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आजादी के बाद भी क्या हम पूर्णतया आजाद हैं?

आज 15 अगस्त को देश की आजादी की 78वी वर्षगाँठ है । यानि आज आजाद भारत 77 वर्ष का हो गया है। इस देश को आजाद कराने के लिए लाखों करोड़ों देशभक्तों ने अपनी कुर्बानियां दी थीं। यह उनके बलिदान का ही परिणाम है कि आज हम आजाद भारत की खुली हवा में सांस ले पा रहे हैं।

हालांकि, आजादी के 77 साल बीत जाने के बाद यह चिंतन करने की जरूरत है कि आखिर यह कैसी आजादी है, जिसमें अमीर और गरीब के बीच खाई चौडी होती जा रही है। क्या इसी आजादी की परिकल्पना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों ने की थी..? आज कुछ राजनेताओं की गन्दी मानसिकता के कारण देश में जातीय जनगणना के नाम पर देशवासियों को बांटने की साजिश रची जा रही है।

आ़जादी के 77 साल पूरे होने के बाद हम यह कह सकते हैं युवा को रोजगार मिला या नहीं मगर हाथ में मोबाइल अवश्य आ गया है। देश की प्रगति और विकास का सही अर्थो में लेखाजोखा ले तो आज भी हम गरीबी, बेकारी, महंगाईं और भ्रष्टाचार का राग अलाप रहे हैं। हम कहने को कह सकते हैं कि हमने सुई से जहाज तक का सफर पूरा कर लिया है, मगर पिछले पचास सालों पर ऩजर डालें तो ज्ञात होगा आज भी हम उन्हीं मुद्दों के इर्द-गिर्द अपना ताना बाना बुन रहे हैं, जो हमारी रोजमर्रा की जिन्दगी के कांटे के रूप में चुभ रहे हैं। इंदिरा गाँधी ने गरीबी हटाओ का नारा दिया था और आज भी हम गरीबी के खिलाफ संघर्ष में उलझे हुए हैं। हाँ, गरीबों को मुफ्त अनाज जरूर बांट रहे हैं। कहने का तात्पर्य है कि 50 सालों में इन्हीं मुद्दों के इर्द गिर्द हमारी आ़जादी घूम फिर रही है। मोदी सरकार ने 25 करोड़ लोगों को गरीबी से निकालने का दावा जरूर किया है, मगर विशेषज्ञ इन आंकड़ों पर विश्वास नहीं कर रहे हैं। अमीर पहले भी अमीर थे और आज भी उनकी आय बेहताशा बढ़ रही है।

कहने का तात्पर्य है कि देश में अमीरी बढ़ रही है। ग्लोबल हंगर इंडेक्स 2023 के आंकड़ों को देखे तो भारत कुल 125 देशों में से 111वें स्थान पर था। यानि भुखमरी कायम है। यह जरूर है आज हर अमीर और गरीब के हाथ में मोबाइल फोन देखा जा सकता है। यदि गरीबी मापने का यह एक तरीका है तो हम कह सकते हैं कि देश से गरीबी समाप्त हो रही है। आजादी के बाद निश्चय ही देश ने प्रगति और विकास के नये सोपान तय किये हैं। पोस्टकार्ड का स्थान ई-मेल ने ले लिया है। इन्टरनेट से दुनिया नजदीक आ गई है, मगर आपसी सद्भाव, भाईचारा, प्रेम, सच्चाई से हम कोसों दूर चले गये हैं।

सत्ता की चाह में कुछ राजनेताओं के कारण देश में एक बार फिर से बंटवारे की सियासत की जा रही है। देशवासियों को इससे बहुत सतर्क और जागरूक रहने की जरूरत है ।

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