल रही है. हालिया रिपोर्ट के मुताबिक अब संक्रमितों की संख्या एक दिन में 2 लाख को पार कर गई है. इनमें से कई ऐसे बच्चे भी कोरोना की चपेट में आ गए हैं, जिनकी उम्र बहुत कम है. दिल्ली में कुल 5 ऐसे बच्चों का पता चला है, जो 8 माह से लेकर 12 साल तक की उम्र के हैं. अबतक ये माना जा रहा था कि कोरोना का संक्रमण बच्चों में नहीं पहुंच पा रहा है, या उन्हें कम नुकसान पहुंचाता है. लेकिन नई जानकारी के मुताबिक कोरोना के नए स्ट्रेन में बच्चों को भी नुकसान पहुंचाने की क्षमता है.

भारत के लिए तीसरी म्यूटेंट का क्या है मतलब ?

भारत के लिए ट्रिपल म्यूटेंट वैरिएंट काफी खतरनाक है। देश के लिए यह बड़ी चुनौती बनकर उभरा है। अगर समय रहते इस स्ट्रेन को रोका नहीं गया तो आने वाले दिनों में इसका दुष्परिणाम दिखने लगेगा। इसमें दो स्ट्रेन के नमूने  महाराष्ट्र, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ में पाए गए हैं। जानकारों का मानना है कि ट्रिपल म्यूटेंट के चलते इन राज्यों में कोरोना संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं।  विशेषज्ञ लगातार इस स्ट्रेन को नियंत्रित करने के लिए काम कर रहे हैं। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि संक्रमण खुद को लंबे समय तक प्रभावी रखने के लिए लगातार अपनी जेनेटिक संरचना में बदलाव लाते रहते हैं।

नए वैरिएंट मिलने के बाद से केंद्र सरकार भी चिंतित है।  केंद्र ने राज्यों से अपील की है कि कोरोना संक्रमित सैंपल्स को रैंडमली जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजा जाना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर म्यूटेशन से जुड़े संक्रमण के बारे में सही जानकारी नहीं मिल पाएगी। केंद्र ने राज्यों से  अपील की है कि कोरोना संक्रमित सैंपल्स को रैंडमली जीनोम सिक्वेंसिंग के लिए भेजा जाना चाहिए। ऐसा नहीं होने पर म्यूटेशन से जुड़े संक्रमण के बारे में सही जानकारी नहीं मिल पाएगी। 

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