Report by : News Desk
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भारत-ओमान साझेदारी में हरित ऊर्जा का नया अध्याय
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भारत-ओमान साझेदारी में हरित ऊर्जा का नया अध्याय

भारत और ओमान के संबंधों में अब पारंपरिक सहयोग से आगे बढ़कर हरित ऊर्जा, सस्टेनेबल एविएशन फ्यूल यानी एसएएफ और सुरक्षा जैसे नए क्षेत्रों में साझेदारी की संभावनाएं तलाशने पर जोर दिखाई दे रहा है। नई दिल्ली में आयोजित दूसरे इंडिया एसएएफ कॉन्क्लेव और अवार्ड 2026 के दौरान भारत में ओमान के राजदूत इस्सा सालेह अब्दुल्ला अल शिबानी ने दोनों देशों के बीच इन क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाओं का उल्लेख किया।

भारत और ओमान भौगोलिक रूप से निकट पड़ोसी हैं और दोनों के बीच ऊर्जा तथा व्यापारिक संबंध पहले से महत्वपूर्ण रहे हैं। बदलते वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में हरित ऊर्जा और कम कार्बन उत्सर्जन वाली तकनीकों का महत्व बढ़ रहा है। ऐसे में एसएएफ दोनों देशों के लिए सहयोग का उभरता हुआ क्षेत्र बन सकता है।

जलवायु लक्ष्यों से जुड़ा सहयोग

ओमान ने 2050 तक और भारत ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य निर्धारित किया है। इन लक्ष्यों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए ऊर्जा के पारंपरिक स्रोतों के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा और कम कार्बन वाले ईंधनों का विस्तार आवश्यक होगा। विमानन क्षेत्र में एसएएफ इसी बदलाव का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।

हालांकि एसएएफ का उत्पादन केवल तकनीक का सवाल नहीं है। इसके लिए पर्याप्त निवेश, लगातार कच्चे माल यानी फीडस्टॉक की उपलब्धता और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला की जरूरत होती है। यही वजह है कि एसएएफ के विस्तार के साथ कृषि क्षेत्र, किसानों और कलेक्शन नेटवर्क की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

भारत के लिए एसएएफ की बड़ी चुनौती

एसएएफ एसोसिएशन की ओर से विमानन ईंधन में एसएएफ की हिस्सेदारी बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। प्रस्तावित मार्ग के अनुसार अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में मिश्रण की हिस्सेदारी 2027 में एक प्रतिशत, 2028 में दो प्रतिशत और 2030 तक पांच प्रतिशत तक पहुंचाने की बात कही गई है। इसके साथ एसएएफ की मांग में भी उल्लेखनीय वृद्धि का अनुमान है।

एसएएफ एसोसिएशन के अध्यक्ष और जेडआर2 ग्रुप के चेयरमैन एवं एमडी जिमी ओल्सन ने भारत के लिए एसएएफ विकास की अलग रणनीति की जरूरत पर जोर दिया। उनके अनुसार भारत ने सौर ऊर्जा, बायोमास और ऊर्जा उपलब्धता के क्षेत्र में आधार तैयार किया है, लेकिन एसएएफ एक पूंजी-गहन उत्पाद है और बड़े पैमाने पर उत्पादन के बाद ही इसकी लागत को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जा सकेगा।

उत्पादन से लेकर किसानों तक जुड़ी पूरी श्रृंखला

एसएएफ के निर्धारित लक्ष्यों को हासिल करने के लिए केवल उत्पादन संयंत्र स्थापित करना पर्याप्त नहीं होगा। एचईएफए और एटीजे जैसी परियोजनाओं को समय पर शुरू करने के साथ लगातार फीडस्टॉक उपलब्ध कराना भी जरूरी होगा। इसका सीधा संबंध किसानों, कृषि अवशेषों के संग्रह और कलेक्शन नेटवर्क से है।

यही वह क्षेत्र है जहां भारत और ओमान के बीच सहयोग की संभावनाएं व्यापक हो सकती हैं। हरित ऊर्जा, तकनीक, निवेश और विमानन ईंधन के क्षेत्र में साझेदारी दोनों देशों के लिए नए आर्थिक अवसर पैदा कर सकती है। साथ ही, एसएएफ की मजबूत आपूर्ति श्रृंखला बनने पर इससे कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों के लिए भी नए बाजार विकसित हो सकते हैं।

भारत-ओमान संबंधों का यह नया आयाम बताता है कि भविष्य की साझेदारी केवल पारंपरिक ऊर्जा और व्यापार तक सीमित नहीं रहने वाली। हरित संक्रमण और विमानन क्षेत्र के बदलते स्वरूप के बीच एसएएफ दोनों देशों के लिए आर्थिक सहयोग के साथ पर्यावरणीय लक्ष्यों को आगे बढ़ाने का भी माध्यम बन सकता है।

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