Report by : News Desk
Published at :
महंगा ईंधन, महंगा होता हवाई सफर
विज्ञापन
विज्ञापन
महंगा ईंधन, महंगा होता हवाई सफर

हवाई यात्रा को सुविधाजनक और तेज परिवहन का माध्यम बनाने वाली विमानन व्यवस्था एक बार फिर लागत के दबाव में है। सार्वजनिक क्षेत्र की तेल विपणन कंपनियों ने अक्टूबर में एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की कीमत में 13.22 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है। दिल्ली में इसकी कीमत करीब 121 रुपये से बढ़कर 137 रुपये प्रति लीटर हो गई है। यह लगातार तीसरा महीना है जब विमान ईंधन महंगा हुआ है।

सबसे चिंता की बात बढ़ोतरी की रफ्तार है। अगस्त में एटीएफ की कीमत में करीब पांच रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई, सितंबर में 6.28 रुपये की बढ़ोतरी हुई और अक्टूबर में लगभग 16 रुपये प्रति लीटर का इजाफा किया गया। इस तरह तीन महीनों में विमान ईंधन की कीमत करीब 25 प्रतिशत बढ़ चुकी है। पश्चिम एशिया में जारी संकट को भी हालिया कीमत वृद्धि की पृष्ठभूमि में देखा जा रहा है।

एयरलाइंस के लिए एटीएफ महज एक सामान्य खर्च नहीं, बल्कि परिचालन लागत का प्रमुख हिस्सा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार विमानन कंपनियों के कुल परिचालन खर्च में ईंधन की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत तक हो सकती है। ऐसे में ईंधन की कीमत में तेज वृद्धि का असर कंपनियों के वित्तीय संतुलन पर पड़ना स्वाभाविक है।

इसका सीधा प्रभाव यात्रियों पर कब और कितना पड़ेगा, यह एयरलाइंस की मूल्य निर्धारण नीति तथा अन्य परिचालन लागतों पर निर्भर करेगा। फिर भी लागत का इतना बड़ा हिस्सा ईंधन पर निर्भर होने के कारण किराए पर दबाव की आशंका को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। त्योहारी मौसम में जब हवाई यात्रा की मांग बढ़ती है, तब बढ़ती लागत यात्रियों के बजट को और प्रभावित कर सकती है।

एटीएफ की लगातार बढ़ती कीमत विमानन क्षेत्र की उस पुरानी चुनौती की भी याद दिलाती है जिसमें अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार, भू-राजनीतिक घटनाक्रम और घरेलू हवाई किराए आपस में जुड़े हुए हैं। तेल कीमतों में होने वाला बदलाव कुछ ही समय में एयरलाइंस की लागत संरचना को प्रभावित कर सकता है।

इस परिस्थिति में विमानन कंपनियों के सामने लागत नियंत्रण और यात्रियों के लिए प्रतिस्पर्धी किराए बनाए रखने के बीच संतुलन की चुनौती होगी। वहीं यात्रियों के लिए यह संकेत है कि आने वाले समय में हवाई यात्रा की योजना बनाते हुए किराए में संभावित उतार-चढ़ाव को ध्यान में रखना पड़ सकता है।

ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि केवल एयरलाइंस का मामला नहीं है। इसका असर पर्यटन, कारोबार, क्षेत्रीय संपर्क और उन यात्रियों पर भी पड़ता है जिनके लिए हवाई यात्रा समय बचाने का महत्वपूर्ण साधन है। इसलिए विमानन क्षेत्र को स्थिर और प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए ईंधन लागत के दबाव पर दीर्घकालिक नीति के स्तर पर भी विचार जरूरी है।

Follow E RADIO INDIA on WhatsAppJoin ›